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Noida News: बच्चों के दिल की दवा बना चाइल्ड पीजीआई, 300 से अधिक का हुआ सफल इलाज
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फोटो है
-संस्थान के पीडियाट्रि्क कार्डियक सर्जरी विभाग में बच्चों के दिल की सर्जरी की जा रही
-2018 से अबतक राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 300 बच्चों के दिल की सर्जरी की गई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई बच्चों के दिल का हाल ठीक कर रहा है। संस्थान में 2018 से शुरू हुई पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी में अब तक 300 से अधिक बच्चों के दिल का इलाज किया गया है। यह बच्चे जिन्हें तेज दौड़ना, कूदना मना था अब वह बेहतर बचपन जीते हुए खेलकूद कर रहे हैं। पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमावत ने बताया कि संस्थान में 2018 से पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी शुरू की गई थी और इसमें अब तक राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत 300 बच्चों की निशुल्क कार्डियक सर्जरी की जा चुकी है। इस सर्जरी में 18 साल तक के बच्चे शामिल हैं।
डॉ. मुकेश ने बताया कि दिल में छेद की बात करें तो हर बच्चे के दिल का छेद अलग-अलग तरह का होता है। सर्जरी कब करनी है यह दिल के छेद का आकार पर ही निर्भर करता है। कुछ दिल के छेद ऐसे होते हैं जिनमें तुरंत सर्जरी करवाने की जरूरत पड़ती है। हालांकि जो सामान्य छेद होते हैं इसमें चार-पांच साल की उम्र में सर्जरी की जाती है। बेहतर रहता है कि सर्जरी स्कूल शुरू होने से पहले हो जाए। इसके अलावा कुछ छेद ऐसे भी होते हैं जो समय के साथ भर जाते हैं।
जितना बड़ा
छेद उतनी सांस की दिक्कत :
डॉ. मुकेश ने बताया कि बच्चे के दिल में जितना बड़ा छेद होगा उतनी अधिक सांस लेने में दिक्कत होगी। इसके अलावा बच्चे को बार-बार फेफड़ों का संक्रमण होने का खतरा रहता है। दौड़ने, भागने और तेज चलने में बच्चा हांफने लगता है। इसके अलावा सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या जल्दी-जल्दी हो जाती है। ऐसे में संस्थान में हर महीने 5 से 6 बच्चों की कार्डियक सर्जरी आरबीएसके के तहत की जाती है। इसके अलावा आयुष्मान योजना के तहत भी बच्चे सर्जरी के लिए आते हैं।
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केस - 1
रोहन के जन्म के बाद दिल में छेद का पता चला था। डॉक्टर ने उसे कूदने, तेज भागने से भी मना किया था। तीन साल की उम्र में डॉक्टर ने रोहन की सर्जरी कर दी थी और आज वह पूरी तरह स्वस्थ है।
केस - 2
सविता की तीन साल की बेटी की कुछ दिन पहले ही कार्डियक सर्जरी की गई है। सविता ने बताया कि बच्ची के जन्म के बाद दिल में छेद का पता चला था। ऐसे में सर्जरी करवाना जरूरी हो गया था। अब बच्ची बिल्कुल ठीक है।
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-संस्थान के पीडियाट्रि्क कार्डियक सर्जरी विभाग में बच्चों के दिल की सर्जरी की जा रही
-2018 से अबतक राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 300 बच्चों के दिल की सर्जरी की गई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई बच्चों के दिल का हाल ठीक कर रहा है। संस्थान में 2018 से शुरू हुई पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी में अब तक 300 से अधिक बच्चों के दिल का इलाज किया गया है। यह बच्चे जिन्हें तेज दौड़ना, कूदना मना था अब वह बेहतर बचपन जीते हुए खेलकूद कर रहे हैं। पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर डॉ. मुकेश कुमावत ने बताया कि संस्थान में 2018 से पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी शुरू की गई थी और इसमें अब तक राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत 300 बच्चों की निशुल्क कार्डियक सर्जरी की जा चुकी है। इस सर्जरी में 18 साल तक के बच्चे शामिल हैं।
डॉ. मुकेश ने बताया कि दिल में छेद की बात करें तो हर बच्चे के दिल का छेद अलग-अलग तरह का होता है। सर्जरी कब करनी है यह दिल के छेद का आकार पर ही निर्भर करता है। कुछ दिल के छेद ऐसे होते हैं जिनमें तुरंत सर्जरी करवाने की जरूरत पड़ती है। हालांकि जो सामान्य छेद होते हैं इसमें चार-पांच साल की उम्र में सर्जरी की जाती है। बेहतर रहता है कि सर्जरी स्कूल शुरू होने से पहले हो जाए। इसके अलावा कुछ छेद ऐसे भी होते हैं जो समय के साथ भर जाते हैं।
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जितना बड़ा
छेद उतनी सांस की दिक्कत :
डॉ. मुकेश ने बताया कि बच्चे के दिल में जितना बड़ा छेद होगा उतनी अधिक सांस लेने में दिक्कत होगी। इसके अलावा बच्चे को बार-बार फेफड़ों का संक्रमण होने का खतरा रहता है। दौड़ने, भागने और तेज चलने में बच्चा हांफने लगता है। इसके अलावा सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या जल्दी-जल्दी हो जाती है। ऐसे में संस्थान में हर महीने 5 से 6 बच्चों की कार्डियक सर्जरी आरबीएसके के तहत की जाती है। इसके अलावा आयुष्मान योजना के तहत भी बच्चे सर्जरी के लिए आते हैं।
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केस - 1
रोहन के जन्म के बाद दिल में छेद का पता चला था। डॉक्टर ने उसे कूदने, तेज भागने से भी मना किया था। तीन साल की उम्र में डॉक्टर ने रोहन की सर्जरी कर दी थी और आज वह पूरी तरह स्वस्थ है।
केस - 2
सविता की तीन साल की बेटी की कुछ दिन पहले ही कार्डियक सर्जरी की गई है। सविता ने बताया कि बच्ची के जन्म के बाद दिल में छेद का पता चला था। ऐसे में सर्जरी करवाना जरूरी हो गया था। अब बच्ची बिल्कुल ठीक है।