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रॉयल हेरिटेज सोसाइटी की 18वीं मंजिल पर लगी आग
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फरीदाबाद। सेक्टर-70 स्थित रॉयल हेरिटेज सोसाइटी की 18वीं मंजिल पर शनिवार देर रात आग लग गई। आग से एक फ्लैट पूरी तरह जल गया जबकि अलग-अलग तलों पर बने करीब 14 फ्लैटों में लाखों का नुकसान हुआ है। दमकल की चार गाड़ियों ने करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग से कोई हताहत नहीं हुआ है। पुलिस और अग्निशमन अधिकारियों ने फिलहाल शाट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई है।
थाना सदर प्रभारी रामबीर सिंह ने बताया कि घटना देर रात करीब ढाई बजे की है। आग लगने की सूचना मिलते ही ड्यूटी ऑफिसर देवेंद्र सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची। टावर नंबर-19 की 18 वीं मंजिल पर बने फ्लैट नंबर 1805 में तेज आग लगी थी। फ्लैट उत्कल केसरी मोहंती का है। जो पेशे से इंजीनियर हैं। आग लगने के वक्त पूरा परिवार घर में ही था। आग से उठे धुएं के बीच परिवार के लोग किसी तरह बाहर निकल आए। देखते ही देखते आग की लपटें तेज हो गईं। आग की लपटें गैलरी से बाहर तक दिखाई दे रही थीं। इस बीच ऊपर से ज्वलनशील कचरा नीचे 11 वीं मंजिल पर फ्लैट नंबर 1105 में नीचे गिर गया। इससे 1105 में भी आग लग गई।
हालांकि फ्लैट के निवासी इससे पहले ही नीचे आ चुके थे। टावर नंबर-19 के प्रथम तल से लेकर 33वीं मंजिल तक पुलिस कर्मियों ने हर फ्लैट के गेट पर जाकर लोगों को आग के बारे में सूचना दी। कुछ लोग पहले ही नीचे आ चुके थे। 18वीं मंजिल से ऊपर वाली सभी मंजिलों के निवासियों को सीढ़ियों से ले जाकर टावर नंबर 20 से नीचे उतार कर सुरक्षित किया।
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11वीं मंजिल तक नहीं पहुंचा पानी, बाल्टियों से बुझाई आग
आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंची दमकल के पानी का प्रेशर 11वीं मंजिल तक नहीं पहुंच सका। फायर ब्रिगेड व पुलिस के कर्मचारियों ने फ्लैटों से बाल्टियों की मदद से पानी ले जाकर आग पर काबू किया। आगजनी में किसी जान की कोई क्षति नहीं हुई है। फ्लैट नंबर 1805 पूरी तरह से जल गया है। आग से कई फ्लैटों में हल्का नुकसान हुआ है। करीब 14 फ्लैट मालिकों ने नुकसान की बात कही है।
खाली थी 33वीं मंजिल पर रखी पानी की आपातकालीन टंकी
फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-70 स्थित रॉयल हेरिटेज सोसाइटी की 18वीं मंजिल पर लगी आग को काबू करने में दमकल विभाग और पुलिस कर्मियों के पसीने छूट गए। सीढ़ियों से दमकल विभाग के कर्मचारी 33वीं मंजिल पर रखी आपातकालीन इस्तेमाल के लिए बनी टंकी तक पहुंचे। उन्होंने सोसाइटी में लगे फायर सिस्टम को चालू करना चाहा लेकिन पानी की टंकी खाली थी। आग बुझाने में यदि दमकल विभाग और पुलिसकर्मी अपनी सूझबूझ का परिचय नहीं देते तो हालात बेहद खतरनाक हो सकते थे। सोसाइटी के लोगों ने सदर थाने में बिल्डर के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दी है।
सदर थाना प्रभारी रामबीर सिंह ने बताया कि सूचना पर उनके थाने से करीब दस लोग मौके पर पहुंचे थे। हालात बेकाबू होते देख वह खुद अपनी पीसीआर और पुलिस कर्मियों के निजी वाहनों से सभी कर्मचारियों को सोसाइटी में लेकर पहुंचे। दमकल विभाग से आए कर्मचारियों के लिए आग तक पानी पहुंचना सबसे बड़ी समस्या थी। सोसाइटी की छत पर रखी आपातकालीन टंकी के निचले वॉल्व को किसी ने गलती से खुला छोड़ दिया था। इसके कारण टंकी खाली हो गई थी।
