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Noida News: कंधे से कंधा मिलाकर, परिवार की खातिर जीती हैं ये महिलाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। समाज में आज महिलाएं पढ़-लिख कर अपनी पहचान बना रही हैं, लेकिन ऐसे भी अनगिनत महिलाएं हैं, जो अनपढ़ होने के बावजूद परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए दिन-रात संघर्ष करती हैं। नोएडा की गलियों, बिल्डिंग साइट्स और मजदूर कॉलोनियों में उनकी मेहनत की अनकही कहानी देखने को मिलती है।
मेरी शादी को 15 साल हो गए हैं और तब से ही जिंदगी में संघर्ष चलता आ रहा है। पहले सिर्फ पति ही मजदूरी करते थे, लेकिन अब महंगाई इतनी बढ़ गई है कि मुझे भी उनके साथ काम करना पड़ता है। हम दोनों दिन भर मेहनत करते हैं ताकि बच्चों को पढ़ा सकें और उन्हें वो जिंदगी दे सकें जो हमें नहीं मिल पाई। - सुलेखा
मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हूं, इसी वजह से मुझे अच्छा काम नहीं मिल पाता। मेरे पति भी मजदूरी करते हैं, तो मैंने सोचा कि मैं भी उनका हाथ बंटाऊं। दिन-रात मेहनत करते हैं तब जाकर घर में चूल्हा जलता है। कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है, लेकिन जब बच्चों को खाना खाते देखती हूं तो लगता है मेहनत सफल हो गई। -पूजा
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हम हरदोई से काम की तलाश में नोएडा आए थे, सोचा था कुछ अच्छा मिलेगा, लेकिन यहां भी मजदूरी ही करनी पड़ रही है। मैं और मेरे पति दोनों साइट पर काम करते हैं और दिन भर की मेहनत के बाद ही 500-800 रुपये मिलते हैं। कभी-कभी लगता है अगर हम पढ़े-लिखे होते तो जिंदगी आसान होती। लेकिन अब जो है उसी में मेहनत करके परिवार चलाना हमारी मजबूरी भी है । - कमला
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नोएडा। समाज में आज महिलाएं पढ़-लिख कर अपनी पहचान बना रही हैं, लेकिन ऐसे भी अनगिनत महिलाएं हैं, जो अनपढ़ होने के बावजूद परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए दिन-रात संघर्ष करती हैं। नोएडा की गलियों, बिल्डिंग साइट्स और मजदूर कॉलोनियों में उनकी मेहनत की अनकही कहानी देखने को मिलती है।
मेरी शादी को 15 साल हो गए हैं और तब से ही जिंदगी में संघर्ष चलता आ रहा है। पहले सिर्फ पति ही मजदूरी करते थे, लेकिन अब महंगाई इतनी बढ़ गई है कि मुझे भी उनके साथ काम करना पड़ता है। हम दोनों दिन भर मेहनत करते हैं ताकि बच्चों को पढ़ा सकें और उन्हें वो जिंदगी दे सकें जो हमें नहीं मिल पाई। - सुलेखा
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मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हूं, इसी वजह से मुझे अच्छा काम नहीं मिल पाता। मेरे पति भी मजदूरी करते हैं, तो मैंने सोचा कि मैं भी उनका हाथ बंटाऊं। दिन-रात मेहनत करते हैं तब जाकर घर में चूल्हा जलता है। कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है, लेकिन जब बच्चों को खाना खाते देखती हूं तो लगता है मेहनत सफल हो गई। -पूजा
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हम हरदोई से काम की तलाश में नोएडा आए थे, सोचा था कुछ अच्छा मिलेगा, लेकिन यहां भी मजदूरी ही करनी पड़ रही है। मैं और मेरे पति दोनों साइट पर काम करते हैं और दिन भर की मेहनत के बाद ही 500-800 रुपये मिलते हैं। कभी-कभी लगता है अगर हम पढ़े-लिखे होते तो जिंदगी आसान होती। लेकिन अब जो है उसी में मेहनत करके परिवार चलाना हमारी मजबूरी भी है । - कमला