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खास खबर--प्रदूषण को कम करेगा ग्रेटर नोएडा का पहला अर्बन फॉरेस्ट
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प्रदूषण कम करेगा ग्रेटर नोएडा का पहला शहरी वन
ग्रेटर नोएडा। दनकौर के पास ग्रेटर नोएडा का पहला अर्बन फॉरेस्ट तैयार किया जा रहा है। जो 50 बीघा जमीन पर सेमी मियावाकी तकनीक से विकसित होगा। इसका काम शुरू हो गया है। शहर के पास जंगल बनने से वायु प्रदूषण कम होने के साथ हरियाली को बढ़ावा मिलेगा। वहां जंगली जानवर भी अपना बसेरा बना सकेंगे। जिला प्रशासन इसमें सहयोग कर रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण काफी ज्यादा है। इसे कम करने के लिए केंद्र सरकार हरियाली को बढ़ावा दे रही है। सरकार देश के 200 शहरों में अर्बन फॉरेस्ट विकसित कर रही है। इस योजना से प्रभावित होकर एचसीएल और ग्रीन यात्रा संस्था ग्रेटर नोएडा ने अर्बन फॉरेस्ट पर काम शुरू किया है। इसका प्रस्ताव प्रशासन को दिया गया था। प्रशासन ने सहयोग कर दनकौर के पास 50 बीघा जमीन उपलब्ध करवाई। जो यमुना एक्सप्रेसवे से लगी है।
पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड़ को प्रोजेक्ट का सलाहकार नियुक्त किया गया है। विक्रांत ने बताया कि पहले चरण में 20 हजार पौधे लगाए जाएंगे। मिट्टी की प्रकृति के हिसाब से जमीन पर जामुन, अमरूद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। जमीन को समतल करने का काम चल रहा है। तार फेंसिंग का काम पूरा हो गया है। एसचीएल पूरा खर्च उठा रहा है। उन्होंने बताया कि पौधों को सेमी मियावाकी तकनीक पर लगाया जाएगा। इनके बीच थोड़ी दूरी रखी जाएगी।
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शहर के पास जंगल का मिलेगा लाभ
विक्रांत ने बताया कि शहर के पास जंगल होने का काफी लाभ मिलेगा। हरियाली बढ़ने से वायु प्रदूषण कम होगा। ऑक्सीजन का स्तर बढ़ेगा। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति, भूजल स्तर बढ़ेगा। धूल और ध्वनि प्रदूषण पर भी असर पड़ेगा। जंगली जानवर जैसे नील गाय आदि को रहने की जगह मिल जाएगी।
अभी सूरजपुर और लुकसर के पास है जंगल
ग्रेटर नोएडा का सबसे बड़ा जंगल सूरजपुर में है। वहां वेटलैंड के साथ वन विभाग का जंगल भी है। उसके बाद लुकसर गांव के पास जंगल है। दनकौर के पास बन रहा अर्बन फॉरेस्ट तीसरा जंगल होगा। हालांकि, इसका क्षेत्रफल कम होगा, लेकिन यह पर्यावरण के लिए काफी असरदार साबित होगा।
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ग्रेटर नोएडा। दनकौर के पास ग्रेटर नोएडा का पहला अर्बन फॉरेस्ट तैयार किया जा रहा है। जो 50 बीघा जमीन पर सेमी मियावाकी तकनीक से विकसित होगा। इसका काम शुरू हो गया है। शहर के पास जंगल बनने से वायु प्रदूषण कम होने के साथ हरियाली को बढ़ावा मिलेगा। वहां जंगली जानवर भी अपना बसेरा बना सकेंगे। जिला प्रशासन इसमें सहयोग कर रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण काफी ज्यादा है। इसे कम करने के लिए केंद्र सरकार हरियाली को बढ़ावा दे रही है। सरकार देश के 200 शहरों में अर्बन फॉरेस्ट विकसित कर रही है। इस योजना से प्रभावित होकर एचसीएल और ग्रीन यात्रा संस्था ग्रेटर नोएडा ने अर्बन फॉरेस्ट पर काम शुरू किया है। इसका प्रस्ताव प्रशासन को दिया गया था। प्रशासन ने सहयोग कर दनकौर के पास 50 बीघा जमीन उपलब्ध करवाई। जो यमुना एक्सप्रेसवे से लगी है।
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पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड़ को प्रोजेक्ट का सलाहकार नियुक्त किया गया है। विक्रांत ने बताया कि पहले चरण में 20 हजार पौधे लगाए जाएंगे। मिट्टी की प्रकृति के हिसाब से जमीन पर जामुन, अमरूद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। जमीन को समतल करने का काम चल रहा है। तार फेंसिंग का काम पूरा हो गया है। एसचीएल पूरा खर्च उठा रहा है। उन्होंने बताया कि पौधों को सेमी मियावाकी तकनीक पर लगाया जाएगा। इनके बीच थोड़ी दूरी रखी जाएगी।
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शहर के पास जंगल का मिलेगा लाभ
विक्रांत ने बताया कि शहर के पास जंगल होने का काफी लाभ मिलेगा। हरियाली बढ़ने से वायु प्रदूषण कम होगा। ऑक्सीजन का स्तर बढ़ेगा। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति, भूजल स्तर बढ़ेगा। धूल और ध्वनि प्रदूषण पर भी असर पड़ेगा। जंगली जानवर जैसे नील गाय आदि को रहने की जगह मिल जाएगी।
अभी सूरजपुर और लुकसर के पास है जंगल
ग्रेटर नोएडा का सबसे बड़ा जंगल सूरजपुर में है। वहां वेटलैंड के साथ वन विभाग का जंगल भी है। उसके बाद लुकसर गांव के पास जंगल है। दनकौर के पास बन रहा अर्बन फॉरेस्ट तीसरा जंगल होगा। हालांकि, इसका क्षेत्रफल कम होगा, लेकिन यह पर्यावरण के लिए काफी असरदार साबित होगा।