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Noida News: ओपीडी छोड़कर कोर्ट में साक्ष्य देने नहीं जाएंगे डॉक्टर
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ओपीडी छोड़कर कोर्ट में साक्ष्य देने नहीं जाएंगे डॉक्टर
जिला अस्पताल में बना वर्चुअल सुनवाई के लिए कक्ष, सीएमएस ने जिला जज को भेजा पत्र
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कोर्ट में सुनवाई की वजह से अब ओपीडी में मरीजों को इलाज में दिक्कत नहीं आएगी। मेडिको लीगल के मामलों में डॉक्टर कोर्ट जाने के बजाय वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होंगे। जिला अस्पताल में भूतल पर इसके लिए वर्चुअल कक्ष तैयार किया गया है।
वर्चुअल रूप से सुनवाई में शामिल होने और साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए शनिवार को सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने जिला जज को पत्र भी भेजा है। इसमें कहा गया है कि मरीजों के हित में इस व्यवस्था को लागू कराया उचित रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट भी इसके लिए सहमत है। इसके बाद ही यह व्यवस्था बनाई गई है।
अब तक डॉक्टरों को खुद सूरजपुर स्थित कोर्ट जाना होता था। आने-जाने में दो से तीन घंटे लगते हैं। कई बार सीनियर डॉक्टर के कोर्ट जाने की वजह से ओपीडी में मरीजों को नहीं देख पाते थे। ऐसे में जूनियर डॉक्टर ही मरीजों को देखते हैं। इससे कई बार जरूरतमंद मरीजों को उचित परामर्श और इलाज भी ओपीडी में नहीं मिल पाता था।
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रोजाना तीन हजार मरीज पहुंचते ओपीडी
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब तीन हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सभी डॉक्टरों पर मरीजों को देखने का दबाव रहता है। कमोबेश रोजाना ही एक से दो डॉक्टरों को मेडिको लीगल के लिए कोर्ट में साक्ष्य देने जाना होता है। वर्चुअल सुनवाई से सीधे तौर पर मरीजों को राहत मिलेगी।
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जिला अस्पताल में बना वर्चुअल सुनवाई के लिए कक्ष, सीएमएस ने जिला जज को भेजा पत्र
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कोर्ट में सुनवाई की वजह से अब ओपीडी में मरीजों को इलाज में दिक्कत नहीं आएगी। मेडिको लीगल के मामलों में डॉक्टर कोर्ट जाने के बजाय वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होंगे। जिला अस्पताल में भूतल पर इसके लिए वर्चुअल कक्ष तैयार किया गया है।
वर्चुअल रूप से सुनवाई में शामिल होने और साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए शनिवार को सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने जिला जज को पत्र भी भेजा है। इसमें कहा गया है कि मरीजों के हित में इस व्यवस्था को लागू कराया उचित रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट भी इसके लिए सहमत है। इसके बाद ही यह व्यवस्था बनाई गई है।
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अब तक डॉक्टरों को खुद सूरजपुर स्थित कोर्ट जाना होता था। आने-जाने में दो से तीन घंटे लगते हैं। कई बार सीनियर डॉक्टर के कोर्ट जाने की वजह से ओपीडी में मरीजों को नहीं देख पाते थे। ऐसे में जूनियर डॉक्टर ही मरीजों को देखते हैं। इससे कई बार जरूरतमंद मरीजों को उचित परामर्श और इलाज भी ओपीडी में नहीं मिल पाता था।
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रोजाना तीन हजार मरीज पहुंचते ओपीडी
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब तीन हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सभी डॉक्टरों पर मरीजों को देखने का दबाव रहता है। कमोबेश रोजाना ही एक से दो डॉक्टरों को मेडिको लीगल के लिए कोर्ट में साक्ष्य देने जाना होता है। वर्चुअल सुनवाई से सीधे तौर पर मरीजों को राहत मिलेगी।