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Noida News: जिले में तेजी से बढ़ रहे ई-रिक्शा
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-सामान्य परिवारों के लिए रोजगार का बेहतर विकल्प बनकर उभरे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में परिवहन साधनों के मामले में अब ई-रिक्शा ऑटो रिक्शा को मात देने की तैयारी में हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्तमान समय में जिले में 25 हजार से अधिक ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। वहीं लंबे समय से चलते आ रहे सभी प्रकार के ऑटो रिक्शा मात्र एक हजार की बढ़त से आगे हैं।
परिवहन विभाग के अनुसार पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के लगातार बढ़ते दामों और परिचालन की लागत के मुकाबले ई-रिक्शा और ई-ऑटो शहरवासियों के लिए आसान और किफायती विकल्प बनकर सामने आए हैं। स्थानीय निवासी जहां पहले छोटी दूरी की यात्रा के लिए ऑटो या टैक्सी पर निर्भर रहते थे, वहीं अब हर गली-मोहल्ले में ई-रिक्शा सस्ते किराए पर मिल जाते हैं। इससे रोजमर्रा की आवाजाही किफायती तो हुई है साथ ही रोजगार के नजरिए से भी तेजी से आम जनता के लिए विकल्प बनकर उभरा है। हालांकि ई-रिक्शा को टक्कर देने के लिए अब जिले में 9 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो भी सड़कों पर उतरकर अपनी पकड़ मजबूत करने लगे हैं।
पार्किंग और रूट निर्धारण नहींं
ई-रिक्शा के बढ़ते चलन से शहर की यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। एक ओर जहां ये वाहनों का प्रदूषण कम करने में मददगार तो बन रहे हैं लेकिन पार्किंग न होने और रूट निर्धारण न होने के अलावा ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति भी बनने लगी है।
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आम परिवारों के लिए रोजगार का विकल्प
पिछले एक साल पहले ही ई-रिक्शा खरीदा है। सेक्टर 59 समेत सेक्टर 62,78 की ओर सवारियों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ई-रिक्शा ऑटो के मुकाबले सस्ता मिला, इसलिए ई-रिक्शा को ही खरीदना बेहतर विकल्प समझा।
-रमेश कुमार, ई-रिक्शा चालक
--
ई-रिक्शा की खासियत है कि वह बैटरी से चलता है, इससे न तो पेट्रोल भराना है और न ही डीजल या सीएनजी की कोई झंझट, पिछले दो सालों से वह ई-रिक्शा चला रहे हैं।
-सक्षम सैनी, ई-रिक्शा चालक
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एक नजर आकड़ों पर
जिले के वाहनों की संख्या
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वाहन प्रकार संख्या (अगस्त में) संख्या (जुलाई में)
ऑटो रिक्शा 17512 17268
ई-रिक्शा 25845 25561
ई-ऑटो 9043 8711
-- -- -- (परिवहन विभाग के अनुसार)
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में परिवहन साधनों के मामले में अब ई-रिक्शा ऑटो रिक्शा को मात देने की तैयारी में हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्तमान समय में जिले में 25 हजार से अधिक ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। वहीं लंबे समय से चलते आ रहे सभी प्रकार के ऑटो रिक्शा मात्र एक हजार की बढ़त से आगे हैं।
परिवहन विभाग के अनुसार पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के लगातार बढ़ते दामों और परिचालन की लागत के मुकाबले ई-रिक्शा और ई-ऑटो शहरवासियों के लिए आसान और किफायती विकल्प बनकर सामने आए हैं। स्थानीय निवासी जहां पहले छोटी दूरी की यात्रा के लिए ऑटो या टैक्सी पर निर्भर रहते थे, वहीं अब हर गली-मोहल्ले में ई-रिक्शा सस्ते किराए पर मिल जाते हैं। इससे रोजमर्रा की आवाजाही किफायती तो हुई है साथ ही रोजगार के नजरिए से भी तेजी से आम जनता के लिए विकल्प बनकर उभरा है। हालांकि ई-रिक्शा को टक्कर देने के लिए अब जिले में 9 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो भी सड़कों पर उतरकर अपनी पकड़ मजबूत करने लगे हैं।
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पार्किंग और रूट निर्धारण नहींं
ई-रिक्शा के बढ़ते चलन से शहर की यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। एक ओर जहां ये वाहनों का प्रदूषण कम करने में मददगार तो बन रहे हैं लेकिन पार्किंग न होने और रूट निर्धारण न होने के अलावा ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति भी बनने लगी है।
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आम परिवारों के लिए रोजगार का विकल्प
पिछले एक साल पहले ही ई-रिक्शा खरीदा है। सेक्टर 59 समेत सेक्टर 62,78 की ओर सवारियों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ई-रिक्शा ऑटो के मुकाबले सस्ता मिला, इसलिए ई-रिक्शा को ही खरीदना बेहतर विकल्प समझा।
-रमेश कुमार, ई-रिक्शा चालक
ई-रिक्शा की खासियत है कि वह बैटरी से चलता है, इससे न तो पेट्रोल भराना है और न ही डीजल या सीएनजी की कोई झंझट, पिछले दो सालों से वह ई-रिक्शा चला रहे हैं।
-सक्षम सैनी, ई-रिक्शा चालक
एक नजर आकड़ों पर
जिले के वाहनों की संख्या
वाहन प्रकार संख्या (अगस्त में) संख्या (जुलाई में)
ऑटो रिक्शा 17512 17268
ई-रिक्शा 25845 25561
ई-ऑटो 9043 8711