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Noida News: साइबर ठगी के मामले में 90 दिन में रकम ‘होल्ड’ से रिफंड तक का स्पष्ट रोडमैप लागू

Sun, 22 Feb 2026 09:31 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 09:31 PM IST
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पुनः प्रेषितः-----(नोटः खबर को ऑनलाइन नहीं चलाएं)
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-बैंक, ई-कॉमर्स, पेमेंट ऑपरेटर्स, क्रिप्टो एक्सचेंज, म्यूचुअल फंड व ब्रोकिंग कंपनियों के लिए बनाई विस्तृत एसओपी

-एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस के तहत वीडियो सत्यापन और बहु-पीड़ित मामलों में हिस्सेदारी तय करने की प्रक्रिया निर्धारित
मोहम्मद बिलाल



ग्रेटर नोएडा। देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच ठगी की रकम को तत्काल सुरक्षित करने और पीड़ितों को समयबद्ध राहत देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की गई है। यह एसओपी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के तहत संचालित सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) के जरिए लागू होगी। इसमें बैंक, वित्तीय मध्यस्थ, ई-कॉमर्स कंपनियां, पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स, पेमेंट एग्रीगेटर/गेटवे, वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (वीएएसपी), म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकिंग कंपनियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई है।

ग्रेटर नोएडा साइबर सेल के प्रभारी आशीष यादव ने बताया कि एसओपी का मूल उद्देश्य ठगी की रकम पर तुरंत ‘होल्ड’ लगाना और तय समयसीमा में पीड़ित को वापसी सुनिश्चित करना है। जैसे ही सीएफसीएफआरएमएस किसी बैंक या वित्तीय संस्था को संदिग्ध लेन-देन की सूचना देगा, बैंक का नोडल अधिकारी तत्काल विवादित राशि पर ‘होल्ड’ मार्क करेगा। जांच एजेंसी (एलईए) के निर्देशानुसार रिकॉर्ड अपडेट किए जाएंगे। यदि एक ही खाते के खिलाफ बार-बार शिकायतें आती हैं, तो बैंक आरटीजीएस, एनईएफटी, आईएमपीएस, यूपीआई, एटीएम जैसी डिजिटल सेवाएं निलंबित कर सकता है या खाता जब्त कर सकता है। खाते में बैलेंस न होने पर भी ‘होल्ड’ मार्क रहेगा। जिससे भविष्य में आने वाली रकम रोकी जा सके। हालांकि नोडल/एस्क्रो खातों में केवल विवादित राशि पर ही रोक लगेगी। बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा।
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ई-कॉमर्स और पेमेंट एग्रीगेटर
के लिए निर्देश : एसओपी के तहत किसी ऑनलाइन ऑर्डर की डिलीवरी नहीं हुई है तो कंपनी ऑर्डर रद्द कर रकम होल्ड कराएगी। राशि यदि पेमेंट एग्रीगेटर के पास है तो कंपनी शिकायत भेजकर बैंक स्तर पर ‘होल्ड’ सुनिश्चित कराएगी। डिलीवरी हो जाने की स्थिति में प्राप्तकर्ता का पूरा विवरण पोर्टल पर अपलोड करना होगा। कूपन या गिफ्ट कार्ड मामलों में उन्हें रद्द कर संबंधित रकम रोकी जाएगी। पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स और वॉलेट कंपनियों को निर्देश है कि यदि रकम वॉलेट या सीबीडीसी वॉलेट में है तो तुरंत होल्ड लगाया जाए। एक वॉलेट से दूसरे में ट्रांसफर की स्थिति में जहां राशि उपलब्ध है। वहीं रोक लागू होगी।
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क्रिप्टो, म्यूचुअल
फंड और ब्रोकिंग कंपनियां के लिए विशेष प्रावधान किए : क्रिप्टो से जुड़े मामलों में सख्त प्रावधान तय किए गए हैं। यदि रकम भारतीय मुद्रा में है तो वीएएसपी उसे होल्ड करेगा और संबंधित बैंक को सूचित करेगा। अगर रकम क्रिप्टो एसेट में बदल चुकी है तो कानून प्रवर्तन एजेंसी के निर्देश पर उसे लिक्विडेट कर रुपये में परिवर्तित कर पीड़ित को लौटाया जाएगा। पी2पी (पीयर-टू-पीयर) लेनदेन में खरीदार के क्रिप्टो और विक्रेता के बैंक खाते दोनों पर रोक लग सकती है। अगर ठगी की रकम से शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदे गए हैं तो संबंधित डिमैट खाते में एसेट होल्ड किए जाएंगे।



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7-15-90 दिन की समयसीमा


-बैंक 7 दिन में सीडीडी/ईडीडी जांच कर पोर्टल पर रिपोर्ट डालेगा।

-जांच अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सत्यापन करेगा और 15 दिन में निर्णय देगा।



-15 दिन में कार्रवाई न होने पर मामला जिला शिकायत अधिकारी के पास जाएगा।

-90 दिन तक कोई कानूनी निर्देश न मिलने पर बैंक पुलिस को सूचित कर अन्य दावा न होने की स्थिति में होल्ड हटाने पर विचार कर सकता है।



-जिला स्तर पर एडिशनल एसपी/डिप्टी एसपी शिकायत निवारण अधिकारी नामित होंगे।
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