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नौकरियों के नाम पर ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़
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हेडिंग: सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाला गिरोह पकड़ा
सबहेड: एसटीएफ की टीम ने बिजनौर से सरगना सहित दो आरोपी किए गिरफ्तार
अनफिट अभ्यर्थियों को दिला देते थे मिलिट्री अस्पताल से फिटनेस प्रमाण पत्र
रेलवे, पुलिस, सेना और ग्रुप डी की नौकरियां दिलाने का देते थे झांसा
नौकरी लगवाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 3 से 5 लाख रुपये लेते थे
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर की एसटीएफ यूनिट ने ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो पुलिस, सेना, रेलवे व ग्रुप डी में सरकारी नौकरियों की परीक्षा पास कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से ठगी करता है। एसटीएफ ने गिरोह के सरगना व उसके साथी को गिरफ्तार किया है। आरोपी अनफिट अभ्यर्थियों को मिलिट्री अस्पताल से फिटनेस प्रमाण पत्र भी दिला देते थे। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल, एक फॉरच्यूनर, एक एक्सयूवी, पांच अनफिट अभ्यर्थियों के मिलिट्री अस्पताल की तरफ से जारी प्रमाण पत्र, 1.65 लाख रुपये व अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
सीओ एसटीएफ राजकुमार मिश्रा के मुताबिक, एसटीएफ ने बिजनौर के थाना शिवालाकला क्षेत्र से सूरज उर्फ शैलेंद्र मलिक निवासी भदोड़ा, थाना रोहटा मेरठ और वीरेंद्र निवासी गांव मझौला गुर्जर, बिजनौर को गिरफ्तार किया है। गिरोह में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ टीम बागपत आदि क्षेत्र में दबिश दे रही है। कुछ दिनों से सूचना मिल रही थी कि मेरठ मंडल मेें सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाला गिरोह संचालित है। सूचना पर बिजनौर के शिवालाकला बस अड्डे पर आरोपियों की घेराबंदी की गई। टीम ने वहां से सूरज व वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह गिरोह बनाकर सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों को भर्ती परीक्षा में पास कराने का झांसा देकर तीन से पांच लाख रुपये तक हड़पते हैं। सूरज ने बताया कि वीरेंद्र अभ्यर्थी व उनके परिजनों को उसके पास लेकर आता है। इसके बाद भर्ती परीक्षा में पास कराने का सौदा होता है। अगर अभ्यर्थी अपने बूते पास हो जाए तो ठीक है, अन्यथा वह फेल होने वाले परीक्षार्थियों के रुपये भी हड़प लेते हैं।
एसटीएफ कर्मी ने अभ्यर्थी बनकर फंसाया
एसटीएफ ने मामले का खुलासा करने के लिए अपने कर्मी को अभ्यर्थी बनाकर आरोपियों के पास भेजा था। आरोपियों ने 30 से अधिक अभ्यर्थियों व उनके परिजनों से संपर्क साध लिया था और कुछ से उन्होंने अग्रिम रुपये भी लिए थे। आरोपी बिजनौर में ऐसे ही अभ्यर्थियों से रुपये लेने आए थे, लेकिन इससे पहले ही उन्हें दबोच लिया गया। गिरोह के अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए टीमें बिजनौर सहित अन्य जगहों पर दबिश दे रही हैं। वहीं, जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेज टीम को मिले हैं, उन्हें भी तलाश किया जा रहा है।
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चार साल से कर रहे थे ठगी
आरोपी चार साल से इस तरह की ठगी कर रहे थे और बिजनौर व मेरठ में बैठकर नेटवर्क को पूरे प्रदेश में चला रहे थे। ग्राम विकास अधिकारी, सहकारी बैंक, एसएससी, पुलिस, सेना और एलटी ग्रेड की नौकरी लगवाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 3 से 5 लाख रुपये लेते थे। इस गिरोह में कई लोग शामिल हैं जो सूरज के पास अभ्यर्थियों को पहुंचाते थे। इसके एवज में प्रति अभ्यर्थी पचास हजार रुपये मिलते थे।
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सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले गिरोह के सरगना व उसके साथी को पकड़ा गया है। आरोपी परीक्षा में धांधली नहीं करा पाते थे। केवल अभ्यर्थियों से नौकरी लगवाने के नाम पर तीन से पांच लाख रुपये लेते थे।
