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प्रशिक्षण
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नूंह। जिले के कृषि विज्ञान केंद्र मंडकोला ने तावडू खंड के गांव मोहम्मदपुर अहीर में बृहस्पतिवार को खंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके पर मंडकोला कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. धर्मवीर पाठक ने कृषि विविधिकरण का महत्व बताते हुए आह्वान किया कि किसान भाई विविधिकृत कृषि प्रणाली अपनाएं। जिससे कृषि में जोखिम व खर्च न्यूनतम रहने के साथ आय अधिक हो सके। यह कार्यक्रम हिसार के चौधरी चरण सिंह कृषि विद्यालय के तहत किया गया। जिसमें तावडू के साथ नूंह खंड के 60 किसानों ने भाग लिया।
धर्मवीर पाठक ने कहा कि विविधिकृत कृषि के तहत यदि किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ फल, फूल, सब्जी, मशरुम उत्पादन, पशु पालन, मधुमक्खी पालन आदि कई फ सल एक साथ करता है तो किसी भी कारण एक या दो फसलों के असफल होने की अवस्था में भी जोखिम मुक्त रहता है। अन्य फसलों व कार्यों से अच्छा लाभ ले सकता है। इस कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग तावडू खंड के 3 खंड तकनीकी प्रबंधक बिजेंद्र, निर्भय व रजनीश ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की समस्त योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान भारतीय किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष रामकिशोर ने अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर रोहताश चेयरमैन, रामकिशन, उम्मन व मौनी मौजूद रहे।
सात गुना अधिक आय की संभावना
इस दौरान विज्ञान केंद्र के बागवानी वैज्ञानिक डॉ. रणबीर सिंह सैनी ने कहा कि समय के अनुसार विविधिकृत कृषि किसान की जरूरत है। इसमें बागवानी की भूमिका सर्वोपरि है क्योंकि फल, फूल, सब्जी, औषधियां व सुगंध पौधों की खेती, मधुमक्खी पालन आदि सभी पारंपरिक फसलों की तुलना में खुले में ढ़ाई से तीन गुणा व हाई-टैक बागवानी पद्धति से सात गुणा तक अधिक आय देने में सक्षम है। बशर्ते कि किसान मॉर्डन तकनीकें अपनाएं। उन्होंने बताया कि बागवानी फसलें विशेषकर सब्जियां से किसान को निरंतर आय मिलती रहती है और बाजार में अधिकतम व न्यूनतम सभी प्रकार के भाव मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि तावडू खंड में भूमि व सिंचाई जल उपयुक्त होने के कारण किसानों को हाई-टैक सब्जी पौध उत्पादन तकनीक अपनानी चाहिए।
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फोटो ऱ् कार्यक्त्रस्म के दौरान मौजूद किसान।
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धर्मवीर पाठक ने कहा कि विविधिकृत कृषि के तहत यदि किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ फल, फूल, सब्जी, मशरुम उत्पादन, पशु पालन, मधुमक्खी पालन आदि कई फ सल एक साथ करता है तो किसी भी कारण एक या दो फसलों के असफल होने की अवस्था में भी जोखिम मुक्त रहता है। अन्य फसलों व कार्यों से अच्छा लाभ ले सकता है। इस कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग तावडू खंड के 3 खंड तकनीकी प्रबंधक बिजेंद्र, निर्भय व रजनीश ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की समस्त योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान भारतीय किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष रामकिशोर ने अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर रोहताश चेयरमैन, रामकिशन, उम्मन व मौनी मौजूद रहे।
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सात गुना अधिक आय की संभावना
इस दौरान विज्ञान केंद्र के बागवानी वैज्ञानिक डॉ. रणबीर सिंह सैनी ने कहा कि समय के अनुसार विविधिकृत कृषि किसान की जरूरत है। इसमें बागवानी की भूमिका सर्वोपरि है क्योंकि फल, फूल, सब्जी, औषधियां व सुगंध पौधों की खेती, मधुमक्खी पालन आदि सभी पारंपरिक फसलों की तुलना में खुले में ढ़ाई से तीन गुणा व हाई-टैक बागवानी पद्धति से सात गुणा तक अधिक आय देने में सक्षम है। बशर्ते कि किसान मॉर्डन तकनीकें अपनाएं। उन्होंने बताया कि बागवानी फसलें विशेषकर सब्जियां से किसान को निरंतर आय मिलती रहती है और बाजार में अधिकतम व न्यूनतम सभी प्रकार के भाव मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि तावडू खंड में भूमि व सिंचाई जल उपयुक्त होने के कारण किसानों को हाई-टैक सब्जी पौध उत्पादन तकनीक अपनानी चाहिए।
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फोटो ऱ् कार्यक्त्रस्म के दौरान मौजूद किसान।