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फर्जी सरकारी वेबसाइट बनाकर ठगी के तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

Sun, 14 Mar 2021 01:16 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 14 Mar 2021 01:16 AM IST
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Court dismisses the bail pleas of three accused of duping people for thousands
नई दिल्ली। अदालत ने फर्जी सरकारी वेबसाइट बनाकर हजारों की ठगी करने वाले तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि साइबर ठगी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अदालत ने कहा ये आरोपी कथित तौर पर फर्जी सरकारी वेबसाइट जीईएम- गवर्नमेंट ई- माकेर्टप्लेस पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर दो हजार लोगों से ठगी करने में लिप्त हैं।
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पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने आरोपी तुषार नैयर, अनुराग चुघ और सूरज वर्मा की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में आरोपियों के अपराध करने का तरीका बेहद सुनियोजित और कुशल था। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती।
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वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास शर्मा ने अपनी दलीलों में कहा कि आरोपी एक कॉल सेंटर चलाते थे जिसमें सरकारी नौकरियों से संबंधित आवेदन फार्म होते थे। अगर कोई उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन करना चाहता तो उसे फार्म लेने के लिए कॉल सेंटर को कमीशन देनी होती थी।
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कोर्ट के समक्ष आरोपियों के वकील ने यह भी कहा कि इन लेनदेन की देखरेख के लिए सीए भी रखा गया था। वह कॉल सेंटर को होनी वाली आय पर टैक्स भी जमा करवाता था। आरोपियों को झूठे मामले में फंसाया गया है और वह लंबे समय से जेल में हैं।
वहीं जमानत याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील इरफान अहमद ने कहा कि आरोपी सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बनाते थे। इन्होंने वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर दो हजार से ज्यादा युवाओं से ठगी की थी। आरोपियों ने लोगों को धोखा देने के लिए जीईएम से मिलती जुलती वेबसाइट बनाई। उस पर लिखा गया कि वह सेल्फ रजिस्ट्रेशन वेबसाइट है। लोग उस पर भरोसा कर रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए फीस भरते थे। जबकि आरोपी ये वेबसाइट चलाने के लिए अधिकृत नहीं थे।

दिल्ली पुलिस ने फर्जी वेबसाइट के जरिये ठगी के आरोप में कई लोगों को फरवरी में गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि आरोपियों ने फर्जी सरकारी वेबसाइट बनाई और उस पर रजिस्ट्रेशन के लिए तीन हजार रुपये लेते थे जब सरकारी की असली वेबसाइट पर ये बिल्कुल मुफ्त है। - एजेंसी
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