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Noida News: बीवी रही किराये के घर में... पति की दलील पर कोर्ट ने कहा- जिम्मेदारी से नहीं बच सकते

Fri, 24 Jul 2026 08:40 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 08:40 PM IST
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(अदालत से) बीवी घर में, पति कोर्ट में... और आखिर में आया ऐसा फैसला कि सब रह गए हैरान!
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- किराया प्राधिकारी के बेदखली आदेश को रखा बरकरार
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। क्या कोई पति सिर्फ यह कहकर किराये की जिम्मेदारी से बच सकता है कि 'मैं तो घर छोड़ चुका हूं अब वहां सिर्फ मेरी पत्नी रहती है'। सत्र अदालत ने इस सवाल का ऐसा जवाब दिया, जो किसी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म के क्लाइमैक्स से कम नहीं। मामला किरायेदार कमलदीप वर्मा और मकान मालिक मनु भारद्वाज के बीच का है। अगस्त 2021 में कमलदीप ने मनु भारद्वाज का मकान 8,500 रुपये महीने के किराये पर लिया था। बाद में समझौता दोबारा हुआ और सितंबर 2023 तक के लिए किराया बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब कमलदीप ने दावा किया कि उन्होंने जुलाई 2022 के पहले सप्ताह में ही मकान छोड़ दिया था और मार्च 2023 तक का किराया भी चुका दिया था। उनका कहना था कि उसके बाद मकान में उनकी पत्नी अनन्या चौधरी अपनी मर्जी से रह रही थीं। इसलिए आगे का किराया उनसे नहीं, बल्कि पत्नी से वसूला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दलील दी कि वे पहले से ही धारा 125 सीआरपीसी के तहत पत्नी को भरण-पोषण दे रहे हैं, इसलिए अलग से मकान का किराया देना उचित नहीं है। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि किरायानामे पर सिर्फ कमलदीप वर्मा के हस्ताक्षर थे। उनकी पत्नी इस समझौते की पक्षकार नहीं थीं। इसलिए किराया चुकाने की कानूनी जिम्मेदारी भी सिर्फ कमलदीप की ही रहेगी।
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अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि यदि किरायेदारी समाप्त होने के बाद भी मकान पर कब्जा बना रहता है, तो उसकी जिम्मेदारी मूल किरायेदार की ही होती है। पत्नी, किरायेदार के परिवार का सदस्य होने के कारण, मकान पर उनका कब्जा भी कानूनी रूप से किरायेदार का ही कब्जा माना जाएगा, चाहे पति स्वयं वहां रह रहा हो या नहीं। इसी आधार पर सत्र अदालत ने कमलदीप वर्मा की सिविल अपील खारिज कर दी और 20 नवंबर 2024 को पारित उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें मकान मालिक मनु भारद्वाज के पक्ष में बेदखली और बकाया किराया वसूली का आदेश दिया गया था।
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