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अंगूठे का क्लोन बनाकर साइबर ठगों ने उड़ाए पैसे
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नोएडा। सेक्टर-168 निवासी एक शख्स के अंगूठे का क्लोन बनाकर प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन से 19 हजार रुपये निकालने का मामला सामने आया है। साइबर सेल की जांच के बाद कोतवाली एक्सप्रेसवे पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
पुलिस के मुताबिक, छपरौली बांगर निवासी सुंदर गांव में ही किराना स्टोर चलाते हैं। उनका फेज टू स्थित पंजाब नेशनल बैंक में खाता है। 14 मई की रात को साइबर ठगों ने उनके खाते से दस हजार रुपये निकाल लिए। जब उन्हें मेसेज से इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने 9 हजार रुपये खाते में छोड़कर शेष राशि निकाल ली। 16 मई को उनके खाते बचे हुए पैसे भी साइबर ठगों ने निकाल लिए। इसके बाद उन्होंने बैंक जाकर शिकायत की तो पता चला कि यह पैसा पीओएस मशीन से निकाला गया है। इसमें पता चला है कि किसी ने उनके अंगूठे का क्लोन बनाकर वारदात को अंजाम दिया है। बैंक से जानकारी मिलने के बाद इस मामले में पीड़ित ने कमिश्नरेट पुलिस के साइबर सेल से शिकायत की थी। नोएडा जोन के एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि यह मामला पीओएस मशीन के जरिये अंगूठा क्लोन करके फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है। इस मामले में बृहस्पतिवार को कोतवाली एक्सप्रेसवे में मुकदमा पंजीकृत किया है। जांच की जा रही है।
क्या है पीओएस मशीन
पीओएस एक कंप्यूटराइज्ड मशीन है जिसका उपयोग कैश रजिस्टर के स्थान पर किया जाता है। यह मशीन डेबिट-क्रेडिट कार्ड को ऑनलाइन तरीके से पढ़ लेती है और खरीद की पुष्टि कर ग्राहकों को सामान की रसीद या बिल देने का काम करती है। पीओएस मशीन को प्वाइंट ऑफ सेल कहा जाता है यानी यह किसी दुकान या स्टोर में बिक्री का केंद्र होता है जहां से ग्राहक सामान खरीदते हैं।
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रजिस्ट्री कार्यालयों और ग्राहक सेवा केंद्र से लेते हैं अंगूठे के निशान
यूपी एसटीएफ की टीम ने इस तरह के कई मामलों का पहले खुलासा किया है जिसमें यह पता चला है कि पीओएस मशीन के साथ आरोपी रजिस्ट्री कार्यालयों और ग्राहक सेवा केंद्र से अंगूठे का निशान लेते हैं। इसके बाद क्लोन कर ठगी करते हैं। इन घटनाओं में शामिल होने वाले आरोपियों को रजिस्ट्री कार्यालयों या ग्राहक सेवा केंद्र जैसे जगहों पर काम करने वाले लोग अंगूठे के नमूने मुहैया कराते हैं। हालांकि, कमिश्नरेट पुलिस की तरफ से अभी तक इस तरह के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
पलवल में भी आया था मामला सामने
पीओएस से ठगी के मामलों में एनसीआर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 3 दिन पहले ही पलवल में पुलिस ने इस तरह के एक गिरोह का खुलासा किया था। गिरोह ने रजिस्ट्री विभाग से कागजात लेकर उनके अंगूठे के क्लोन का इस्तेमाल किया था। इसी तरह के कुछ मामले दिल्ली और गाजियाबाद में भी आए हैं। पिछले वर्ष एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने भी एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया था जो पीओएस के माध्यम से फर्जीवाड़ा कर रहा था।
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पुलिस के मुताबिक, छपरौली बांगर निवासी सुंदर गांव में ही किराना स्टोर चलाते हैं। उनका फेज टू स्थित पंजाब नेशनल बैंक में खाता है। 14 मई की रात को साइबर ठगों ने उनके खाते से दस हजार रुपये निकाल लिए। जब उन्हें मेसेज से इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने 9 हजार रुपये खाते में छोड़कर शेष राशि निकाल ली। 16 मई को उनके खाते बचे हुए पैसे भी साइबर ठगों ने निकाल लिए। इसके बाद उन्होंने बैंक जाकर शिकायत की तो पता चला कि यह पैसा पीओएस मशीन से निकाला गया है। इसमें पता चला है कि किसी ने उनके अंगूठे का क्लोन बनाकर वारदात को अंजाम दिया है। बैंक से जानकारी मिलने के बाद इस मामले में पीड़ित ने कमिश्नरेट पुलिस के साइबर सेल से शिकायत की थी। नोएडा जोन के एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि यह मामला पीओएस मशीन के जरिये अंगूठा क्लोन करके फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है। इस मामले में बृहस्पतिवार को कोतवाली एक्सप्रेसवे में मुकदमा पंजीकृत किया है। जांच की जा रही है।
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क्या है पीओएस मशीन
पीओएस एक कंप्यूटराइज्ड मशीन है जिसका उपयोग कैश रजिस्टर के स्थान पर किया जाता है। यह मशीन डेबिट-क्रेडिट कार्ड को ऑनलाइन तरीके से पढ़ लेती है और खरीद की पुष्टि कर ग्राहकों को सामान की रसीद या बिल देने का काम करती है। पीओएस मशीन को प्वाइंट ऑफ सेल कहा जाता है यानी यह किसी दुकान या स्टोर में बिक्री का केंद्र होता है जहां से ग्राहक सामान खरीदते हैं।
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रजिस्ट्री कार्यालयों और ग्राहक सेवा केंद्र से लेते हैं अंगूठे के निशान
यूपी एसटीएफ की टीम ने इस तरह के कई मामलों का पहले खुलासा किया है जिसमें यह पता चला है कि पीओएस मशीन के साथ आरोपी रजिस्ट्री कार्यालयों और ग्राहक सेवा केंद्र से अंगूठे का निशान लेते हैं। इसके बाद क्लोन कर ठगी करते हैं। इन घटनाओं में शामिल होने वाले आरोपियों को रजिस्ट्री कार्यालयों या ग्राहक सेवा केंद्र जैसे जगहों पर काम करने वाले लोग अंगूठे के नमूने मुहैया कराते हैं। हालांकि, कमिश्नरेट पुलिस की तरफ से अभी तक इस तरह के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
पलवल में भी आया था मामला सामने
पीओएस से ठगी के मामलों में एनसीआर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 3 दिन पहले ही पलवल में पुलिस ने इस तरह के एक गिरोह का खुलासा किया था। गिरोह ने रजिस्ट्री विभाग से कागजात लेकर उनके अंगूठे के क्लोन का इस्तेमाल किया था। इसी तरह के कुछ मामले दिल्ली और गाजियाबाद में भी आए हैं। पिछले वर्ष एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने भी एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया था जो पीओएस के माध्यम से फर्जीवाड़ा कर रहा था।