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Noida News: भुगतान न करने पर आवंटन निरस्त का फैसले आयोग ने सही ठहराया
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जिला उपभोक्ता आयोग
भुगतान न करने पर आवंटन निरस्त का फैसले आयोग ने सही ठहराया
बुकिंग राशि नहीं लौटाने के लिए दायर वाद खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा।
फ्लैट की बुकिंग राशि को वापस करने के लिए दायर वाद को जिला उपभोक्ता आयोग ने खारिज कर दिया। गाजियाबाद के गगन एन्क्लेव निवासी अशोक सिंघल ने वीवीआईपी होम्स के प्रतिनिधि की बातों में विश्वास करके नोएडा के सेक्टर-16 में एक फ्लैट 43 लाख 37 हजार रुपये कीमत का बुक किया। बुकिंग के समय 3.80 लाख रुपये का भुगतान किया। बुकिंग के बाद 42 माह में कब्जा देना था। हर माह किस्त का भुगतान करना था। सितंबर 2016 को फ्लैट में सभी सुविधा पूरी करके देने का वायदा किया। किस्तों के भुगतान के हिसाब से मौके पर काम करना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बिल्डर ने मौके पर काम नहीं होने के चलते जमा की गई धनराशि वापस करने की मांग की गई। बिल्डर ने वापस पैसा देने से इंकार कर दिया। बिल्डर से पैसा वापस दिलाने के लिए जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
आयोग में सुनवाई के दौरान साक्ष्य का अवलोकन किया। आयोग ने माना कि बिल्डर के द्वारा किस्त का भुगतान करने का मांग-पत्र भेजा गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। जिसके चलते आवंटन को निरस्त कर दिया गया। बिल्डर के फैसला को आयोग ने सही करार देते हुए बुकिंग राशि वापस दिलाने के लिए दायर वाद को खारिज कर दिया।
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भुगतान न करने पर आवंटन निरस्त का फैसले आयोग ने सही ठहराया
बुकिंग राशि नहीं लौटाने के लिए दायर वाद खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा।
फ्लैट की बुकिंग राशि को वापस करने के लिए दायर वाद को जिला उपभोक्ता आयोग ने खारिज कर दिया। गाजियाबाद के गगन एन्क्लेव निवासी अशोक सिंघल ने वीवीआईपी होम्स के प्रतिनिधि की बातों में विश्वास करके नोएडा के सेक्टर-16 में एक फ्लैट 43 लाख 37 हजार रुपये कीमत का बुक किया। बुकिंग के समय 3.80 लाख रुपये का भुगतान किया। बुकिंग के बाद 42 माह में कब्जा देना था। हर माह किस्त का भुगतान करना था। सितंबर 2016 को फ्लैट में सभी सुविधा पूरी करके देने का वायदा किया। किस्तों के भुगतान के हिसाब से मौके पर काम करना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बिल्डर ने मौके पर काम नहीं होने के चलते जमा की गई धनराशि वापस करने की मांग की गई। बिल्डर ने वापस पैसा देने से इंकार कर दिया। बिल्डर से पैसा वापस दिलाने के लिए जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
आयोग में सुनवाई के दौरान साक्ष्य का अवलोकन किया। आयोग ने माना कि बिल्डर के द्वारा किस्त का भुगतान करने का मांग-पत्र भेजा गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। जिसके चलते आवंटन को निरस्त कर दिया गया। बिल्डर के फैसला को आयोग ने सही करार देते हुए बुकिंग राशि वापस दिलाने के लिए दायर वाद को खारिज कर दिया।
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