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Noida News: ट्रायल से पहले एयरपोर्ट परिसर में दिखे पांच हिरन, रेस्क्यू कर छोड़े
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ट्रायल से पहले एयरपोर्ट परिसर में दिखे पांच हिरन, रेस्क्यू कर छोड़े
15 नवंबर से होना है रनवे का ट्रायल, उपकरणों की जांच पहले ही हो चुकी है
उड़ान के पहले व उसके दौरान किसी वन्य जीव के सामने आने की स्थिति से निपटने के लिए रेस्क्यू केंद्र बनाया गया
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। 15 नवंबर को होने वाले रनवे के ट्रायल से पहले नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परिसर में पांच हिरन दिखाई दिए, जिनको रेस्क्यू करके प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया है। उड़ान के पहले और उसके दौरान किसी भी प्रकार के वन्य जीव के सामने आने की स्थिति से निपटने के लिए एयरपोर्ट के पास ही वन्य जीव रेस्कयू केंद्र बनाया गया है। जो खासकी इसी मकसद से है। इसके लिए यमुना प्राधिकरण की ओर से 5 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को दी गई है। साथ ही 46 लाख रुपये भी दिए गए हैं। उपकरण की जांच के बाद अब रनवे ट्रॉयल अहम है।
नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पहले चरण में 1,334 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण हो रहा है। इसमें छह गांव शामिल हैं। यह स्थान नील गाय, ब्लैक बक, भारतीय चिंकारे, बंदर, सुनहरे सियार, जंगली बिल्लयां, सारस समेत वन्य जीवों का घर है।
निर्माण के दौरान कुछ वन्य जीवों ने अपना ठिकाना बदल लिया जबकि कुछ दिखाई दे जाते हैं। अप्रैल 2025 में नियमित उड़ान शुरू होने से पहले यहां पर सुरक्षित उड़ान की तैयारियों के मद्देनजर रेस्क्यू केंद्र भी अहम है।
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25 उड़ानों के साथ होगी शुरुआत
17 अप्रैल, 2025 को कॉमर्शियल उड़ाने शुरू होनी हैं। इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूटों के लिए लगभग 30 उड़ानें प्रस्तावित हैं। शुरुआत में 25 उड़ानें प्रमुख घरेलू रूटों को जोड़ेंगी, जबकि तीन उड़ानें अंतरराष्ट्रीय रूट पर होंगी। इसके अलावा, दो उड़ानें कार्गो सेवाओं के लिए होंगी। पूरा होने के बाद, यह हवाई अड्डा एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सिंगापुर, दुबई और ज्यूरिख के लिए होंगी। घरेलू स्तर पर, हवाई अड्डा मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, हैदराबाद, देहरादून और हुबली जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा।
टिकट बुकिंग और लाइसेंसिंग प्रक्रिया
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बुकिंग हवाई अड्डे के आधिकारिक उद्घाटन से 90 दिन पहले शुरू होने की संभावना है, जबकि घरेलू टिकट छह सप्ताह पहले उपलब्ध होंगे।
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वन विभाग को 5 हेक्टेयर जमीन के साथ 46 लाख रुपये रेस्क्यू केंद्र के लिए दिए हैं। हवाई अड्डे का निर्माण ज्यूरिंख कंपनी कर रही है। निर्माण के दौरान अगर कोई वन्य जीव दिखाई देता है तो वही वन विभाग से उसे बचाव के लिए कहती है। सुरक्षित उड़ान के लिए वन्य जीवों का वहां से सुरक्षित दूरी पर होना जरूरी है। - शैलेश भाटिया, ओएसडी, यमुना प्राधिकरण
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15 नवंबर से होना है रनवे का ट्रायल, उपकरणों की जांच पहले ही हो चुकी है
उड़ान के पहले व उसके दौरान किसी वन्य जीव के सामने आने की स्थिति से निपटने के लिए रेस्क्यू केंद्र बनाया गया
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। 15 नवंबर को होने वाले रनवे के ट्रायल से पहले नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परिसर में पांच हिरन दिखाई दिए, जिनको रेस्क्यू करके प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया है। उड़ान के पहले और उसके दौरान किसी भी प्रकार के वन्य जीव के सामने आने की स्थिति से निपटने के लिए एयरपोर्ट के पास ही वन्य जीव रेस्कयू केंद्र बनाया गया है। जो खासकी इसी मकसद से है। इसके लिए यमुना प्राधिकरण की ओर से 5 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को दी गई है। साथ ही 46 लाख रुपये भी दिए गए हैं। उपकरण की जांच के बाद अब रनवे ट्रॉयल अहम है।
नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पहले चरण में 1,334 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण हो रहा है। इसमें छह गांव शामिल हैं। यह स्थान नील गाय, ब्लैक बक, भारतीय चिंकारे, बंदर, सुनहरे सियार, जंगली बिल्लयां, सारस समेत वन्य जीवों का घर है।
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निर्माण के दौरान कुछ वन्य जीवों ने अपना ठिकाना बदल लिया जबकि कुछ दिखाई दे जाते हैं। अप्रैल 2025 में नियमित उड़ान शुरू होने से पहले यहां पर सुरक्षित उड़ान की तैयारियों के मद्देनजर रेस्क्यू केंद्र भी अहम है।
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25 उड़ानों के साथ होगी शुरुआत
17 अप्रैल, 2025 को कॉमर्शियल उड़ाने शुरू होनी हैं। इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूटों के लिए लगभग 30 उड़ानें प्रस्तावित हैं। शुरुआत में 25 उड़ानें प्रमुख घरेलू रूटों को जोड़ेंगी, जबकि तीन उड़ानें अंतरराष्ट्रीय रूट पर होंगी। इसके अलावा, दो उड़ानें कार्गो सेवाओं के लिए होंगी। पूरा होने के बाद, यह हवाई अड्डा एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सिंगापुर, दुबई और ज्यूरिख के लिए होंगी। घरेलू स्तर पर, हवाई अड्डा मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, हैदराबाद, देहरादून और हुबली जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा।
टिकट बुकिंग और लाइसेंसिंग प्रक्रिया
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बुकिंग हवाई अड्डे के आधिकारिक उद्घाटन से 90 दिन पहले शुरू होने की संभावना है, जबकि घरेलू टिकट छह सप्ताह पहले उपलब्ध होंगे।
वन विभाग को 5 हेक्टेयर जमीन के साथ 46 लाख रुपये रेस्क्यू केंद्र के लिए दिए हैं। हवाई अड्डे का निर्माण ज्यूरिंख कंपनी कर रही है। निर्माण के दौरान अगर कोई वन्य जीव दिखाई देता है तो वही वन विभाग से उसे बचाव के लिए कहती है। सुरक्षित उड़ान के लिए वन्य जीवों का वहां से सुरक्षित दूरी पर होना जरूरी है। - शैलेश भाटिया, ओएसडी, यमुना प्राधिकरण