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Noida News: बांसेरा बैम्बू पार्क में अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव आयोजित करेगा डीडीए
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-पतंग के इतिहास को प्रदर्शित करने वाली थीम पर बनेगा पवेलियन
-पतंग खरीदने और उड़ाने के लिए क्लासिकल पतंग बाजार लगेगा
-पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प स्टॉल, सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यमुना के तट पर सराय काले खां में दिल्ली के पहले बांसेरा बैम्बू पार्क में 13 और 14 जनवरी को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव आयोजित होगा। डीडीए द्वारा आयोजित किए जा रहे इस उत्सव में कई प्रमुख आकर्षण होंगे। पतंग के इतिहास को प्रदर्शित करने के लिए एक थीम पवेलियन बनेगा। पतंग गैलरी के रूप में युद्ध के समय में पतंग के उपयोग, लड़ाकू पतंग, भारत में पतंग के महत्व इत्यादि को दर्शाया जाएगा। लोगों के लिए पतंग खरीदने, उड़ाने और आसमान को विभिन्न रंगों से सजाने के लिए एक क्लासिकल पतंग बाजार भी लगाया जाएगा। पेशेवर पतंगबाज इस उत्सव में पतंगों के करतब दिखाएंगे।
इसमें भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने वाले रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, उत्सव में पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। बच्चों के लिए किड्स जोन होगा, जिसमें विशेष गतिविधियां होंगी। लोहड़ी, मकर संक्रांति, बिहू और पोंगल के शुभ अवसर पर इन सभी त्योहारों का सामूहिक रूप से लोग यहां आनंद उठा पाएंगे। परिवार और बच्चों के साथ उत्सव में आने का अच्छा मौका रहेगा। यमुना बाढ़ क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के साथ एक मनोरंजक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए करीब सालभर पहले बांसेरा की नींव रखी गई।
इसे सिर्फ छह महीने के रिकॉर्ड समय में विकसित किया गया। असम से लाए गए विशेष किस्म के 25,000 से अधिक बांस के पौधे यहां लगाए गए। एलजी विनय कुमार सक्सेना शुरुआत से ही इसकी निगरानी कर रहे। नदी के बाढ़ क्षेत्र का पुनरुद्धार करने के लिए डीडीए कई परियोजनाएं चला रहा। पारिस्थितिकी विविधता को बढ़ाने और इसे लोगों के लिए सुलभ बनाने की पहल चलाई जा रही। यह उत्सव दिल्ली वासियों को यमुना के करीब लेकर आएगा।
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-पतंग खरीदने और उड़ाने के लिए क्लासिकल पतंग बाजार लगेगा
-पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प स्टॉल, सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यमुना के तट पर सराय काले खां में दिल्ली के पहले बांसेरा बैम्बू पार्क में 13 और 14 जनवरी को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव आयोजित होगा। डीडीए द्वारा आयोजित किए जा रहे इस उत्सव में कई प्रमुख आकर्षण होंगे। पतंग के इतिहास को प्रदर्शित करने के लिए एक थीम पवेलियन बनेगा। पतंग गैलरी के रूप में युद्ध के समय में पतंग के उपयोग, लड़ाकू पतंग, भारत में पतंग के महत्व इत्यादि को दर्शाया जाएगा। लोगों के लिए पतंग खरीदने, उड़ाने और आसमान को विभिन्न रंगों से सजाने के लिए एक क्लासिकल पतंग बाजार भी लगाया जाएगा। पेशेवर पतंगबाज इस उत्सव में पतंगों के करतब दिखाएंगे।
इसमें भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने वाले रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, उत्सव में पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। बच्चों के लिए किड्स जोन होगा, जिसमें विशेष गतिविधियां होंगी। लोहड़ी, मकर संक्रांति, बिहू और पोंगल के शुभ अवसर पर इन सभी त्योहारों का सामूहिक रूप से लोग यहां आनंद उठा पाएंगे। परिवार और बच्चों के साथ उत्सव में आने का अच्छा मौका रहेगा। यमुना बाढ़ क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के साथ एक मनोरंजक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए करीब सालभर पहले बांसेरा की नींव रखी गई।
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इसे सिर्फ छह महीने के रिकॉर्ड समय में विकसित किया गया। असम से लाए गए विशेष किस्म के 25,000 से अधिक बांस के पौधे यहां लगाए गए। एलजी विनय कुमार सक्सेना शुरुआत से ही इसकी निगरानी कर रहे। नदी के बाढ़ क्षेत्र का पुनरुद्धार करने के लिए डीडीए कई परियोजनाएं चला रहा। पारिस्थितिकी विविधता को बढ़ाने और इसे लोगों के लिए सुलभ बनाने की पहल चलाई जा रही। यह उत्सव दिल्ली वासियों को यमुना के करीब लेकर आएगा।
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