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सोशल मीिडया से दी जाएगी इस बार िकसान आंदोलन को धार
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इस बार सोशल मीडिया से दी जाएगी आंदोलन को धार
नोएडा। किसानों ने हर गांव में पंचायत कर एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया है। इसकी मदद से आंदोलन को धार दी जा रही है। ग्रुप के एक एडमिन को किसानों के मुख्य ग्रुप से जोड़ा जा रहा है। मुख्य ग्रुप में हुई बातचीत को गांवों के ग्रुप में पोस्ट कर दिया जाता है। ऐसे में ग्रुप के अन्य सदस्य नई रणनीति से रूबरू हो जाते हैं।
भारतीय किसान परिषद के संयोजक सुखबीर खलीफा ने बताया कि किसानों की जमीन चंद रुपये वर्गमीटर से खरीदी थी, लेकिन उन्हीं किसानों को प्राधिकरण आज के रेट से भूखंड आवंटित कर रहा है। इसके अलावा आबादियों को लेकर 40 साल से लड़ाई लड़ी जा रही है, लेकिन प्राधिकरण मानने को तैयार नहीं है। किसानों की आबादी जहां है वहां छोड़ दी जाए और ट्रेजरी में पड़े पैसे का सदुपयोग किया जाए तो उससे काफी विकास हो सकता है। अफसरों की जिद है कि किसानों की समस्याओं को दूर नहीं करना है। छोटी-छोटी मांगे अधूरी हैं। पूर्व में कई सरकार आईं और गईं, लेकिन किसानों के मुद्दों का हल नहीं हो पाया है। किसान आरपार की लड़ाई को तैयार है। मुख्य ग्रुप से गांवों के ग्रुप में सूचनाएं शेयर की जा रही हैं। अभी तक 20 गांवों के ग्रुप बनाए जा चुके हैं। इस बार प्राधिकरण पर हल्ला बोलने के लिए 50 हजार किसान शामिल होंगे। समस्याओं को दूर कराकर ही आंदोलन समाप्त किया जाएगा। हालांकि, हल्ला बोलने का समय तय नहीं है। दो दिन में ग्रुप के माध्यम से किसानों को सूचना दे दी जाएगी।
यह है किसानों की मांग
- आबादियों का निस्तारण, जहां है तहां के आधार पर हो
- पांच फीसदी मूल प्लॉट और 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा
- पांच फीसदी भूखंड के आवंटन की दर 1997 के अनुसार लगाई जाए
- किसान को आवंटित किए गए भूखंड के कंप्लीशन समय को पांच साल बढ़ाया जाए
- मूल किसानों को आवंटित भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति दी जाए
- किसान कोटे के प्लॉट के आवंटन की दर को कम किया जाए
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नोएडा। किसानों ने हर गांव में पंचायत कर एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया है। इसकी मदद से आंदोलन को धार दी जा रही है। ग्रुप के एक एडमिन को किसानों के मुख्य ग्रुप से जोड़ा जा रहा है। मुख्य ग्रुप में हुई बातचीत को गांवों के ग्रुप में पोस्ट कर दिया जाता है। ऐसे में ग्रुप के अन्य सदस्य नई रणनीति से रूबरू हो जाते हैं।
भारतीय किसान परिषद के संयोजक सुखबीर खलीफा ने बताया कि किसानों की जमीन चंद रुपये वर्गमीटर से खरीदी थी, लेकिन उन्हीं किसानों को प्राधिकरण आज के रेट से भूखंड आवंटित कर रहा है। इसके अलावा आबादियों को लेकर 40 साल से लड़ाई लड़ी जा रही है, लेकिन प्राधिकरण मानने को तैयार नहीं है। किसानों की आबादी जहां है वहां छोड़ दी जाए और ट्रेजरी में पड़े पैसे का सदुपयोग किया जाए तो उससे काफी विकास हो सकता है। अफसरों की जिद है कि किसानों की समस्याओं को दूर नहीं करना है। छोटी-छोटी मांगे अधूरी हैं। पूर्व में कई सरकार आईं और गईं, लेकिन किसानों के मुद्दों का हल नहीं हो पाया है। किसान आरपार की लड़ाई को तैयार है। मुख्य ग्रुप से गांवों के ग्रुप में सूचनाएं शेयर की जा रही हैं। अभी तक 20 गांवों के ग्रुप बनाए जा चुके हैं। इस बार प्राधिकरण पर हल्ला बोलने के लिए 50 हजार किसान शामिल होंगे। समस्याओं को दूर कराकर ही आंदोलन समाप्त किया जाएगा। हालांकि, हल्ला बोलने का समय तय नहीं है। दो दिन में ग्रुप के माध्यम से किसानों को सूचना दे दी जाएगी।
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यह है किसानों की मांग
- आबादियों का निस्तारण, जहां है तहां के आधार पर हो
- पांच फीसदी मूल प्लॉट और 64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा
- पांच फीसदी भूखंड के आवंटन की दर 1997 के अनुसार लगाई जाए
- किसान को आवंटित किए गए भूखंड के कंप्लीशन समय को पांच साल बढ़ाया जाए
- मूल किसानों को आवंटित भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति दी जाए
- किसान कोटे के प्लॉट के आवंटन की दर को कम किया जाए