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ऑटो चालक को छत से फेंकने के मामले में सिपाही व अन्य पर एफआईआर का आदेश
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नई दिल्ली। अदालत ने बुराड़ी इलाके में एक ऑटो चालक को पिटाई के बाद बिल्डिंग की छत से फेंकने के मामले में दिल्ली पुलिस के सिपाही तथा अन्य लोगों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिल्ली पुलिस को दिया है। अदालत ने यह आदेश इन लोगों तथा जांच को प्रभावित करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर दिया है। यह वारदात 14 जून की है और पीड़ित राजेश अभी भी गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है।
तीस हजारी अदालत के महानगर दंडाधिकारी ने बुराड़ी थाना पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें प्रारंभिक जांच की जरूरत नहीं थी। मामले में पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि के पर्याप्त साक्ष्य शुरुआती छानबीन में नहीं मिले, इसलिए सिपाही प्रवीन तथा अन्य आरोपी प्रतीक व छोटू पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।
अदालत ने कहा पहली नजर में छानबीन व उसके तरीके को देखकर लगता है कि थाने में तैनात पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच को नाकाम करने का प्रयास थाने में ही किया गया। मामले में लापरवाही करने वाले पुलिसवालों पर जिला पुलिस उपायुक्त कार्रवाई करें।
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कोर्ट ने कहा इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन कानून का उल्लंघन करते हुए आरोपों की छानबीन के प्रारंभिक जांच की गई। जो कुछ जांच में होना चाहिए था वो प्रारंभिक जांच में किया गया। जबकि शिकायतकर्ता ने प्रस्तावित आरोपियों पर बेहद गंभीर संज्ञेय आरोप लगाए थे। इनकी सचाई जांच में पता चल सकती थी इसलिए शिकायत मिलने के बाद तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी।
यह विवाद प्रतीक के इस आरोप से शुरू हुआ था कि राजेश की चार वर्षीय बेटी ने उसके घर से हीरे की अंगूठी चोरी की थी, इससे बच्ची ने इनकार किया था। राजेश को पीटने के बाद छत से फेंक दिया गया था। परिजनों ने 18 जून को शिकायत दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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तीस हजारी अदालत के महानगर दंडाधिकारी ने बुराड़ी थाना पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें प्रारंभिक जांच की जरूरत नहीं थी। मामले में पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि के पर्याप्त साक्ष्य शुरुआती छानबीन में नहीं मिले, इसलिए सिपाही प्रवीन तथा अन्य आरोपी प्रतीक व छोटू पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।
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अदालत ने कहा पहली नजर में छानबीन व उसके तरीके को देखकर लगता है कि थाने में तैनात पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच को नाकाम करने का प्रयास थाने में ही किया गया। मामले में लापरवाही करने वाले पुलिसवालों पर जिला पुलिस उपायुक्त कार्रवाई करें।
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कोर्ट ने कहा इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी लेकिन कानून का उल्लंघन करते हुए आरोपों की छानबीन के प्रारंभिक जांच की गई। जो कुछ जांच में होना चाहिए था वो प्रारंभिक जांच में किया गया। जबकि शिकायतकर्ता ने प्रस्तावित आरोपियों पर बेहद गंभीर संज्ञेय आरोप लगाए थे। इनकी सचाई जांच में पता चल सकती थी इसलिए शिकायत मिलने के बाद तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी।
यह विवाद प्रतीक के इस आरोप से शुरू हुआ था कि राजेश की चार वर्षीय बेटी ने उसके घर से हीरे की अंगूठी चोरी की थी, इससे बच्ची ने इनकार किया था। राजेश को पीटने के बाद छत से फेंक दिया गया था। परिजनों ने 18 जून को शिकायत दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।