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जिला अस्पताल की बिजली गुल, जांच बंद, लौटे मरीज
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नोएडा। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में सोमवार को उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। छह घंटे से ज्यादा समय तक अस्पताल की बिजली गुल रही। इस दौरान अस्पताल में न जांच हो पाईं और न ऑपरेशन हुए। ओपीडी में डॉक्टरों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों का उपचार करना पड़ा। कोविड-19 मेगा टीकाकरण अभियान भी इसकी वजह से प्रभावित हुआ। बेसमेंट में भरे पानी को निकालने के लिए 23 टैंकर बुलवाए गए। शाम 5:40 बजे बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने राहत की सांस ली।
रविवार से हो रही बारिश के कारण अस्पताल की सीवर लाइन से पानी रिसकर बेसमेंट में भरने लगा। सुबह करीब 11:30 बजे बेसमेंट में लगे बिजली के पैनल बॉक्स पानी में डूब गए। शॉर्ट सर्किट होने पर एहतियातन बिजली काट दी गई। जनरेटर की सप्लाई भी पैनल बॉक्स से ही जुड़ी होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था भी जवाब दे गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक चाइल्ड पीजीआई के सीवर लीक होने से यह समस्या पैदा हुई है। पीजीआई प्रशासन को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। पीजीआई और प्राधिकरण से टैंकर की व्यवस्था नहीं होने पर जिला अस्पताल प्रशासन ने 23 टैंकरों की मदद से बेसमेंट से पानी निकलवाया। शाम 5:40 मिनट पर बिजली आपूर्ति सुचारू हो पाई।
इनवर्टर के सहारे इमरजेंसी, रेडियोलॉजी विभाग पर ताला
बिजली गुल होने के बाद अस्पताल की इमरजेंसी और लेबर रूम में इंवर्टर के सहारे रोशनी की गई। हालांकि, रेडियोलॉजी विभाग पर ताला लगा दिया गया, जिससे ईसीजी, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे नहीं हो पाए। यहां से करीब 500 मरीजों को लौटना पड़ा। अस्पताल की पैथलॉजी लैब में कोई जांच नहीं हुई, रोजाना यहां 2000 से अधिक जांच होती हैं। जांच कराने आए लोगों को वापस लौटा दिया गया। रोजाना छोटे-बड़े 20 से अधिक ऑपरेशन होते हैं, जो नहीं हो पाए। इमरजेंसी में आए गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया गया। सीटी स्कैन, डायलासिस यूनिट भी बंद रखी गईं।
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कंप्यूटर सिस्टम बंद, मोबाइल से चलाया काम
सोमवार को जिले में कोविड-19 का मेगा टीकाकरण अभियान चलाया गया। जिला अस्पताल में एक हजार लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य था। सुबह से टीकाकरण के लिए भारी भीड़ जुट गई। बिजली गुल होते ही टीकाकरण केंद्रों में लगे कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए। काफी देर तक लोग इंतजार करते रहे, लेकिन बिजली नहीं आई। लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। कई लोग लौट गए, जबकि भीड़ को शांत करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने मोबाइल फोन से पंजीकरण कर टीकाकरण शुरू कराया।
मरीजों का दर्द
मुझे दो दिन से बुखार और खांसी की शिकायत है। बच्चे को भी बुखार है, इस हालात में भी पिछले दो घंटे से ओपीडी की लाइन में खड़ी हूं। लाइट न होने का हवाला देकर डॉक्टर मरीजों को नहीं देख रहे हैं।
- रीमा, मामूरा निवासी
बड़ी मुश्किल से समय निकालकर वैक्सीन लगवाने के लिए आई थी। तीन घंटे से कहा जा रहा है कि लाइट आएगी तो वैक्सीन लगेगी। अब मजबूरन मुझे बिना वैक्सीन लगवाए वापस जाना पड़ेगा।