24 मंजिल से पर्ची फेंककर पुलिस से मांगी मदद
थाना प्रभारी ने बताया कि लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे अहम काम था। आग लगते ही सोसाइटी की लिफ्ट बंद कर दी गई थी। 33वीं मंजिल की इमारत में सीढ़ियों से चढ़ना, उतरना ही टेढ़ी खीर था। उन्होंने बताया कि 18वीं मंजिल पर आग लगी थी। उससे नीचे के फ्लैट में रह रहे लोगों को नीचे भेज दिया गया, जबकि ऊपर वाले फ्लैट के लोगों को 33वीं मंजिल तक ऊपर ले जाकर कर टॉवर नंबर 20 की सीढ़ियों से नीचे उतारा गया। नीचे आने के बाद एक परिवार ने पर्ची में प्लीज हेल्प और अपना मोबाइल नंबर लिखकर नीचे फेंका। पुलिस टीम ने मोबाइल पर संपर्क कर उन्हें गैलरी में रहने के लिए कहा। दोबारा से 24वीं मंजिल पर पहुंचकर परिवार को बचाया गया। पुलिस के मुताबिक सोसाइटी के लोग आपसी तालमेल की कमी से जूझ रहे थे। इसके कारण पुलिस टीम को बार-बार लोगों को बचाने के लिए 33 मंजिल सीढ़ियों से चढ़ना पड़ रहा था।
दम घुटने से बुजुर्ग परेशान
दमकल विभाग के कर्मचारी आग बुझाने के लिए आसपास के फ्लैट से बाल्टियों पानी भरकर लाते रहे। इधर पुलिस के लिए लोगों को बाहर निकालने का काम जारी था। ड्यूटी अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि फ्लैट की सीढ़ियों में वेंटिलेशन का कोई इंतजाम नहीं था। सीढ़ियों को सीमेंट की जालियों से ढंका गया था। इसके चलते धुएं में बुजुर्ग लोगों का सांस फूलने लगा। इतनी ऊंचाई पर सीढ़ियों में चढ़ते उतरने में भी महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को पुलिस के कर्मचारी अपनी पीठ पर लादकर नीचे लेकर आए।
नहीं है हाइड्रोलिक प्लेटफार्म
जिला अग्निशमक अधिकारी सत्यवान समरीवाल का कहना है कि दमकल विभाग के पास एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं है। गुरुग्राम में 42 मीटर तक ऊंचाई वाला हाइड्रोलिक प्लेटफार्म है, जिससे 39 मीटर तक रेस्क्यू किया जा सकता है। शहर में इमारतों की ऊंचाई 100 मीटर से भी ज्यादा पहुंच गई है। ऐसे में सोसाइटी के उपकरणों को ही समय समय पर चेक करना चाहिए।
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थाना सदर प्रभारी रामबीर सिंह ने बताया कि घटना देर रात करीब ढाई बजे की है। आग लगने की सूचना मिलते ही ड्यूटी ऑफिसर देवेंद्र सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची। टावर नंबर-19 की 18 वीं मंजिल पर बने फ्लैट नंबर 1805 में तेज आग लगी थी। फ्लैट उत्कल केसरी मोहंती का है। जो पेशे से इंजीनियर हैं। आग लगने के वक्त पूरा परिवार घर में ही था। आग से उठे धुएं के बीच परिवार के लोग किसी तरह बाहर निकल आए। देखते ही देखते आग की लपटें तेज हो गईं। आग की लपटें गैलरी से बाहर तक दिखाई दे रही थीं। इस बीच ऊपर से ज्वलनशील कचरा नीचे 11 वीं मंजिल पर फ्लैट नंबर 1105 में नीचे गिर गया। इससे 1105 में भी आग लग गई।
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हालांकि फ्लैट के निवासी इससे पहले ही नीचे आ चुके थे। टावर नंबर-19 के प्रथम तल से लेकर 33वीं मंजिल तक पुलिस कर्मियों ने हर फ्लैट के गेट पर जाकर लोगों को आग के बारे में सूचना दी। कुछ लोग पहले ही नीचे आ चुके थे। 18वीं मंजिल से ऊपर वाली सभी मंजिलों के निवासियों को सीढ़ियों से ले जाकर टावर नंबर 20 से नीचे उतार कर सुरक्षित किया।
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11वीं मंजिल तक नहीं पहुंचा पानी, बाल्टियों से बुझाई आग
आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंची दमकल के पानी का प्रेशर 11वीं मंजिल तक नहीं पहुंच सका। फायर ब्रिगेड व पुलिस के कर्मचारियों ने फ्लैटों से बाल्टियों की मदद से पानी ले जाकर आग पर काबू किया। आगजनी में किसी जान की कोई क्षति नहीं हुई है। फ्लैट नंबर 1805 पूरी तरह से जल गया है। आग से कई फ्लैटों में हल्का नुकसान हुआ है। करीब 14 फ्लैट मालिकों ने नुकसान की बात कही है।
खाली थी 33वीं मंजिल पर रखी पानी की आपातकालीन टंकी
फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-70 स्थित रॉयल हेरिटेज सोसाइटी की 18वीं मंजिल पर लगी आग को काबू करने में दमकल विभाग और पुलिस कर्मियों के पसीने छूट गए। सीढ़ियों से दमकल विभाग के कर्मचारी 33वीं मंजिल पर रखी आपातकालीन इस्तेमाल के लिए बनी टंकी तक पहुंचे। उन्होंने सोसाइटी में लगे फायर सिस्टम को चालू करना चाहा लेकिन पानी की टंकी खाली थी। आग बुझाने में यदि दमकल विभाग और पुलिसकर्मी अपनी सूझबूझ का परिचय नहीं देते तो हालात बेहद खतरनाक हो सकते थे। सोसाइटी के लोगों ने सदर थाने में बिल्डर के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दी है।
सदर थाना प्रभारी रामबीर सिंह ने बताया कि सूचना पर उनके थाने से करीब दस लोग मौके पर पहुंचे थे। हालात बेकाबू होते देख वह खुद अपनी पीसीआर और पुलिस कर्मियों के निजी वाहनों से सभी कर्मचारियों को सोसाइटी में लेकर पहुंचे। दमकल विभाग से आए कर्मचारियों के लिए आग तक पानी पहुंचना सबसे बड़ी समस्या थी। सोसाइटी की छत पर रखी आपातकालीन टंकी के निचले वॉल्व को किसी ने गलती से खुला छोड़ दिया था। इसके कारण टंकी खाली हो गई थी।
24 मंजिल से पर्ची फेंककर पुलिस से मांगी मदद
थाना प्रभारी ने बताया कि लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे अहम काम था। आग लगते ही सोसाइटी की लिफ्ट बंद कर दी गई थी। 33वीं मंजिल की इमारत में सीढ़ियों से चढ़ना, उतरना ही टेढ़ी खीर था। उन्होंने बताया कि 18वीं मंजिल पर आग लगी थी। उससे नीचे के फ्लैट में रह रहे लोगों को नीचे भेज दिया गया, जबकि ऊपर वाले फ्लैट के लोगों को 33वीं मंजिल तक ऊपर ले जाकर कर टॉवर नंबर 20 की सीढ़ियों से नीचे उतारा गया। नीचे आने के बाद एक परिवार ने पर्ची में प्लीज हेल्प और अपना मोबाइल नंबर लिखकर नीचे फेंका। पुलिस टीम ने मोबाइल पर संपर्क कर उन्हें गैलरी में रहने के लिए कहा। दोबारा से 24वीं मंजिल पर पहुंचकर परिवार को बचाया गया। पुलिस के मुताबिक सोसाइटी के लोग आपसी तालमेल की कमी से जूझ रहे थे। इसके कारण पुलिस टीम को बार-बार लोगों को बचाने के लिए 33 मंजिल सीढ़ियों से चढ़ना पड़ रहा था।
दम घुटने से बुजुर्ग परेशान
दमकल विभाग के कर्मचारी आग बुझाने के लिए आसपास के फ्लैट से बाल्टियों पानी भरकर लाते रहे। इधर पुलिस के लिए लोगों को बाहर निकालने का काम जारी था। ड्यूटी अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि फ्लैट की सीढ़ियों में वेंटिलेशन का कोई इंतजाम नहीं था। सीढ़ियों को सीमेंट की जालियों से ढंका गया था। इसके चलते धुएं में बुजुर्ग लोगों का सांस फूलने लगा। इतनी ऊंचाई पर सीढ़ियों में चढ़ते उतरने में भी महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को पुलिस के कर्मचारी अपनी पीठ पर लादकर नीचे लेकर आए।
नहीं है हाइड्रोलिक प्लेटफार्म
जिला अग्निशमक अधिकारी सत्यवान समरीवाल का कहना है कि दमकल विभाग के पास एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं है। गुरुग्राम में 42 मीटर तक ऊंचाई वाला हाइड्रोलिक प्लेटफार्म है, जिससे 39 मीटर तक रेस्क्यू किया जा सकता है। शहर में इमारतों की ऊंचाई 100 मीटर से भी ज्यादा पहुंच गई है। ऐसे में सोसाइटी के उपकरणों को ही समय समय पर चेक करना चाहिए।