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Noida News: 32 साल बाद भी ऑटो और ई-रिक्शा पर चल रहा ग्रेनो
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विश्व सार्वजनिक परिवहन दिवस-- -- -- फोटो
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शहर में एक से दूसरी जगह जाने के लिए ऑटो रिक्शा या कैब करना पड़ता है
राजेश भाटी
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा की स्थापना 32 साल पहले की गई थी लेकिन आज तक प्राधिकरण और यूपी रोडवेज शहर में सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था नहीं कर सका है। केवल लंबी दूरी की बसें मिलती हैं। शहर में एक से दूसरी जगह जाने के लिए ऑटो रिक्शा या कैब करना पड़ता है। आवासीय व औद्योगिक सेक्टरों को सार्वजनिक यातायात से नहीं जोड़ा गया है।
यहां हजारों छोटे-बड़े कारखाने हैं जिनमें प्रतिदिन लाखों कर्मचारी आते-जाते हैं। इनके अलावा कारोबारी, विद्यार्थी और आमजन भी लगातार आवाजाही करते हैं। दिल्ली–हावड़ा रेलमार्ग से भी बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है लेकिन इन सबके बावजूद प्राधिकरण, प्रशासन या उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की ओर से स्थानीय स्तर पर सिटी बस सेवा शुरू नहीं की गई है।
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ऑटो का ही सहारा
ग्रेटर नोएडा में कासना, दनकौर, सूरजपुर, दादरी और भंगेल जैसे क्षेत्रों से आने-जाने के लिए लोग ऑटो पर निर्भर हैं। पांच से 10 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए यात्रियों को 20 से 30 रुपये तक किराया देना पड़ता है। तेज रफ्तार के कारण कई बार ऑटो हादसाग्रस्त भी हो जाते हैं जिससे लोग घायल होते हैं।
दो माह से डिपो में खड़ी है 10 मिनी बसें
दो माह पहले नोएडा डिपो को 10 मिनी बसें लोकल रूटों पर चलाने के लिए मिली थीं लेकिन अब तक इनका संचालन शुरू नहीं हुआ है। योजना के अनुसार, ये बसें नोएडा से सूरजपुर–दादरी, नोएडा से कलौंदा, नोएडा से परी चौक–कासना होते हुए जेवर, रबूपुरा समेत अन्य रूटों पर चलनी थीं।
ग्रेटर नोएडा डिपो से केवल 18 रूटों पर बसें
ग्रेटर नोएडा डिपो कासना स्थित बस अड्डे से 117 बसों का संचालन किया जा रहा है जो 18 लंबी दूरी के रूटों पर चलती हैं। इनमें स्थानीय (लोकल) रूट शामिल नहीं हैं। परी चौक से सवारियां लेकर ये बसें बाहर के रूटों की ओर निकल जाती हैं।
दो साल से 50 बसों की कमी
दो वर्ष पूर्व अपनी मियाद पूरी करने के बाद 50 बसों को डिपो के बेड़े से बाहर कर दिया गया था। नई बसों की मांग कई बार की गई लेकिन अब तक केवल 15 बसें ही मिली हैं। बसों की संख्या कम होने से 18 रूटों पर एक से दो घंटे के अंतराल में ही बसें मिलती हैं जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
वर्जन
ग्रेटर नोएडा डिपो को अभी और नई बसें मिलनी हैं। नई बसें मिलने और शहर में सिटी बस सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। -अनिल कुमार शर्मा, एआरएम, ग्रेटर नोएडा डिपो
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शहर में एक से दूसरी जगह जाने के लिए ऑटो रिक्शा या कैब करना पड़ता है
राजेश भाटी
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा की स्थापना 32 साल पहले की गई थी लेकिन आज तक प्राधिकरण और यूपी रोडवेज शहर में सार्वजनिक यातायात की व्यवस्था नहीं कर सका है। केवल लंबी दूरी की बसें मिलती हैं। शहर में एक से दूसरी जगह जाने के लिए ऑटो रिक्शा या कैब करना पड़ता है। आवासीय व औद्योगिक सेक्टरों को सार्वजनिक यातायात से नहीं जोड़ा गया है।
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यहां हजारों छोटे-बड़े कारखाने हैं जिनमें प्रतिदिन लाखों कर्मचारी आते-जाते हैं। इनके अलावा कारोबारी, विद्यार्थी और आमजन भी लगातार आवाजाही करते हैं। दिल्ली–हावड़ा रेलमार्ग से भी बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है लेकिन इन सबके बावजूद प्राधिकरण, प्रशासन या उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की ओर से स्थानीय स्तर पर सिटी बस सेवा शुरू नहीं की गई है।
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ऑटो का ही सहारा
ग्रेटर नोएडा में कासना, दनकौर, सूरजपुर, दादरी और भंगेल जैसे क्षेत्रों से आने-जाने के लिए लोग ऑटो पर निर्भर हैं। पांच से 10 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए यात्रियों को 20 से 30 रुपये तक किराया देना पड़ता है। तेज रफ्तार के कारण कई बार ऑटो हादसाग्रस्त भी हो जाते हैं जिससे लोग घायल होते हैं।
दो माह से डिपो में खड़ी है 10 मिनी बसें
दो माह पहले नोएडा डिपो को 10 मिनी बसें लोकल रूटों पर चलाने के लिए मिली थीं लेकिन अब तक इनका संचालन शुरू नहीं हुआ है। योजना के अनुसार, ये बसें नोएडा से सूरजपुर–दादरी, नोएडा से कलौंदा, नोएडा से परी चौक–कासना होते हुए जेवर, रबूपुरा समेत अन्य रूटों पर चलनी थीं।
ग्रेटर नोएडा डिपो से केवल 18 रूटों पर बसें
ग्रेटर नोएडा डिपो कासना स्थित बस अड्डे से 117 बसों का संचालन किया जा रहा है जो 18 लंबी दूरी के रूटों पर चलती हैं। इनमें स्थानीय (लोकल) रूट शामिल नहीं हैं। परी चौक से सवारियां लेकर ये बसें बाहर के रूटों की ओर निकल जाती हैं।
दो साल से 50 बसों की कमी
दो वर्ष पूर्व अपनी मियाद पूरी करने के बाद 50 बसों को डिपो के बेड़े से बाहर कर दिया गया था। नई बसों की मांग कई बार की गई लेकिन अब तक केवल 15 बसें ही मिली हैं। बसों की संख्या कम होने से 18 रूटों पर एक से दो घंटे के अंतराल में ही बसें मिलती हैं जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
वर्जन
ग्रेटर नोएडा डिपो को अभी और नई बसें मिलनी हैं। नई बसें मिलने और शहर में सिटी बस सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। -अनिल कुमार शर्मा, एआरएम, ग्रेटर नोएडा डिपो