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Noida News: उद्यमी कर रहे पार्किंग शुल्क वसूलने का विरोध
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उद्यमी कर रहे पार्किंग शुल्क वसूलने का विरोध
- एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को लिखा पत्र
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के शहर की सड़कों पर पार्किंग शुल्क लगाने का विरोध उद्यमी कर रहे हैं। इसपर आपत्ति करते हुए एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को पत्र लिखा है। एसोसिएशन की मांग है कि औद्योगिक सेक्टरों में पार्किंग शुल्क को नहीं लागू किया जाना चाहिए।
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा का कहना है कि पार्किंग के ठेके आवंटित करने के तहत क्लस्टर-1 में नोएडा के 1 से 11 सेक्टरों को लिया गया है। इनमें सेक्टर-1 संस्थागत श्रेणी में है, जबकि 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 व 11 औद्योगिक श्रेणी के सेक्टर हैं। इन सेक्टरों में छोटे उद्योगों की संख्या 80 प्रतिशत तक है। ऐसे में इन उद्योगों पर पार्किंग के नाम पर आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं हैं। उद्यमियों ने जब भूखंड लिया था तब सडक़ की चौड़ाई, पार्किंग फेस, कॉर्नर प्लॉट के हिसाब से अलग-अलग लोकेशन शुल्क वसूला गया था। उद्यमी प्राधिकरण को लीज रेंट भी देते हैं।
नाहटा का कहना है कि पार्किंग परियोजनाओं के नाम पर नोएडा प्राधिकरण धन की बर्बादी कर रहा है। लगभग 550 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई बॉटेनिकल गार्डन मल्टीलेवल पार्किंग खंडहर में तब्दील हो रही है। स्टार्टअप हब के अलावा तमाम कॉमर्शियल गतिविधियों की जगह बनाई गई थी लेकिन उचित उपयोग नहीं हुआ।
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- एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को लिखा पत्र
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के शहर की सड़कों पर पार्किंग शुल्क लगाने का विरोध उद्यमी कर रहे हैं। इसपर आपत्ति करते हुए एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को पत्र लिखा है। एसोसिएशन की मांग है कि औद्योगिक सेक्टरों में पार्किंग शुल्क को नहीं लागू किया जाना चाहिए।
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नाहटा का कहना है कि पार्किंग के ठेके आवंटित करने के तहत क्लस्टर-1 में नोएडा के 1 से 11 सेक्टरों को लिया गया है। इनमें सेक्टर-1 संस्थागत श्रेणी में है, जबकि 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 व 11 औद्योगिक श्रेणी के सेक्टर हैं। इन सेक्टरों में छोटे उद्योगों की संख्या 80 प्रतिशत तक है। ऐसे में इन उद्योगों पर पार्किंग के नाम पर आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं हैं। उद्यमियों ने जब भूखंड लिया था तब सडक़ की चौड़ाई, पार्किंग फेस, कॉर्नर प्लॉट के हिसाब से अलग-अलग लोकेशन शुल्क वसूला गया था। उद्यमी प्राधिकरण को लीज रेंट भी देते हैं।
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नाहटा का कहना है कि पार्किंग परियोजनाओं के नाम पर नोएडा प्राधिकरण धन की बर्बादी कर रहा है। लगभग 550 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई बॉटेनिकल गार्डन मल्टीलेवल पार्किंग खंडहर में तब्दील हो रही है। स्टार्टअप हब के अलावा तमाम कॉमर्शियल गतिविधियों की जगह बनाई गई थी लेकिन उचित उपयोग नहीं हुआ।
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