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किसानों ने मनाई खुशी
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पुन्हाना। बृहस्पतिवार को केद्र सरकार द्वारा जैसे ही किसानों की सभी मांगो को मान लेने की खबर सुनी तो धरने पर बैठे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। किसानों ने जहां एक दूसरे को बंधाई दी, वहीं मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। हरियाणा-राजस्थान के सुनहेडा बॉर्डर पर मेवाती किसान मोर्चा के बैनर तले 12 जनवरी को धरना शुरू करने वाले किसान नेताओं का पगड़ी बांधकर स्वागत किया गया। इस मौके पर धरना देने के दौरान मारे गए किसानों को दो मिनिट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी गई।
मेवाती किसान मोर्चा के प्रवक्ता एडवोकेट अब्दुल रशीद का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगों एक साल पहले मान लेती तो सरकार अपनी फजीहत से बच जाती और ने 700 किसानों की जान जाती, न उनको आर्थिक मदद और नौकरी देने की मांग होती, न लखीमपुर खीरी कांड होता न गृह राज्य मंत्री के इस्तीफा देने की मांग उठती। एक वर्ष से चल रहे इस आंदोलन और किसानों के तप, त्याग और तपस्या की वजह से देश का बच्चा-बच्चा किसानों की बुनियादी समस्या और उनके अहम मुद्दों से अच्छी तरह से परिचित हो गया है। आगे से सरकारों को भी सबक मिल गया है जो कभी किसानों से टकराने की हिम्मत जुटाने का काम नहीं करेगी। इस मौके पर अरशद खाइका, शराफत वकील, राहिल खान पटपडबास, शाहिद जिराहेड़ा, कासम सरपंच जिराहेड़ा, बशीर सरपंच, अय्यूब, बाबा हुलाल, कादिर, असलूप, सरफू, आजाद और लल्लू सहित काफी किसान मौजूद रहे।
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मेवाती किसान मोर्चा के प्रवक्ता एडवोकेट अब्दुल रशीद का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगों एक साल पहले मान लेती तो सरकार अपनी फजीहत से बच जाती और ने 700 किसानों की जान जाती, न उनको आर्थिक मदद और नौकरी देने की मांग होती, न लखीमपुर खीरी कांड होता न गृह राज्य मंत्री के इस्तीफा देने की मांग उठती। एक वर्ष से चल रहे इस आंदोलन और किसानों के तप, त्याग और तपस्या की वजह से देश का बच्चा-बच्चा किसानों की बुनियादी समस्या और उनके अहम मुद्दों से अच्छी तरह से परिचित हो गया है। आगे से सरकारों को भी सबक मिल गया है जो कभी किसानों से टकराने की हिम्मत जुटाने का काम नहीं करेगी। इस मौके पर अरशद खाइका, शराफत वकील, राहिल खान पटपडबास, शाहिद जिराहेड़ा, कासम सरपंच जिराहेड़ा, बशीर सरपंच, अय्यूब, बाबा हुलाल, कादिर, असलूप, सरफू, आजाद और लल्लू सहित काफी किसान मौजूद रहे।
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