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Noida News: नैनीताल बैंक से 16 करोड़ की साइबर ठगी में शामिल नाइजीरियन की जमानत खारिज
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(अदालत से)
- अदालत ने कहा कि गंभीर संगठित अपराध में संलिप्तता का संदेह, ठुकराई दूसरी अर्जी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बहुचर्चित साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी नाइजीरियन नागरिक यूमेलाकेइ इमेका उर्फ एलेक्स की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले के प्रथम दृष्टया साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं और अपराध संगठित प्रकृति का है, ऐसे में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।
अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता सुमित कुमार श्रीवास्तव ने 10 जुलाई 2024 को थाना साइबर क्राइम में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि नैनीताल बैंक व आरबीआई के चैनल को हैक कर लगभग 16.71 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। यह रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर ली गई थी। जांच के दौरान कई सहआरोपियों के बयान और बैंक लेनदेन से आरोपी एलेक्स का नाम सामने आया। आरोपी ने सहआरोपियों के साथ मिलकर फर्जी फर्में खोलकर बैंक खाते किराये पर लिए और नाइजीरियन नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराए। इन खातों में आई राशि का बंटवारा किया गया और आरोपी को कमीशन के रूप में हिस्सा मिला।आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी भारत में 2009 से रजिस्टर्ड कंपनी चला रहा है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपी की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह एक गंभीर संगठित अपराध है और आरोपी को सहआरोपियों की तरह स्वतः जमानत नहीं मिल सकती।
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- अदालत ने कहा कि गंभीर संगठित अपराध में संलिप्तता का संदेह, ठुकराई दूसरी अर्जी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बहुचर्चित साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी नाइजीरियन नागरिक यूमेलाकेइ इमेका उर्फ एलेक्स की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले के प्रथम दृष्टया साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं और अपराध संगठित प्रकृति का है, ऐसे में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।
अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता सुमित कुमार श्रीवास्तव ने 10 जुलाई 2024 को थाना साइबर क्राइम में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि नैनीताल बैंक व आरबीआई के चैनल को हैक कर लगभग 16.71 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। यह रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर ली गई थी। जांच के दौरान कई सहआरोपियों के बयान और बैंक लेनदेन से आरोपी एलेक्स का नाम सामने आया। आरोपी ने सहआरोपियों के साथ मिलकर फर्जी फर्में खोलकर बैंक खाते किराये पर लिए और नाइजीरियन नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराए। इन खातों में आई राशि का बंटवारा किया गया और आरोपी को कमीशन के रूप में हिस्सा मिला।आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी भारत में 2009 से रजिस्टर्ड कंपनी चला रहा है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपी की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। यह एक गंभीर संगठित अपराध है और आरोपी को सहआरोपियों की तरह स्वतः जमानत नहीं मिल सकती।
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