आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता: मायके और ससुराल वालों का दखल बिगाड़ रहा पति-पत्नी का रिश्ता
पिछले दो सालों में आए 50 प्रतिशत ऐसे मामले हैं, जिनमें मायके या ससुराल वालों का ज्यादा हस्तक्षेप विवाद का कारण बन गया। घरेलू हिंसा के मामलों की जांच के दौरान ये रिपोर्ट सामने आई है।
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मायके और ससुराल वालों का ज्यादा हस्तक्षेप पति-पत्नी के बीच विवाद का कारण बन रहा है। महिला कल्याण विभाग के पास जांच के लिए आए दिन ऐसे केस आ रहे हैं। विभाग के अनुसार, जांच के लिए आने वाले 50 फीसदी मामलों में मायके और ससुराल वालों के ज्यादा दखल की बात सामने आई है। वहीं, एक साल में घरेलू हिंसा के मामलों में 50 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महिला कल्याण विभाग में घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत जांच के लिए पिछले दो वर्षो में 515 केस आए हैं। प्रोबेशन अधिकारी अतुल कुमार सोनी ने बताया कि पति-पत्नी का आपसी विवाद घरेलू हिंसा का कारण बन रहा है। ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
पिछले दो सालों में आए 50 प्रतिशत ऐसे मामले हैं, जिनमें मायके या ससुराल वालों का ज्यादा हस्तक्षेप विवाद का कारण बन गया। घरेलू हिंसा के मामलों की जांच के दौरान ये रिपोर्ट सामने आई है। जांच के बाद एक महीने में इनकी रिपोर्ट बनाकर कोर्ट को भेजनी होती है। कई बार तो जांच के लिए बुलाने पर एक पक्ष आता ही नहीं है। ऐसे में नोटिस भेजकर बुलाना पड़ता है। कुछ मामलों में पति-पत्नी दोनों का कामकाजी होना, एक दूसरे पर शक करना और प्रोपर्टी विवाद भी घरेलू हिंसा का कारण बन रहा है।
एक वर्ष में बढ़े घरेलू हिंसा के मामले
वर्ष 2020 में घरेलू हिंसा के 162 केस दर्ज किए गए थे। जबकि वर्ष 2021 में दर्ज मामलों की संख्या 353 रही। एक वर्ष में घरेलु हिंसा के मामले में खासी बढ़ोतरी हुई है। इनमें से कई मामले कोर्ट की तरफ से जांच के लिए भेजे गए हैं।
बातचीत से सुलझ सकते हैं झगड़े
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सहनशीलता कम होने की वजह से भी घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं। छोट-छोटी बातों से रिश्तों में दरार आ रही हैं। अक्सर झगड़े के बाद पति और पत्नी में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं होता है। जबकि घर में बैठकर झगड़ा सुलझाने की कोशिश करने पर ज्यादातर मामलों में बात बन सकती है।