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बैंकों के निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन कर निकाला पैदल मार्च

Thu, 16 Dec 2021 07:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 16 Dec 2021 07:45 PM IST
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Demonstration against privatization of banks took out a foot march
निजीकरण के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते बैंक कर्मचारी। अमर उजाला
नोएडा। केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण करने की घोषणा और संसद के शीतकालीन सत्र में बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट और बैंक अधिनियम एक्ट में संशोधन लाने की मंशा को भांपते हुए बैंकर्स में रोष व्याप्त है। बैंकिंग संशोधन एक्ट 2021 के बाद दो सरकारी बैंकों के निजीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके विरोध में बैंक कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को प्रदर्शन कर पैदल मार्च निकाला। सेक्टर-62 में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) में नौ बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी संगठन शामिल हैं, जो विभिन्न बैंकों में कार्य कर रहे लगभग 10 लाख कर्मचारियों एवं अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है। यूएफबीयू के आह्वान पर देशभर के सार्वजनिक बैंकों के अधिकारी- कर्मचारी 16 व 17 दिसंबर को दो दिवसीय हड़ताल हैं।
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इसके मद्देनजर बृहस्पतिवार को जिले के सारे सार्वजनिक बैंक बंद रहे। बड़ी संख्या में बैंककर्मियों ने सेक्टर-62 स्थित बैंक ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शन किया और पैदल मार्च निकाला। कर्मचारियों ने निजीकरण के फैसले के खिलाफ सरकार विरोधी नारे लगाए। बैंक ऑफ इंडिया गाजियाबाद अंचल के अधिकारी संगठन के आंचलिक मंत्री सुमन कुमार ने कहा कि निजीकरण के फैसले से बैंकर्स के भविष्य पर नहीं बल्कि आमजन, गरीब, मजदूर वर्ग को तमाम सस्ते और सुगम तरीके से मिलने वाली बैंकिंग सुविधाओं पर भी विपरीत असर पड़ेगा। सार्वजनिक बैंक हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि और विकास के वाहक हैं।
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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जनता की बचत के संरक्षक और जन विश्वास के कोष एवं भंडार बन गए हैं। ऐसे में सरकारी बैंकों के निजीकरण से गरीब, कामगार और आम जनता पर विपरीत असर पड़ेगा। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, अधिकारी संगठन नोएडा के रीजनल मंत्री राजेश शर्मा ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों का राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने में अहम योगदान है। बैंकों ने हरित, श्वेत, नीली क्रांतियों आदि में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने न केवल किसानों, भूमिहीन, श्रमिकों और ग्रामीण जनता को सूदखोरों से छुटकारा दिलाया। बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत बनाने के लिए आवश्यक अग्रिम ऋण उपलब्ध कराए हैं। ऐसे में सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण सरकार कैसे कर सकती है।
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सरकार अपना फैसला वापस लेना होगा
बैंक ऑफ इंडिया गाजियाबाद अंचल के आंचलिक अध्यक्ष सचिन वत्स ने कहा कि हमारी एकता और मजबूती से सरकार को अपना फैसला वापस लेना होगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में नोएडा और गाजियाबाद के बैंक कर्मी मौजूद थे। मौके पर जगपाल सिंह, सुनील चौधरी, सचिन कुमार, प्रियंका निर्वाल, सिम्मी चौधरी, एसबीआई के जसपाल कटोच, अमिता, विनोद यादव, प्रीतिका गुप्ता ने निजीकरण के खिलाफ रोष जताते हुए विचार व्यक्त किए।
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