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Noida News: फर्जी डोमिसाइल से दी परीक्षा, सीबीएसई ने परीक्षा परिणाम रोका
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-12वीं के 51 छात्रों के खिलाफ शिकायत पर की गई कार्रवाई,
-इनमें कुछ लड़कियां व चिल्ड्रेन विद स्पेशल नीड शामिल हैं
-परीक्षा के लिए इनमें कुछ छात्र कोर्ट गए थे, मामला है लंबित
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-7 दिन में उम्मीदवारों से दस्तावेजों के साथ मांगा गया है जवाब
-संतोषजनक जवाब न देने पर उनकी उम्मीदवारी की जाएगी रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्राइवेट उम्मीदवार बन फर्जी डोमिसाइल लगाकर सीबीएसई की बारहवीं की परीक्षा देना करीब 51 छात्रों को महंगा पड़ गया। सीबीएसई ने इन छात्रों के दस्तावेज (डोमिसाइल) फर्जी पाए जाने पर इनका परीक्षा परिणाम रोक दिया है। बोर्ड ने इन छात्रों को अपने परीक्षा उपनियमों के नियम 60 के अनुसार परिणाम बाद में(आरएल-रिजल्ट लेटर) श्रेणी के अंतर्गत रखा है। इन सभी छात्रों को सात दिन के भीतर सहायक दस्तावेजों के साथ जवाब देने को कहा है। संतोषजनक दस्तावेज व जवाब न मिलने पर इनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी। इनमें कुछ लड़कियां व चिल्ड्रेन विद स्पेशल नीड शामिल हैं।
सीबीएसई की ओर से इन उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा गया है कि क्यों न उनकी उम्मीदवारी रद कर दी जाए और फर्जी प्रमाणपत्र जमा कराने के लिए नियमों के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। इन्हें सभी सहायक दस्तावेजों के साथ संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में अपना जवाब 21 मई तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इन छात्रों को प्राइवेट उम्मीदवार के रूप में प्रोवीजनली 2024 की बारहवीं की परीक्षा में बैठने की मंजूरी दी गई थी। दरअसल, परीक्षा में बैठने के लिए इनमें से कुछ उम्मीदवार आनन-फानन में कोर्ट गए थे। कोर्ट ने कहा था कि मामले का फैसला जल्दी नहीं हो सकता तब तक इन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।
अभी यह मामला कोर्ट में लंबित है। सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज के अनुसार दिल्ली से छात्र प्राइवेट रूप में भी परीक्षा में बैठ सकते हैं। इस नीति के तहत दिल्ली के बच्चे ही परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन इन छात्रों ने परीक्षा देने के लिए फर्जी डोमिसाइल लगा दिया और अपने को दिल्ली का निवासी बता दिया। परीक्षा के लिए पात्र होने के लिए अनिवार्य शर्तों में से एक डोमिसाइल (अधिवास प्रमाण पत्र) जमा कराना होता है। डोमिसाइल प्रमाणपत्र की सत्यता देखने के लिए बोर्ड ने इन उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत डोमिसाइल प्रमाणपत्रों का सत्यापन करवाया। तब पता चला कि अधिकारियों ने इन उम्मीदवारों के अधिवास प्रमाण पत्र जारी नहीं किए हैं।
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-इनमें कुछ लड़कियां व चिल्ड्रेन विद स्पेशल नीड शामिल हैं
-परीक्षा के लिए इनमें कुछ छात्र कोर्ट गए थे, मामला है लंबित
-7 दिन में उम्मीदवारों से दस्तावेजों के साथ मांगा गया है जवाब
-संतोषजनक जवाब न देने पर उनकी उम्मीदवारी की जाएगी रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्राइवेट उम्मीदवार बन फर्जी डोमिसाइल लगाकर सीबीएसई की बारहवीं की परीक्षा देना करीब 51 छात्रों को महंगा पड़ गया। सीबीएसई ने इन छात्रों के दस्तावेज (डोमिसाइल) फर्जी पाए जाने पर इनका परीक्षा परिणाम रोक दिया है। बोर्ड ने इन छात्रों को अपने परीक्षा उपनियमों के नियम 60 के अनुसार परिणाम बाद में(आरएल-रिजल्ट लेटर) श्रेणी के अंतर्गत रखा है। इन सभी छात्रों को सात दिन के भीतर सहायक दस्तावेजों के साथ जवाब देने को कहा है। संतोषजनक दस्तावेज व जवाब न मिलने पर इनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी। इनमें कुछ लड़कियां व चिल्ड्रेन विद स्पेशल नीड शामिल हैं।
सीबीएसई की ओर से इन उम्मीदवारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा गया है कि क्यों न उनकी उम्मीदवारी रद कर दी जाए और फर्जी प्रमाणपत्र जमा कराने के लिए नियमों के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। इन्हें सभी सहायक दस्तावेजों के साथ संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में अपना जवाब 21 मई तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इन छात्रों को प्राइवेट उम्मीदवार के रूप में प्रोवीजनली 2024 की बारहवीं की परीक्षा में बैठने की मंजूरी दी गई थी। दरअसल, परीक्षा में बैठने के लिए इनमें से कुछ उम्मीदवार आनन-फानन में कोर्ट गए थे। कोर्ट ने कहा था कि मामले का फैसला जल्दी नहीं हो सकता तब तक इन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।
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अभी यह मामला कोर्ट में लंबित है। सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज के अनुसार दिल्ली से छात्र प्राइवेट रूप में भी परीक्षा में बैठ सकते हैं। इस नीति के तहत दिल्ली के बच्चे ही परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन इन छात्रों ने परीक्षा देने के लिए फर्जी डोमिसाइल लगा दिया और अपने को दिल्ली का निवासी बता दिया। परीक्षा के लिए पात्र होने के लिए अनिवार्य शर्तों में से एक डोमिसाइल (अधिवास प्रमाण पत्र) जमा कराना होता है। डोमिसाइल प्रमाणपत्र की सत्यता देखने के लिए बोर्ड ने इन उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत डोमिसाइल प्रमाणपत्रों का सत्यापन करवाया। तब पता चला कि अधिकारियों ने इन उम्मीदवारों के अधिवास प्रमाण पत्र जारी नहीं किए हैं।
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