- शीतल, भंगेल निवासी
पत्नी और मुझे वैक्सीन लगनी है। ड्यूटी से छुट्टी लेकर आज अस्पताल आया था, लेकिन बिजली कटौती होने के कारण वैक्सीन नहीं लग पा रही है। कोई बताने को तैयार नहीं है कि कितना इंतजार करना होगा।
- राजेश, निवासी सेक्टर-122
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रविवार से हो रही बारिश के कारण अस्पताल की सीवर लाइन से पानी रिसकर बेसमेंट में भरने लगा। सुबह करीब 11:30 बजे बेसमेंट में लगे बिजली के पैनल बॉक्स पानी में डूब गए। शॉर्ट सर्किट होने पर एहतियातन बिजली काट दी गई। जनरेटर की सप्लाई भी पैनल बॉक्स से ही जुड़ी होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था भी जवाब दे गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक चाइल्ड पीजीआई के सीवर लीक होने से यह समस्या पैदा हुई है। पीजीआई प्रशासन को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। पीजीआई और प्राधिकरण से टैंकर की व्यवस्था नहीं होने पर जिला अस्पताल प्रशासन ने 23 टैंकरों की मदद से बेसमेंट से पानी निकलवाया। शाम 5:40 मिनट पर बिजली आपूर्ति सुचारू हो पाई।
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इनवर्टर के सहारे इमरजेंसी, रेडियोलॉजी विभाग पर ताला
बिजली गुल होने के बाद अस्पताल की इमरजेंसी और लेबर रूम में इंवर्टर के सहारे रोशनी की गई। हालांकि, रेडियोलॉजी विभाग पर ताला लगा दिया गया, जिससे ईसीजी, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे नहीं हो पाए। यहां से करीब 500 मरीजों को लौटना पड़ा। अस्पताल की पैथलॉजी लैब में कोई जांच नहीं हुई, रोजाना यहां 2000 से अधिक जांच होती हैं। जांच कराने आए लोगों को वापस लौटा दिया गया। रोजाना छोटे-बड़े 20 से अधिक ऑपरेशन होते हैं, जो नहीं हो पाए। इमरजेंसी में आए गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया गया। सीटी स्कैन, डायलासिस यूनिट भी बंद रखी गईं।
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कंप्यूटर सिस्टम बंद, मोबाइल से चलाया काम
सोमवार को जिले में कोविड-19 का मेगा टीकाकरण अभियान चलाया गया। जिला अस्पताल में एक हजार लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य था। सुबह से टीकाकरण के लिए भारी भीड़ जुट गई। बिजली गुल होते ही टीकाकरण केंद्रों में लगे कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए। काफी देर तक लोग इंतजार करते रहे, लेकिन बिजली नहीं आई। लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। कई लोग लौट गए, जबकि भीड़ को शांत करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने मोबाइल फोन से पंजीकरण कर टीकाकरण शुरू कराया।
मरीजों का दर्द
मुझे दो दिन से बुखार और खांसी की शिकायत है। बच्चे को भी बुखार है, इस हालात में भी पिछले दो घंटे से ओपीडी की लाइन में खड़ी हूं। लाइट न होने का हवाला देकर डॉक्टर मरीजों को नहीं देख रहे हैं।
- रीमा, मामूरा निवासी
बड़ी मुश्किल से समय निकालकर वैक्सीन लगवाने के लिए आई थी। तीन घंटे से कहा जा रहा है कि लाइट आएगी तो वैक्सीन लगेगी। अब मजबूरन मुझे बिना वैक्सीन लगवाए वापस जाना पड़ेगा।
- शीतल, भंगेल निवासी
पत्नी और मुझे वैक्सीन लगनी है। ड्यूटी से छुट्टी लेकर आज अस्पताल आया था, लेकिन बिजली कटौती होने के कारण वैक्सीन नहीं लग पा रही है। कोई बताने को तैयार नहीं है कि कितना इंतजार करना होगा।
- राजेश, निवासी सेक्टर-122