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Noida News: प्रकाश उत्सव पर गुरुद्वारों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
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-गुरुद्वारों और घरों पर रोशनी, जगह-जगह लंगर का आयोजन भी किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रकाश उत्सव के पावन अवसर पर बुधवार को राजधानी के सभी प्रमुख गुरुद्वारों में श्रद्धा और भक्ति का अभूतपूर्व माहौल देखने को मिला। सुबह चार बजे से ही ‘वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह’ के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ गुरुद्वारों की ओर उमड़ने लगी। हर आयु वर्ग के श्रद्धालु गुरुओं की शिक्षाओं को नमन करते हुए मत्था टेकने पहुंचे।
गुरु पर्व पर सबसे अधिक भीड़ ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में देखी गई, जहां भोर से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु गुरबाणी की मधुर ध्वनि में डूबे नजर आए। रकाबगंज साहिब के अलावा गुरुद्वारा बंगला साहिब, सीसगंज साहिब, मजनू का टीला गुरुद्वारा और ननक प्याऊ समेत अन्य सभी गुरुद्वारों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। गुरुद्वारों के कपाट जैसे ही खुले, श्रद्धालु मत्था टेकने के साथ-साथ पवित्र सरोवर में स्नान करने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बताया कि गुरु नानक देव के प्रकाश उत्सव पर स्नान और सेवा को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
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युवाओं ने संभाली सेवा की जिम्मेदारी
गुरुद्वारों में युवा सिखों ने ‘दस्तार बांधने’ की परंपरा निभाई। कई जगहों पर नन्हे बच्चों को भी इस अवसर पर पहली बार दस्तार बांधी गई। युवक सेवक के रूप में पूरे आयोजन में जुटे रहे। किसी ने लंगर सेवा संभाली तो किसी ने जूते रखने की व्यवस्था देखी तो किसी ने श्रद्धालुओं को जल और प्रसाद वितरित किया।
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नगर कीर्तन बना आकर्षण का केंद्र
दिनभर शहर के कई इलाकों में सिंह सभाओं की ओर से नगर कीर्तन निकाले गए। भव्य झांकियों से सजे नगर कीर्तन में पंज प्यारे की अगुवाई में श्रद्धालु ‘सतनाम वाहे गुरु’ के जाप के साथ चल रहे थे। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी साहिब के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। कई श्रद्धालु पालकी साहिब के साथ-साथ चलने को सौभाग्य मानते हुए घंटों तक जुलूस में शामिल रहे।
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लंगर और सेवा का वातावरण
प्रकाश उत्सव पर सेवा भाव की झलक हर कोने में दिखाई दी। गुरुद्वारों और सड़कों के किनारे लंगर लगाए गए, जहां हर धर्म और समुदाय के लोगों ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं ने एक स्वर में कहा कि गुरु नानक देव की सीख ही मानवता की सच्ची सेवा है।
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रोशनी और सजावट से निखरे गुरुद्वारे
शाम ढलते ही गुरुद्वारों में दीपों और रोशनी की जगमगाहट ने वातावरण को दिव्य बना दिया। इमारतें रंग-बिरंगी लाइटों से सजीं, सरोवरों के किनारे मोमबत्तियों से जगमग हो उठे। श्रद्धालुओं ने घरों में भी रोशनी की और गुरु पर्व की मिठाइयां वितरित कीं।
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गुरु नानक देव की वाणी गूंजी
दिनभर चले कीर्तन में रागी जत्थों ने गुरु नानक देव के उपदेशों को सुरों में पिरोया। नाम जपो, किरत करो, वंड छको की वाणी ने हर व्यक्ति को सेवा और समरसता का संदेश दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रकाश उत्सव के पावन अवसर पर बुधवार को राजधानी के सभी प्रमुख गुरुद्वारों में श्रद्धा और भक्ति का अभूतपूर्व माहौल देखने को मिला। सुबह चार बजे से ही ‘वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह’ के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ गुरुद्वारों की ओर उमड़ने लगी। हर आयु वर्ग के श्रद्धालु गुरुओं की शिक्षाओं को नमन करते हुए मत्था टेकने पहुंचे।
गुरु पर्व पर सबसे अधिक भीड़ ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में देखी गई, जहां भोर से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु गुरबाणी की मधुर ध्वनि में डूबे नजर आए। रकाबगंज साहिब के अलावा गुरुद्वारा बंगला साहिब, सीसगंज साहिब, मजनू का टीला गुरुद्वारा और ननक प्याऊ समेत अन्य सभी गुरुद्वारों में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। गुरुद्वारों के कपाट जैसे ही खुले, श्रद्धालु मत्था टेकने के साथ-साथ पवित्र सरोवर में स्नान करने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बताया कि गुरु नानक देव के प्रकाश उत्सव पर स्नान और सेवा को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
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युवाओं ने संभाली सेवा की जिम्मेदारी
गुरुद्वारों में युवा सिखों ने ‘दस्तार बांधने’ की परंपरा निभाई। कई जगहों पर नन्हे बच्चों को भी इस अवसर पर पहली बार दस्तार बांधी गई। युवक सेवक के रूप में पूरे आयोजन में जुटे रहे। किसी ने लंगर सेवा संभाली तो किसी ने जूते रखने की व्यवस्था देखी तो किसी ने श्रद्धालुओं को जल और प्रसाद वितरित किया।
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नगर कीर्तन बना आकर्षण का केंद्र
दिनभर शहर के कई इलाकों में सिंह सभाओं की ओर से नगर कीर्तन निकाले गए। भव्य झांकियों से सजे नगर कीर्तन में पंज प्यारे की अगुवाई में श्रद्धालु ‘सतनाम वाहे गुरु’ के जाप के साथ चल रहे थे। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी साहिब के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। कई श्रद्धालु पालकी साहिब के साथ-साथ चलने को सौभाग्य मानते हुए घंटों तक जुलूस में शामिल रहे।
लंगर और सेवा का वातावरण
प्रकाश उत्सव पर सेवा भाव की झलक हर कोने में दिखाई दी। गुरुद्वारों और सड़कों के किनारे लंगर लगाए गए, जहां हर धर्म और समुदाय के लोगों ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं ने एक स्वर में कहा कि गुरु नानक देव की सीख ही मानवता की सच्ची सेवा है।
रोशनी और सजावट से निखरे गुरुद्वारे
शाम ढलते ही गुरुद्वारों में दीपों और रोशनी की जगमगाहट ने वातावरण को दिव्य बना दिया। इमारतें रंग-बिरंगी लाइटों से सजीं, सरोवरों के किनारे मोमबत्तियों से जगमग हो उठे। श्रद्धालुओं ने घरों में भी रोशनी की और गुरु पर्व की मिठाइयां वितरित कीं।
गुरु नानक देव की वाणी गूंजी
दिनभर चले कीर्तन में रागी जत्थों ने गुरु नानक देव के उपदेशों को सुरों में पिरोया। नाम जपो, किरत करो, वंड छको की वाणी ने हर व्यक्ति को सेवा और समरसता का संदेश दिया।