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Noida News: आकृति को मिली राहत के बाद के सत्यम वर्मा का परिवार हाईकोर्ट का रुख करेगा
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- श्रमिक हिंसा के मामले में आरोपी पत्रकार सत्यम वर्मा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका वापस लेगा
नोट: खबर को ऑनलाइन नहीं चलाए
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। श्रमिक हिंसा के मामले में आरोपी पत्रकार सत्यम वर्मा के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी है। जिसमें उन्होंने अपने पति की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को चुनौती दी थी। अब वह इसके बजाय इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने की योजना बना रहे हैं।
यह कदम उस घटनाक्रम के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, जब हाईकोर्ट ने सह-आरोपी आकृति चौधरी के खिलाफ लगाई गई एनएसए हिरासत को रद्द कर दिया था।आकृति को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा के परिवार की याचिका को 7 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। जिसमें परिवार याचिका को वापस लेने की मांग करेगा। सुप्रीम कोर्ट दो जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है। पहल केशव आनंद की याचिका। जिसमें उन्होंने अपने भाई आदित्य आनंद के साथ हिरासत में हुई कथित प्रताड़ना का आरोप लगाया है। दूसरी शकंबरी की याचिका, जिसमें सत्यम की एनएसए हिरासत और उनकी गिरफ्तारी में अनियमितताओं को चुनौती दी गई है।
सत्यम के परिजन का कहना है कि वह जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक नई हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल करेंगे। जिससे जल्द सुनवाई हो सके, क्योंकि सत्यम और आकृति के खिलाफ एनएएस लगाया गया था। परिवार का आरोप है कि लखनऊ के 60 वर्षीय पत्रकार सत्यम को नोएडा पुलिस ने 17 अप्रैल को लखनऊ से पूछताछ के लिए उठाया और एनसीआर क्षेत्र लाया गया। आरोप है कि सत्यम को थाने या जेल की बजाय एक हॉस्टल में रखा गया और 19 अप्रैल को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। परिजन ने उनकी गिरफ्तारी में हुई अनियमितताओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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डॉक्टोरल प्रोग्राम में दाखिला नहीं ले सकीं आकृति :
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कानून की छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत रद्द किए जाने का आदेश बंगाल के दुर्गापुर में रहने वाले उनके परिवार के लिए राहत लेकर आया है। परिजन का कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद आकृति अपनी कानून की पढ़ाई पूरी करेंगी। दौलत राम कॉलेज में पढ़ाई के दौरान आकृति ने आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वयंसेवा की, श्रमिकों के समर्थन में आवाज उठाई और अपने खाली समय में बच्चों को पढ़ाया। परिजन का कहना है कि आकृति ने नेट परीक्षा पास की थी, लेकिन गिरफ्तारी के बाद वह डॉक्टोरल प्रोग्राम में दाखिला नहीं ले सकीं।
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नोट: खबर को ऑनलाइन नहीं चलाए
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। श्रमिक हिंसा के मामले में आरोपी पत्रकार सत्यम वर्मा के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी है। जिसमें उन्होंने अपने पति की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को चुनौती दी थी। अब वह इसके बजाय इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने की योजना बना रहे हैं।
यह कदम उस घटनाक्रम के कुछ दिनों बाद उठाया गया है, जब हाईकोर्ट ने सह-आरोपी आकृति चौधरी के खिलाफ लगाई गई एनएसए हिरासत को रद्द कर दिया था।आकृति को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा के परिवार की याचिका को 7 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। जिसमें परिवार याचिका को वापस लेने की मांग करेगा। सुप्रीम कोर्ट दो जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है। पहल केशव आनंद की याचिका। जिसमें उन्होंने अपने भाई आदित्य आनंद के साथ हिरासत में हुई कथित प्रताड़ना का आरोप लगाया है। दूसरी शकंबरी की याचिका, जिसमें सत्यम की एनएसए हिरासत और उनकी गिरफ्तारी में अनियमितताओं को चुनौती दी गई है।
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सत्यम के परिजन का कहना है कि वह जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक नई हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल करेंगे। जिससे जल्द सुनवाई हो सके, क्योंकि सत्यम और आकृति के खिलाफ एनएएस लगाया गया था। परिवार का आरोप है कि लखनऊ के 60 वर्षीय पत्रकार सत्यम को नोएडा पुलिस ने 17 अप्रैल को लखनऊ से पूछताछ के लिए उठाया और एनसीआर क्षेत्र लाया गया। आरोप है कि सत्यम को थाने या जेल की बजाय एक हॉस्टल में रखा गया और 19 अप्रैल को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। परिजन ने उनकी गिरफ्तारी में हुई अनियमितताओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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डॉक्टोरल प्रोग्राम में दाखिला नहीं ले सकीं आकृति :
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कानून की छात्रा आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत रद्द किए जाने का आदेश बंगाल के दुर्गापुर में रहने वाले उनके परिवार के लिए राहत लेकर आया है। परिजन का कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद आकृति अपनी कानून की पढ़ाई पूरी करेंगी। दौलत राम कॉलेज में पढ़ाई के दौरान आकृति ने आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वयंसेवा की, श्रमिकों के समर्थन में आवाज उठाई और अपने खाली समय में बच्चों को पढ़ाया। परिजन का कहना है कि आकृति ने नेट परीक्षा पास की थी, लेकिन गिरफ्तारी के बाद वह डॉक्टोरल प्रोग्राम में दाखिला नहीं ले सकीं।