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इमरजेंसी में सलाखों के पीछे रहे कैदियों ने लगाए ताउम्र पत्र में धांधली के आरोप
Updated Fri, 20 Apr 2018 06:28 PM IST
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आपातकाल में सजा काट चुके लोगों ने लगाए ताम्र पत्र में धांधली के आरोप
आपातकाल में सजा भुगत चुके लोगों ने ताम्र पत्र देने में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसकी शिकायत सीएम को पत्र लिखकर की है। आरोप है कि ऐसे लोगों को साल 2015-16 के दौरान ताम्र पत्र दिए गए जो योग्य नहीं थे।
जलालपुर फिरोजपुर के पूर्व सरपंच असगर का कहना है कि उनके दादा पूर्व सरपंच हाजी बत्तू खान ने वर्ष 1976 में गुरुग्राम की जेल में 14 दिन की सजा काटी थी। अभी तक जिला प्रशासन की तरफ से कोई निमंत्रण इन तीन वर्षों में उन्हें नहीं मिला है। जिला प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे में नाम था फिर भी ताम्र पत्र से वंचित रहना पड़ा। हरियाणा वक्फ बोर्ड के सदस्य मौलाना मोहम्मद खालिद हुसैन बताते हैं कि उनके पिता हजरत मौलाना नियाज मोहम्मद भी नसबंदी के दौरान छह महीने लगातार अंबाला जेल में रहे थे। उनके साथ हुकम सिंह (बाद में सीएम बने), नानाजी देशमुख, मनीराम बागड़ी और मेवात के अड़बर से हाजी अल्लाबक्श भी जेल में रहे थे। उन्होंने कहा कि जो मर चुके हैं उनकी औलादों को योजना का लाभ मिलना चाहिए। हाजी अब्दुल सत्तार ने बताया कि सीएम के नाम पत्र भेजा है जिसमें शुभ्र ज्योत्सना योजना का लाभ देने की मांग की गई है।
भाजपा नेता ड़ॉ. बशीर अहमद ने सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया है और सवाल भी उठाए हैं कि ऐसे लोगों को ताम्र पत्र दिए गए हैं जो आपातकाल के दौरान जेल गए ही नहीं। नूंह जिले से ऐसे दर्जनों इमरजेंसी के कैदी रह गए हैं जो वास्तव में सलाखों के पीछे गए थे। ये भी बताया कि सन् 1976, नसबंदी के दौर में नगीना के सरकारी अस्पताल में पुलिस की फायरिंग में अटेरना व खैचेतान के दो लोगों की मौत हो गई थी। आज तक ऐसे लोगों को भी ताम्र पत्र नहीं मिला है। सीएम को पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा।
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ड़ॉ. बशीर अहमद ने बताया कि जिला प्रशासन ने उन्हे कई बार ताम्र पत्र के लिए बुलाया था लेकिन आखिरी वक्त में कुछ लोगों ने जिला प्रशासन को गुमराह कर दिया और ऐसे लोगों को ताम्र पत्र मिले जो इस सम्मान के लायक नहीं थे।
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आपातकाल में सजा भुगत चुके लोगों ने ताम्र पत्र देने में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसकी शिकायत सीएम को पत्र लिखकर की है। आरोप है कि ऐसे लोगों को साल 2015-16 के दौरान ताम्र पत्र दिए गए जो योग्य नहीं थे।
जलालपुर फिरोजपुर के पूर्व सरपंच असगर का कहना है कि उनके दादा पूर्व सरपंच हाजी बत्तू खान ने वर्ष 1976 में गुरुग्राम की जेल में 14 दिन की सजा काटी थी। अभी तक जिला प्रशासन की तरफ से कोई निमंत्रण इन तीन वर्षों में उन्हें नहीं मिला है। जिला प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे में नाम था फिर भी ताम्र पत्र से वंचित रहना पड़ा। हरियाणा वक्फ बोर्ड के सदस्य मौलाना मोहम्मद खालिद हुसैन बताते हैं कि उनके पिता हजरत मौलाना नियाज मोहम्मद भी नसबंदी के दौरान छह महीने लगातार अंबाला जेल में रहे थे। उनके साथ हुकम सिंह (बाद में सीएम बने), नानाजी देशमुख, मनीराम बागड़ी और मेवात के अड़बर से हाजी अल्लाबक्श भी जेल में रहे थे। उन्होंने कहा कि जो मर चुके हैं उनकी औलादों को योजना का लाभ मिलना चाहिए। हाजी अब्दुल सत्तार ने बताया कि सीएम के नाम पत्र भेजा है जिसमें शुभ्र ज्योत्सना योजना का लाभ देने की मांग की गई है।
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भाजपा नेता ड़ॉ. बशीर अहमद ने सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया है और सवाल भी उठाए हैं कि ऐसे लोगों को ताम्र पत्र दिए गए हैं जो आपातकाल के दौरान जेल गए ही नहीं। नूंह जिले से ऐसे दर्जनों इमरजेंसी के कैदी रह गए हैं जो वास्तव में सलाखों के पीछे गए थे। ये भी बताया कि सन् 1976, नसबंदी के दौर में नगीना के सरकारी अस्पताल में पुलिस की फायरिंग में अटेरना व खैचेतान के दो लोगों की मौत हो गई थी। आज तक ऐसे लोगों को भी ताम्र पत्र नहीं मिला है। सीएम को पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा।
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ड़ॉ. बशीर अहमद ने बताया कि जिला प्रशासन ने उन्हे कई बार ताम्र पत्र के लिए बुलाया था लेकिन आखिरी वक्त में कुछ लोगों ने जिला प्रशासन को गुमराह कर दिया और ऐसे लोगों को ताम्र पत्र मिले जो इस सम्मान के लायक नहीं थे।