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बेटियों के नाम से हर घर को मिली पहचान
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तावडू। किरूरी गांव देश का ऐसा पहला गांव बन गया है, जहां प्रत्येक घर की पहचान बेटियों के नाम से होगी। गांव में हर घर के सामने बेटियों के नाम की प्लेट लगी है। प्रधानमंत्री की स्वामित्व योजना से प्रभावित होकर सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन ने इस अभियान की शुरुआत की है। शुक्रवार को घरों के बाहर बेटियों के नाम की प्लेट लगाने का अभियान शुरू किया गया।
फाउंडेशन ने नूंह जिले में तीन गांवों का चयन किया था। फाउंडेशन के जनक सुनील जागलान ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 2015 से की गई थी और अभी तक करीब 12 हजार लोगों के घरों के बाहर बेटियों के नाम की प्लेट लगाई जा चुकी हैै।
प्रधानमंत्री की स्वामित्व योजना के तहत गांवों में लाल डोरा के भीतर आने वाली प्रॉपर्टी की डीड हो सकेगी और संपत्ति का मालिकाना हक मिल सकेगा। फाउंडेशन के संयोजक सुनील जागलान के अनुसार किरूरी गांव देश का पहला गांव होगा, जहां हर घर के बाहर बेटियों के नाम की प्लेट होगी, पांच साल पहले सभी जगह यह अभियान शुरू हुआ था।
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इसके बाद बाकी संस्थाओं के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग हरियाणा ने भी इस मॉडल को अपनाया है। उन्होंने बताया कि एक-एक सप्ताह के अंतराल पर घुसपैठी और भूतलाका में यह अभियान चलेगा। ग्राम पंचायत सेहसोला की सरपंच अंजुम आरा ने कहा कि गांव की आबादी करीब 1200 है। यह बहुत गर्व की बात है कि स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए उनके गांव को चुना गया है।
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फाउंडेशन ने नूंह जिले में तीन गांवों का चयन किया था। फाउंडेशन के जनक सुनील जागलान ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 2015 से की गई थी और अभी तक करीब 12 हजार लोगों के घरों के बाहर बेटियों के नाम की प्लेट लगाई जा चुकी हैै।
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प्रधानमंत्री की स्वामित्व योजना के तहत गांवों में लाल डोरा के भीतर आने वाली प्रॉपर्टी की डीड हो सकेगी और संपत्ति का मालिकाना हक मिल सकेगा। फाउंडेशन के संयोजक सुनील जागलान के अनुसार किरूरी गांव देश का पहला गांव होगा, जहां हर घर के बाहर बेटियों के नाम की प्लेट होगी, पांच साल पहले सभी जगह यह अभियान शुरू हुआ था।
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इसके बाद बाकी संस्थाओं के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग हरियाणा ने भी इस मॉडल को अपनाया है। उन्होंने बताया कि एक-एक सप्ताह के अंतराल पर घुसपैठी और भूतलाका में यह अभियान चलेगा। ग्राम पंचायत सेहसोला की सरपंच अंजुम आरा ने कहा कि गांव की आबादी करीब 1200 है। यह बहुत गर्व की बात है कि स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए उनके गांव को चुना गया है।