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54 लाख की रिश्वत मामले में अधिशासी अभियंता और हेड कैशियर बर्खास्त

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jun 2021 12:55 AM IST
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नोएडा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने 54 लाख रुपये की रिश्वत के मामले में अधिशासी अभियंता संजय शर्मा और मुख्य रोकड़िया (हेड कैशियर) महेश कुमार को बर्खास्त कर दिया है। मामले के तीसरे आरोपी लेखाधिकारी रामरतन सुमन पर आरोप तय नहीं हो पाए हैं। जांच समिति ने संजय शर्मा और महेश कुमार के खिलाफ 8-8 पेज की रिपोर्ट बनाई थी। जिसके बाद उनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया। बताया जाता है कि यह रकम एक बड़ी कंपनी की ओर से रिश्वत के तौर पर दी गई थी। घोटाला सामने आने के बाद से संजय शर्मा मेरठ एमडी आफिस से अटैच था, जबकि महेश कुमार दादरी अधिशासी अभियंता कार्यालय में तैनात था।
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उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि 12 जून 2019 से 5 मार्च 2020 तक अधिशासी अभियंता संजय शर्मा की तैनाती नोएडा जोन में थी। इसी बीच 5 अक्तूबर 2019 को निगम के राजस्व खाते में 54 लाख रुपये बिना किसी रसीद के जमा कराए गए थे। जबकि निगम की ओर से स्पष्ट संहिता है कि एक बार में अधिकतम 40 लाख रुपये ही जमा कराए जा सकते हैं। मामला सामने आने पर दोनों अधिकारी-कर्मचारी ने अफसरों को जवाब दिया कि उपभोक्ता से एडवांस में बिल लेकर पैसे जमा कराए गए थे।

मामले में एमडी स्तर से कमेटी बनाई गई और उसकी जांच रिपोर्ट अनिल कुमार निगम उप सचिव ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एम. देवराज को सौंपी। उन्होंने पूरी रिपोर्ट और गवाह के अलावा शपथकर्ताओं के कथन पढ़े और सुने। पूरा मामला संदिग्ध पाते हुए मामले में आरोपियों से जवाब मांगे गए। सुनवाई के बाद दोनों को दोषी पाया गया। इस आधार पर एम. देवराज ने अधिशासी अभियंता संजय शर्मा और मुख्य रोकड़िया महेश कुमार को बर्खास्त कर दिया गया। जांच में अधिशासी अभियंता और हेड कैशियर द्वारा यह राशि रिश्वत के तौर पर लेने और गलती से राजस्व खाते में जमा करने की बात सामने आई है।
कर्मचारी ने सरकारी रकम मानकर राजस्व खाते में करा दिए थे जमा
अधिकारियों के मुताबिक जिले में तैनात अधिशासी अभियंता संजय शर्मा ने बड़ी कंपनी को बिजली कनेक्शन दिलाने की एवज में करीब 54 लाख रुपये की रिश्वत ली थी। इस रकम को उन्होंने अकाउंट विभाग के कर्मचारी के पास रख दिया था। कर्मचारी ने इसे सरकारी रकम समझते हुए विभाग के राजस्व खाते में जमा करा दिया। बाद में अधिकारी ने पैसे मांगे तो पता चला कि वह रकम सरकारी खाते में जमा कराई जा चुकी है। उधर, खाते का ऑडिट हुआ तो उसमें 54 लाख रुपये अतिरिक्त मिले। इसके बाद यह पूरा मामला ही खुलता चला गया।
सेक्टर-20 कोतवाली में भी कराई गई थी रिपोर्ट
54 लाख रुपये राजस्व खाते में जमा कराने का मामला जब अधिकारियों के संज्ञान में आया तो आनन-फानन में सेक्टर-20 कोतवाली में संजय शर्मा समेत बाबुओं के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। अधीक्षण अभियंता बीएल मौर्य ने थाने में दी गई तहरीर में बिल वसूली के रुपयों से अलग 54 लाख रुपये की राशि को राजस्व खाते में जमा कराने की शिकायत कर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। इस मामले में पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
पहले भी हो चुके हैं घोटाले
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारी ने चार साल पहले अधिशासी अभियंता की कुर्सी पर बैठते ही कनेक्शन के नाम पर 6 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसका ऑडियो वायरल हुआ था। मामले में अधिकारी ने माफी मांगी थी। तीन माह पहले एक अधिकारी द्वारा कनेक्शन देने की एवज में दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने की बात सामने आई थी।
हेड कैशियर महेश कुमार दादरी अधिशासी कार्यालय में तैनात था। उसकी बर्खास्तगी का आदेश मिलते ही उसे सूचित कर दिया गया है। संजय शर्मा के बर्खास्त होने की सूचना मिली है लेकिन लिखित आदेश अभी तक नहीं आया है। जबकि तीसरे आरोपी लेखाधिकारी को लेकर कोई आदेश अभी पारित नहीं हुआ है। - वीएन सिंह, मुख्य अभियंता नोएडा जोन।
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