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Noida News: डीएमए ने डॉक्टरों की मानसिक सेहत के लिए उठाई मांग
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मुख्यमंत्री, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख शासन सचिव और स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) ने डॉक्टरों के खराब कामकाजी हालातों और मानसिक सेहत के विरोध को लेकर मुख्यमंत्री और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख शासन सचिव व स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखा है। डीएमए ने पत्र में डॉ. रीशु सिन्हा के आरोपों का जिक्र किया है।
डॉ. रीशु का आरोप है कि पति डॉ. अमित को 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है जिससे नींद की कमी, थकान, मानसिक तनाव, और जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। उन्होंने सरकार से डॉ. अमित को एक महीने की छुट्टी और उचित काउंसलिंग की मांग की है ताकि वे अपनी सेहत सुधार सकें और इस्तीफा देने से पहले राहत पा सकें। डॉ. अमित को कार्डियोलॉजी विभाग में काम करने के दौरान शारीरिक और मानसिक थकान का सामना करना पड़ रहा है जो राष्ट्रीय टास्क फोर्स रिपोर्ट 2024 में भी चिंता का विषय माना गया है। लंबी ड्यूटी घंटे डॉक्टरों की मानसिक सेहत के लिए हानिकारक हैं और जीबी पंत अस्पताल में यह स्थिति और भी गंभीर है। उन्होंने मांग की कि 1992 के रेजीडेंसी नियमों का पालन हो जिसमें प्रति सप्ताह 48 घंटे से अधिक ड्यूटी प्रतिबंधित है और अधिकतम 12 घंटे की लगातार ड्यूटी की सीमा तय की गई है। हालांकि, उन्हें जानकारी नहीं दी गई कि ये नियम क्यों लागू नहीं हो रहे।
डीएमए की अपील और कार्रवाई की मांग
डीएमए के अध्यक्ष डॉ. गिरीश त्यागी ने कहा कि यह मामला केवल एक डॉक्टर की समस्या नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कमियों को दर्शाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से तुरंत कदम उठाने और अस्पताल प्रशासन को नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है। डीएमए ने कहा कि डॉक्टरों की मानसिक सेहत और सम्मान की रक्षा करना जरूरी है क्योंकि उनकी मेहनत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती है। संगठन ने मांग की कि सरकार और अस्पताल प्रबंधन मिलकर ऐसी स्थितियों को सुधारें ताकि भविष्य में डॉक्टरों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) ने डॉक्टरों के खराब कामकाजी हालातों और मानसिक सेहत के विरोध को लेकर मुख्यमंत्री और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख शासन सचिव व स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखा है। डीएमए ने पत्र में डॉ. रीशु सिन्हा के आरोपों का जिक्र किया है।
डॉ. रीशु का आरोप है कि पति डॉ. अमित को 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है जिससे नींद की कमी, थकान, मानसिक तनाव, और जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। उन्होंने सरकार से डॉ. अमित को एक महीने की छुट्टी और उचित काउंसलिंग की मांग की है ताकि वे अपनी सेहत सुधार सकें और इस्तीफा देने से पहले राहत पा सकें। डॉ. अमित को कार्डियोलॉजी विभाग में काम करने के दौरान शारीरिक और मानसिक थकान का सामना करना पड़ रहा है जो राष्ट्रीय टास्क फोर्स रिपोर्ट 2024 में भी चिंता का विषय माना गया है। लंबी ड्यूटी घंटे डॉक्टरों की मानसिक सेहत के लिए हानिकारक हैं और जीबी पंत अस्पताल में यह स्थिति और भी गंभीर है। उन्होंने मांग की कि 1992 के रेजीडेंसी नियमों का पालन हो जिसमें प्रति सप्ताह 48 घंटे से अधिक ड्यूटी प्रतिबंधित है और अधिकतम 12 घंटे की लगातार ड्यूटी की सीमा तय की गई है। हालांकि, उन्हें जानकारी नहीं दी गई कि ये नियम क्यों लागू नहीं हो रहे।
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डीएमए की अपील और कार्रवाई की मांग
डीएमए के अध्यक्ष डॉ. गिरीश त्यागी ने कहा कि यह मामला केवल एक डॉक्टर की समस्या नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कमियों को दर्शाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से तुरंत कदम उठाने और अस्पताल प्रशासन को नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है। डीएमए ने कहा कि डॉक्टरों की मानसिक सेहत और सम्मान की रक्षा करना जरूरी है क्योंकि उनकी मेहनत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती है। संगठन ने मांग की कि सरकार और अस्पताल प्रबंधन मिलकर ऐसी स्थितियों को सुधारें ताकि भविष्य में डॉक्टरों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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