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Noida News: इंजरी के बाद भी शेखर ने प्रो बॉक्सिंग में जीता स्वर्ण
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फाइनल मुकाबले में चीन के त्जीम्स तमांग को हराया
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। अच्छी लगन, हिम्मत व कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी कठिनाईयों पर भी पार पाया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है ग्रेटर नोएडा के बॉक्सर शेखर शर्मा ने। काठमांडू में 23 से 26 अगस्त तक आयोजित प्रो बॉक्सिंग चैंपियनशिप में शेखर ने सीधे हाथ में इंजरी के बावजूद शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन के खिलाड़ी को हराकर स्वर्ण जीता।
75-80 किग्रा भारवर्ग में ग्रेटर नोएडा के डेवटा गांव निवासी बॉक्सर शेखर शर्मा का फाइनल मुकाबला 25 अगस्त को चीन के त्जीम्स तमांग के साथ हुआ था। पदक जीतने पर जिले व गांव में खुशी का माहौल है। शेखर ने बताया कि सोनीपत स्थित बॉक्सिंग अकादमी में कोच संदीप मलिक के पास प्रशिक्षण ले रहे हैं। बीते वर्ष भी हांगकांग में आयोजित प्रो बॉक्सिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था।
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इंजरी के ढाई माह बाद ही शुरू कर दिया था अभ्यास
पिता महेश शर्मा ने बताया कि श्रीलंका के बॉक्सर के खिलाफ खेलते हुए प्रतियोगिता के पहले ही मुकाबले में हाथ की इंजरी उभर आई थी, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और स्वर्ण पदक जीतकर गुरु व देश का नाम रोशन किया है। शेखर को करीब चार माह पहले सोनीपत स्थित बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान सीधे हाथ में इंजरी हो गई थी। इंजरी के बाद डॉक्टर ने उसे करीब छह माह तक खेल से दूर रहने के लिए बोला, लेकिन उसने कोच व अभिभावकों की नहीं सुनी और करीब ढाई माह बाद ही रिंग में अभ्यास करना शुरू कर दिया था।
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राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल किए सात स्वर्ण
शेखर ने बताया कि बचपन में भारतीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह को बॉक्सिंग रिंग में विपक्षी के खिलाफ दमदार पंच लगाते हुए देखा और बॉक्सर बनने की ठान ली। माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों ने पूरा सहयोग किया। बीते करीब पांच वर्ष से सोनीपत में कोच संदीप मलिक से बॉक्सिंग के गुर सीखकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सात स्वर्ण पदक हासिल किए है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। अच्छी लगन, हिम्मत व कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी कठिनाईयों पर भी पार पाया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है ग्रेटर नोएडा के बॉक्सर शेखर शर्मा ने। काठमांडू में 23 से 26 अगस्त तक आयोजित प्रो बॉक्सिंग चैंपियनशिप में शेखर ने सीधे हाथ में इंजरी के बावजूद शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन के खिलाड़ी को हराकर स्वर्ण जीता।
75-80 किग्रा भारवर्ग में ग्रेटर नोएडा के डेवटा गांव निवासी बॉक्सर शेखर शर्मा का फाइनल मुकाबला 25 अगस्त को चीन के त्जीम्स तमांग के साथ हुआ था। पदक जीतने पर जिले व गांव में खुशी का माहौल है। शेखर ने बताया कि सोनीपत स्थित बॉक्सिंग अकादमी में कोच संदीप मलिक के पास प्रशिक्षण ले रहे हैं। बीते वर्ष भी हांगकांग में आयोजित प्रो बॉक्सिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था।
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इंजरी के ढाई माह बाद ही शुरू कर दिया था अभ्यास
पिता महेश शर्मा ने बताया कि श्रीलंका के बॉक्सर के खिलाफ खेलते हुए प्रतियोगिता के पहले ही मुकाबले में हाथ की इंजरी उभर आई थी, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और स्वर्ण पदक जीतकर गुरु व देश का नाम रोशन किया है। शेखर को करीब चार माह पहले सोनीपत स्थित बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान सीधे हाथ में इंजरी हो गई थी। इंजरी के बाद डॉक्टर ने उसे करीब छह माह तक खेल से दूर रहने के लिए बोला, लेकिन उसने कोच व अभिभावकों की नहीं सुनी और करीब ढाई माह बाद ही रिंग में अभ्यास करना शुरू कर दिया था।
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राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल किए सात स्वर्ण
शेखर ने बताया कि बचपन में भारतीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह को बॉक्सिंग रिंग में विपक्षी के खिलाफ दमदार पंच लगाते हुए देखा और बॉक्सर बनने की ठान ली। माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों ने पूरा सहयोग किया। बीते करीब पांच वर्ष से सोनीपत में कोच संदीप मलिक से बॉक्सिंग के गुर सीखकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सात स्वर्ण पदक हासिल किए है।