- राजकुमार मिश्रा, क्षेत्राधिकारी, एसटीएफ
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हेडिंग: सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाला गिरोह पकड़ा
सबहेड: एसटीएफ की टीम ने बिजनौर से सरगना सहित दो आरोपी किए गिरफ्तार
अनफिट अभ्यर्थियों को दिला देते थे मिलिट्री अस्पताल से फिटनेस प्रमाण पत्र
रेलवे, पुलिस, सेना और ग्रुप डी की नौकरियां दिलाने का देते थे झांसा
नौकरी लगवाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 3 से 5 लाख रुपये लेते थे
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर की एसटीएफ यूनिट ने ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो पुलिस, सेना, रेलवे व ग्रुप डी में सरकारी नौकरियों की परीक्षा पास कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से ठगी करता है। एसटीएफ ने गिरोह के सरगना व उसके साथी को गिरफ्तार किया है। आरोपी अनफिट अभ्यर्थियों को मिलिट्री अस्पताल से फिटनेस प्रमाण पत्र भी दिला देते थे। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल, एक फॉरच्यूनर, एक एक्सयूवी, पांच अनफिट अभ्यर्थियों के मिलिट्री अस्पताल की तरफ से जारी प्रमाण पत्र, 1.65 लाख रुपये व अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
सीओ एसटीएफ राजकुमार मिश्रा के मुताबिक, एसटीएफ ने बिजनौर के थाना शिवालाकला क्षेत्र से सूरज उर्फ शैलेंद्र मलिक निवासी भदोड़ा, थाना रोहटा मेरठ और वीरेंद्र निवासी गांव मझौला गुर्जर, बिजनौर को गिरफ्तार किया है। गिरोह में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ टीम बागपत आदि क्षेत्र में दबिश दे रही है। कुछ दिनों से सूचना मिल रही थी कि मेरठ मंडल मेें सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाला गिरोह संचालित है। सूचना पर बिजनौर के शिवालाकला बस अड्डे पर आरोपियों की घेराबंदी की गई। टीम ने वहां से सूरज व वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह गिरोह बनाकर सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों को भर्ती परीक्षा में पास कराने का झांसा देकर तीन से पांच लाख रुपये तक हड़पते हैं। सूरज ने बताया कि वीरेंद्र अभ्यर्थी व उनके परिजनों को उसके पास लेकर आता है। इसके बाद भर्ती परीक्षा में पास कराने का सौदा होता है। अगर अभ्यर्थी अपने बूते पास हो जाए तो ठीक है, अन्यथा वह फेल होने वाले परीक्षार्थियों के रुपये भी हड़प लेते हैं।
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एसटीएफ कर्मी ने अभ्यर्थी बनकर फंसाया
एसटीएफ ने मामले का खुलासा करने के लिए अपने कर्मी को अभ्यर्थी बनाकर आरोपियों के पास भेजा था। आरोपियों ने 30 से अधिक अभ्यर्थियों व उनके परिजनों से संपर्क साध लिया था और कुछ से उन्होंने अग्रिम रुपये भी लिए थे। आरोपी बिजनौर में ऐसे ही अभ्यर्थियों से रुपये लेने आए थे, लेकिन इससे पहले ही उन्हें दबोच लिया गया। गिरोह के अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए टीमें बिजनौर सहित अन्य जगहों पर दबिश दे रही हैं। वहीं, जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेज टीम को मिले हैं, उन्हें भी तलाश किया जा रहा है।
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चार साल से कर रहे थे ठगी
आरोपी चार साल से इस तरह की ठगी कर रहे थे और बिजनौर व मेरठ में बैठकर नेटवर्क को पूरे प्रदेश में चला रहे थे। ग्राम विकास अधिकारी, सहकारी बैंक, एसएससी, पुलिस, सेना और एलटी ग्रेड की नौकरी लगवाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 3 से 5 लाख रुपये लेते थे। इस गिरोह में कई लोग शामिल हैं जो सूरज के पास अभ्यर्थियों को पहुंचाते थे। इसके एवज में प्रति अभ्यर्थी पचास हजार रुपये मिलते थे।
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सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले गिरोह के सरगना व उसके साथी को पकड़ा गया है। आरोपी परीक्षा में धांधली नहीं करा पाते थे। केवल अभ्यर्थियों से नौकरी लगवाने के नाम पर तीन से पांच लाख रुपये लेते थे।
- राजकुमार मिश्रा, क्षेत्राधिकारी, एसटीएफ