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Noida News: टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और क्रिप्टो का जाल, नोएडा में तीन से 53.45 लाख ठगे

Thu, 17 Sep 2026 08:31 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 08:31 PM IST
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dsfg
बॉस की फोटो लगाकर अकाउंटेंट से 20 लाख ट्रांसफर कराए, निवेश के नाम पर भी 33 लाख गंवाए
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- नोएडा-ग्रेनो में तीन लोगों से अलग-अलग तरीके से साइबर ठगी, टेलीग्राम और क्रिप्टो ट्रेडिंग के जरिए बनाया जाल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तीन लोगों से करीब 53.45 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
ग्रेटर नोएडा निवासी 38 वर्षीय महिला ने शिकायत में बताया कि टेलीग्राम पर सीबीएफ सेंटर और वी वेक सनटेक नाम की आईडी के जरिये उनसे संपर्क किया गया। आरोपियों ने अधिक पैसा कमाने का भरोसा देकर निवेश के लिए तैयार किया। इसके बाद सात से 10 अगस्त 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम जमा कराई गई। महिला ने कुल करीब 7.91 लाख रुपये ट्रांसफर किए। बाद में गतिविधियों पर संदेह होने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
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वहीं सेक्टर-22 निवासी एक शख्स के साथ क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर 25.54 लाख रुपये की ठगी हुई। शिकायत के मुताबिक, क्रिप्टो करेंसी में निवेश की जानकारी जुटाने के दौरान उनकी ऑनलाइन पहचान कृति जैन नाम की महिला से हुई। उसने खुद को इंदौर का निवासी बताया और ईटीएच में निवेश की जानकारी दी। इसके बाद व्हाट्सऐप के जरिये ट्रेडिंग लिंक भेजा गया। शुरुआत में प्रदीप से 10 हजार रुपये का ट्रेड कराया गया और उन्हें 11 हजार रुपये मिलने की बात बताई गई। शुरुआती मुनाफे के बाद वह आरोपियों के भरोसे में आ गए। इसके बाद उनसे अलग-अलग लेनदेन कराकर लाखों रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
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बाॅस
के नाम पर कर ली ठगी : तीसरे मामले में एचआई स्काई ग्रुप के जूनियर अकाउंटेंट को जालसाज ने निशाना बनाया। सात अगस्त को करीब तीन बजे उनके व्हाट्सऐप पर एक नंबर से संदेश आया। मोबाइल में यह नंबर उनके बॉस के नाम से सेव था और प्रोफाइल पर भी बॉस की फोटो लगी थी। इसे असली समझकर अकाउंटेंट ने संदेश भेजने वाले की बात मान ली। आरोपी ने एक लाभार्थी जोड़कर 20 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा। गोविंद ने शाम 4:06 बजे रकम निसर्गा बायोडिग्रेडेबल प्रोडक्ट्स के फेडरल बैंक, हैदराबाद स्थित खाते में भेज दी। 10 अगस्त को दोबारा रकम भेजने का संदेश आने पर उन्हें शक हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी करने पर पता चला कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बॉस की पहचान का इस्तेमाल कर ठगी की थी। डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस अब तीनों मामलों में बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
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