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UP: नशे को अगले पायदान पर ले जाने की चाहत, दवा के लिए इस्तेमाल होने वाला जहर बना नशे का जरिया; रेव पार्टी...
Sat, 04 Nov 2023 11:52 AM IST
शाहरुख खान
अतुल भारद्वाज, अमर उजाला, नोएडा
अतुल भारद्वाज, अमर उजाला, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 04 Nov 2023 11:52 AM IST
सार
Elvish Yadav News: सांप के जहर का उपयोग दिल का दौरा, स्ट्रोक, अल्झाइमर, पर्किंसन रोग में किया जाता है। एक किलो जहर की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से दो करोड़ रुपये तक होती है। वहीं ग्रे मार्केट में इसकी कीमत पांच करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। रेव पार्टियों में भी सबसे अधिक मांग कोबरा की ही होती है।
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Elvish Yadav
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
युवा और किशोरों में नशे की लत को अगले पायदान पर ले जाने की चाहत उनको सांप से कटवाने की तरफ ले जा रही है। रेव पार्टियों में इसका चलन पूरी दुनिया में बढ़ा है। इसके लिए स्थानीय सपेरों की मदद भी ला जाती है। कई बार पार्टियों में इसके लिए मुंहमांगी कीमत तक अदा की जाती है।
इंडियन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी एंड फार्माकोलॉजी में 2021 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक सांप से कटवाना एक मनोरंजक प्रवृत्ति बनती जा रही है। पूरे देश में अलग-अलग जगहों से रिपोर्ट के आधार पर प्रकाशित शोध पत्र में कहा गया है कि इन मामलों में शामिल युवा पहले से ही अलग-अलग तरीकों से नशे के आदी थे।
उनींदापन, प्रसन्नतापूर्ण मनोदशा, उत्साह महसूस करने के लिए युवा खुद को सांप से कटवा रहे थे। जहर की डोज को ध्यान में रखते हुए पैर की छोटी उंगली, कान की लौ, होंठ, जीभ का अगला भाग पर सांप से कटवाया जाता है। इसके लिए सांप को संभाल रहा व्यक्ति जरूरत के मुताबिक सांप के सिर में किसी सपाट वस्तु या हाथ से चोट करता है। इससे गुस्साया सांप खुद के बचाव में सामने मौजूद व्यक्ति पर हमला कर देता है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, स्नेकबाइट से नशे की लत एक दूसरे से ही युवाओं में लग रही है। शुरू में किसी नजदीकी या दोस्त के उपयोग करने पर जिज्ञासा होने पर इसकी शुरुआत होती है। धीरे-धीरे इसकी लत लग जाती है। इस तरह से नशा करने वाले युवाओं ने इसे दूसरे मादक पदार्थों से कहीं बेहतर बताया है।
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इंडियन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी एंड फार्माकोलॉजी में 2021 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक सांप से कटवाना एक मनोरंजक प्रवृत्ति बनती जा रही है। पूरे देश में अलग-अलग जगहों से रिपोर्ट के आधार पर प्रकाशित शोध पत्र में कहा गया है कि इन मामलों में शामिल युवा पहले से ही अलग-अलग तरीकों से नशे के आदी थे।
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उनींदापन, प्रसन्नतापूर्ण मनोदशा, उत्साह महसूस करने के लिए युवा खुद को सांप से कटवा रहे थे। जहर की डोज को ध्यान में रखते हुए पैर की छोटी उंगली, कान की लौ, होंठ, जीभ का अगला भाग पर सांप से कटवाया जाता है। इसके लिए सांप को संभाल रहा व्यक्ति जरूरत के मुताबिक सांप के सिर में किसी सपाट वस्तु या हाथ से चोट करता है। इससे गुस्साया सांप खुद के बचाव में सामने मौजूद व्यक्ति पर हमला कर देता है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, स्नेकबाइट से नशे की लत एक दूसरे से ही युवाओं में लग रही है। शुरू में किसी नजदीकी या दोस्त के उपयोग करने पर जिज्ञासा होने पर इसकी शुरुआत होती है। धीरे-धीरे इसकी लत लग जाती है। इस तरह से नशा करने वाले युवाओं ने इसे दूसरे मादक पदार्थों से कहीं बेहतर बताया है।
स्नेक बाइट के बाद कई मामलों में तो सात दिन तक बेसुध होने की रिपोर्ट भी मिली। अधिकांश मामलों में स्नेकबाइट से नशा किए जाने का तब पता चला जब परिजन इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। इसके लिए करैत, कोबरा, ग्रीन स्नेक, रैटल स्टेक तक के उपयोग किए जाने की बात सामने आई है।
एक किलो की कीमत डेढ़ करोड़
जानकारों का कहना है कि सांप के जहर का उपयोग दिल का दौरा, स्ट्रोक, अल्झाइमर, पर्किंसन रोग में किया जाता है। एक किलो जहर की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से दो करोड़ रुपये तक होती है। वहीं ग्रे मार्केट में इसकी कीमत पांच करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। रेव पार्टियों में भी सबसे अधिक मांग कोबरा की ही होती है।
जानकारों का कहना है कि सांप के जहर का उपयोग दिल का दौरा, स्ट्रोक, अल्झाइमर, पर्किंसन रोग में किया जाता है। एक किलो जहर की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से दो करोड़ रुपये तक होती है। वहीं ग्रे मार्केट में इसकी कीमत पांच करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। रेव पार्टियों में भी सबसे अधिक मांग कोबरा की ही होती है।