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फीस रेग्युलेटरी एक्ट-Business

Mon, 27 May 2019 01:30 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2019 01:30 AM IST
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Fees Ragulatery System Failed
फीस रेग्युलेटरी एक्ट तो बना लेकिन फायदा आज तक न मिला
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नोएडा। फीस रेग्युलेटरी एक्ट लागू होने के बाद भी अभिभावकों क ो राहत नहीं मिल पाई है। अभिभावक अभी भी बढ़ी हुई फीस के बोझ से परेशान हैं। आज ऑल नोएडा स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन के पदाधिकारी मेरठ मंडल के कमिश्नर से मिलने जा रहे हैं, ताकि मामले में राहत मिल सके। अभिभावकों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में लगातार स्कूलों की मनमानी से प्राइमरी शिक्षा उच्च शिक्षा से महंगी होती जा रही है। अगर चुप रहे तो सिर्फ नर्सरी की पढ़ाई ही उच्च शिक्षा पर भारी पड़ जाएगी।
नए सत्र में स्कूलों की फीस स्लिप देखकर अभिभावकों के होश उड़ गए थे। फीस जमा करने के बाद से ही अभिभावकों का बजट बिगड़ हुआ है। वार्षिक शुल्क, एक्टिविटी, न्यूजपेपर, कंप्यूटर के अलावा अलग-अलग मदों में अभिभावकों से फीस ली गई है। स्कूलों की मनमानी के चलते हालत ये हो गए हैं कि प्राथमिक शिक्षा उच्च शिक्षा से महंगी होती जा रही है। जबकि प्राइमरी शिक्षा के आधार अगली कक्षा में दाखिला मिलता है। वहीं, उच्च शिक्षा के आधार पर नौकरी मिलती है। शहर के अच्छे स्कूल में पहली कक्षा तक पहुंचने में ही 6 से 7 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
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ऑल नोएडा स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यतेंद्र कसाना ने बताया कि पिछले कुछ सालों में स्कूलों ने सभी सीमाएं लांघ दी हैं। अगर ठीक ठाक स्कूल में बच्चों को पढ़ाए तो पांचवीं कक्षा तक 6 से 8 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जिनमें एक महीने का खर्चा करीब 30 हजार रुपये है। ऐसे में फीस रेग्युलेटरी एक्ट से उम्मीद थी कि कुछ राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। सोमवार को कमिश्नर से मिलने जा रहे हैं। वहां अपनी बात रखेंगे।
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गेम्स के नाम पर कट रही है जेब
अभिभावकों से स्कूल में होने वाले खेलकूद के नाम पर भी फीस वसूली जा रही है। अगर बच्चा शतरंज खेलता है तो 100 रुपये महीना। टेबल टेनिस खेलता है तो 400 रुपये महीने के हिसाब से देना पड़ रहा है। इसी तरह से हर खेल के लिए अलग फीस निर्धारित की गई है।
किताबों में डिस्काउंट के लिए किया मेल
एक अभिभावक ने बताया कि स्कूल में एमआरपी पर किताबें बेची जा रही थीं। इसलिए स्कूल से मेल के जरिए डिस्काउंट की मांग की थी। जबकि स्कूल चाहे तो किताबों पर डिस्काउंट दे सकता है। लेकिन ऐसा करता नहीं है। स्कूल की तरफ से एनसीईआरटी की किताब तक नहीं लगवाई जाती है।
केस स्टडी
सेक्टर-22 में रहने वाले रविंद्र ने बताया कि मैंने अपने छोटी बेटी का दाखिला स्कूल में कराया है। स्कूल से दाखिले के वक्त 67 हजार रुपये की स्लिप थमाई गई है। बड़े बेटे की भी फीस देनी है। इसके अलाव मकान का किराया भी है। ऐसे में मुझे फीस देने के लिए लोन लेना पड़ा है।

फीस की खबर का जोड़
अगले सप्ताह होगी बैठक
नोएडा। निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर ऑल नोएडा स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन ने डिस्ट्रिक्ट फीस रेग्युलेटरी कमेटी को शिकायत की थी। अब तक करीब 17 स्कूलों की शिकायत कमेटी के पास पहुंच चुकी है। शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूलों के खिलाफ आई शिकायत पर अगले सप्ताह बैठक हो सकेगी। जिला विद्यालय निरीक्षक पीके उपाध्याय ने बताया कि कई स्कूलों की शिकायत आई है। इस सप्ताह प्रवेश परीक्षाएं हैं। शिक्षा विभाग को उसकी तैयारी करनी है। ऐसे में अगले सप्ताह ही बैठक हो पाएगी।
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