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Noida News: निर्देशों के बावजूद पर्चे पर दवाओं के नाम स्पष्ट नहीं, मरीज परेशान

Sat, 03 Oct 2026 09:40 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2026 09:40 PM IST
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Despite instructions, medicine names on the prescription are unclear; patients are distressed
नोएडा जिला अस्पताल में घसीटा मार लिखी डॉक्टर की राइटिंग।
फोटो है
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-अंग्रेजी की घसीटामार राइटिंग न मरीज के समझ आती और न ही फार्मासिस्टों को, मरीजों को काटने पड़ते हैं चक्कर
-----------

वान्या दीक्षित
नोएडा। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश के बावजूद सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की लिखावट में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। डिप्टी सीएम ने डॉक्टरों को पर्चे पर दवाओं और जांच के नाम हिंदी में स्पष्ट रूप से लिखने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि मातृभाषा में मरीजों से संवाद करने से उन्हें बीमारी और इलाज को समझने में आसानी होगी। हालांकि जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लिखावट इतनी अस्पष्ट है कि मरीज ही नहीं, फार्मासिस्ट भी पर्चा समझने में परेशान हो रहे हैं।
ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीज जब अस्पताल की फार्मेसी या बाहर मेडिकल स्टोर पहुंचते हैं तो दवा का नाम समझने में कई मिनट लग जाते हैं। अक्षर स्पष्ट नहीं होने पर फार्मासिस्ट को अनुमान लगाना पड़ता है। इससे गलत दवा दिए जाने का खतरा बना रहता है। पिछले दिनों जिला अस्पताल में अस्पष्ट लिखावट के कारण एक मरीज को गलत दवा दिए जाने का मामला सामने आया था। तबीयत बिगड़ने के बाद मरीज ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) से लिखित शिकायत की थी।
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जांच और चेतावनी के बाद भी नहीं बदला ढर्राः मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों को स्पष्ट लिखावट में पर्चे लिखने की हिदायत देने की बात कही थी। इसके बावजूद स्थिति में खास बदलाव नहीं हुआ है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि जब फार्मासिस्ट ही डॉक्टर की लिखावट समझने में समय लगा रहे हैं तो आम मरीज के लिए दवा का नाम और उसकी खुराक समझना मुश्किल है।
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फार्मासिस्ट भी दवा पहचानने में होते हैं परेशानः केमिस्ट एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष अनूप खन्ना ने बताया कि कई डॉक्टरों की लिखावट समझना फार्मासिस्ट के लिए भी मुश्किल होता है। कई बार दवा स्पष्ट नहीं होने पर मरीज को वापस भेजना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अनुभवी फार्मासिस्ट लिखावट का अंदाजा लगा लेते हैं, लेकिन नए फार्मासिस्टों के लिए परेशानी अधिक होती है। डॉक्टरों को दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में लिखने के निर्देश पहले से हैं, लेकिन इसका पालन पूरी तरह नहीं हो रहा है।
एनएमसी के नियमों में भी स्पष्टता पर जोरः नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के प्रिस्क्रिप्शन संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार दवा का नाम स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए। जहां आवश्यक हो, ब्रांड नाम के साथ जेनेरिक नाम या दवा का सॉल्ट भी दर्ज किया जाना चाहिए। इसके अलावा दवा की खुराक और लेने का समय भी स्पष्ट होना चाहिए। इन नियमों का पालन मरीजों को गलत दवा और गलत खुराक के जोखिम से बचाने में महत्वपूर्ण है।

नोएडा जिला अस्पताल में घसीटा मार लिखी डॉक्टर की राइटिंग।

नोएडा जिला अस्पताल में घसीटा मार लिखी डॉक्टर की राइटिंग।

नोएडा जिला अस्पताल में घसीटा मार लिखी डॉक्टर की राइटिंग।

नोएडा जिला अस्पताल में घसीटा मार लिखी डॉक्टर की राइटिंग।

नोएडा जिला अस्पताल में घसीटा मार लिखी डॉक्टर की राइटिंग।

नोएडा जिला अस्पताल में घसीटा मार लिखी डॉक्टर की राइटिंग।

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