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एमजे अकबर मानहानि केस: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र में स्वाभाविक

Sun, 20 Sep 2020 12:13 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2020 12:13 AM IST
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female journalist accused in M J Akbar defamation case argued freedom of speech is intrsic in democracy
नई दिल्ली। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता स्वाभाविक है और उसने यौन उत्पीड़न के जो आरोप पूर्व केंद्रीय मंत्री पर लगाए वह उसकी सचाई थे। यह अंतिम दलीलें एमजे अकबर मानहानि मामले में बरी करने की मांग करते आरोपी महिला पत्रकार ने शनिवार को कोर्ट में रखी। अदालत मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को करेगी।
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महिला पत्रकार ने मीटू अभियान के दौरान आरोप लगाया था कि अकबर ने करीब 20 साल पहले उसका यौन उत्पीड़न किया था। तब वह पत्रकार थे। हालांकि इन आरोपों के बाद एमजे अकबर ने अक्तूबर 2018 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन महिला पत्रकार पर मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
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राउज एवेन्यू अदालत के एसीएमएम विशाल पाहूजा के समक्ष अंतिम जिरह करते हुए महिला पत्रकार की वकील रिबैका जौन ने कहा कि मीटू अभियान लंबे समय से चले आ रही गलत परिपाटी को सही करने के लिए शुरू किया गया था। मीटू अभियान ने दुनियाभर की महिलाओं को आगे आकर अपने यौन उत्पीड़न की कहानियां बयान करने के लिए एक मंच दिया था।
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कोर्ट के समक्ष बचाव पक्ष की वकील ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति तथा विचारों की स्वतंत्रता बेहद जरूरी तथा स्वाभाविक है। उनकी मुव्वकिल मीटू अभियान का एक छोटा सा हिस्सा थीं। इसमें हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया था। मेरी मुव्वकिल अपना पक्ष साबित कर चुकी है और बरी किए जाने की अधिकारी है। उसने अकबर के खिलाफ जो भी कहा वह सच था और जनहित में कहा था।
इतने सालों तक आरोपी ने अपनी आवाज क्यों नहीं उठाई? इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ अधिवक्ता रिबैका जौन ने कहा कि पहले ऐसी घटना होने पर चुप रहने की संस्कृति थी। मामले में गवाह एक अन्य महिला पत्रकार ने कहा कि ऐसे मामलों की शिकायत के लिए कार्य स्थलों पर पहले कोई तंत्र नहीं था। उन्होंने कहा कि 1993 में विशाखा गाइडलाइन नहीं थी और इसके बनने के बाद भी मीडिया संस्थानों में इसे लागू होने में काफी समय लगा।

बचाव पक्ष की वकील ने कहा कि उनकी मुव्वकिल के चुप रहने से सच बदल नहीं जाता। वह कोई एफआईआर दायर नहीं कर रही हैं जिसमें विलंब की कोर्ट को पड़ताल करनी है। वह अपनी खामोशी के बारे में विस्तार से बता चुकी हैं। विशाखा गाइडलाइन लागू होने में काफी समय लगा लेकिन इसका खामियाजा भरने के लिए उनकी मुव्वकिल को विवश नहीं किया जा सकता। वह अपनी सफाई में 14 गवाहों को पेश कर चुकी है। - एजेंसी
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