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बिना बेचे फसल वापस ले जा रहे किसान
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पलवल। स्थानीय मंडी में आने वाले किसान बिना बेचे अपनी फसल वापस ले जा रहे हैं। उनका आरोप है कि धान, कपास व बाजरा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जा रहा। प्राइवेट एजेंसियां धान समर्थन मूल्य से 400 और कपास व बाजरा एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कम दर से खरीद रही हैं। ई-खरीद पोर्टल के मैसेज पर लाई जा रही फसल भी समर्थन मूल्य से कम पर खरीदी जा रही है। इससे गुस्साए किसानों ने सोमवार को मंडी में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। सोमवार को कई किसान अपनी फसल वापस ट्रॉली में भरते नजर आए। पूछने पर उन्होंने कहा कि इस कीमत में अपनी उपज बेचने के लिए वे तैयार नहीं हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पलवल अनाज मंडी में अब तक 42,854 क्विंटल धान खरीदा गया है। इसमें से सरकारी समर्थन मूल्य 1888 रुपये प्रति क्विंटल पर केवल 2500 क्विंटल खरीदा गया है। बाकी प्राइवेट एजेंसियों ने करीब 1500 रुपये प्रति क्विंटल दर से खरीदा है। इसी प्रकार 27768 क्विंटल कपास प्राइवेट एजेंसियों ने खरीदी है। सरकारी एजेंसी ने केवल 386 क्विंटल की खरीद की है। निजी एजेंसियां कीमत एक हजार रुपये क्विंटल कम दे रही हैं। प्राइवेट एजेंसियां बाजरा भी एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर खरीद रही हैं। किसानों का कहना है कि 1 अक्तूबर से अब तक प्राइवेट एजेंसियां किसानों को करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा चुकी हैं।
ई-खरीद पोर्टल पर सही जानकारी नहीं
किसानों की सुविधा के लिए बनाया गया ई-खरीद पोर्टल परेशानी का सबब बना हुआ है। किसानों के पास मैसेज 40 क्विंटल धान लाने का पहुंच रहा है, जबकि मंडी में गेटपास केवल छह से आठ क्विंटल का ही मिल रहा है। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। उनकी फसल नहीं बिक रही है और उन्हें वाहन का भाड़ा भी देना पड़ रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक, पलवल अनाज मंडी में अब तक 42,854 क्विंटल धान खरीदा गया है। इसमें से सरकारी समर्थन मूल्य 1888 रुपये प्रति क्विंटल पर केवल 2500 क्विंटल खरीदा गया है। बाकी प्राइवेट एजेंसियों ने करीब 1500 रुपये प्रति क्विंटल दर से खरीदा है। इसी प्रकार 27768 क्विंटल कपास प्राइवेट एजेंसियों ने खरीदी है। सरकारी एजेंसी ने केवल 386 क्विंटल की खरीद की है। निजी एजेंसियां कीमत एक हजार रुपये क्विंटल कम दे रही हैं। प्राइवेट एजेंसियां बाजरा भी एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर खरीद रही हैं। किसानों का कहना है कि 1 अक्तूबर से अब तक प्राइवेट एजेंसियां किसानों को करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा चुकी हैं।
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ई-खरीद पोर्टल पर सही जानकारी नहीं
किसानों की सुविधा के लिए बनाया गया ई-खरीद पोर्टल परेशानी का सबब बना हुआ है। किसानों के पास मैसेज 40 क्विंटल धान लाने का पहुंच रहा है, जबकि मंडी में गेटपास केवल छह से आठ क्विंटल का ही मिल रहा है। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। उनकी फसल नहीं बिक रही है और उन्हें वाहन का भाड़ा भी देना पड़ रहा है।
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