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बाल विकास विभाग के कर्मचारियों ने अधिकारी पर लगाया गबन का आरोप
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नूंह। महिला एवं बाल विकास कार्यालय नूंह में 23 लाख के गबन के मामले में एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। आरोपियों ने इस मामले में निलंबित जिला कार्यक्रम अधिकारी ईशा रानी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपी पक्ष ने इस मामले में एसपी से मुलाकात करते हुए रुपये लेने का वीडियो और ऑडियो सौंपते हुए उन्हें सारे मामले से अवगत कराया है।
आरोपी पक्ष का कहना है कि 23 लाख की राशि महिला सशक्तिकरण योजना के तहत नूंह विभाग में आए। ईशा रानी ने 4 फरवरी को सहायक कालूराम के खाते में 8 लाख, डाटा एंट्री ऑपरेटर रविंद्र कुमार, सेवादार खेमचंद व कर्मचारी अमित कुमार के खाते में 5-5 लाख डलवा दी। इसके बाद 5 फरवरी को ईशा रानी ने कालूराम को फोन कर उक्त राशि की मांग की।
23 लाख की राशि में से कालूराम ने 22 अप्रैल तक 7 लाख 50 हजार रुपये ईशा रानी को दे दिए। इसके बाद शेष राशि देने में देरी होने पर ईशा रानी ने मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देते हुए 24 अप्रैल को एसपी को कर्मचारियों द्वारा गबन करने की शिकायत दी। इसके बाद कर्मचारियों ने 27 अप्रैल को 10 लाख नकद व 5 लाख का चेक देकर ईशा रानी के जानकार व्यक्ति नवीन के खाते में पैसे डलवा दिए। जिसके बाद ईशा रानी ने 28 अप्रैल को शिकायत वापस ले ली। आरोपी पक्ष ने कहा कि ईशा रानी ने इस पूरे मामले को रफा दफा करने पर 5 लाख रुपये की और डिमांड की। इसके बाद कर्मचारियों ने 4 लाख की राशि ईशा रानी के जानकार नवीन को देते हुए वीडियो व ऑडियो बना लिया। उक्त अधिकारी ईशा रानी ने इसके बाद फिर एक महीने बाद 29 मई को 23 लाख के गबन की शिकायत देकर मामला दर्ज करा दिया। जबकि उक्त राशि को ईशा रानी ने पहले ही उनके खातों से निकलवाते हुए अपने पास रख ली और इस मामले में कर्मचारियों को ही दोषी बना दिया।
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वहीं इस बारे में ईशा रानी ने कहा कि उक्त लोगों के खिलाफ तीन अलग अलग मुकदमे दर्ज कराएं गए हैं। इन लोगों ने अभी विभाग का कोई कोई पैसा जमा नहीं कराया है। पहले से ही इन लोगों ने विभाग में कई गबन किए हैं। उन्होंने ही मामलों को उजागर किया है। लोग उन्हें झूठे मामले में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले की जांच चल रही है। जांच में जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अपने स्तर पर पूरे मामले के बारे में पता लगा रही है।
- शमशुद्दीन, एसएचओ सिटी थाना नूंह।
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आरोपी पक्ष का कहना है कि 23 लाख की राशि महिला सशक्तिकरण योजना के तहत नूंह विभाग में आए। ईशा रानी ने 4 फरवरी को सहायक कालूराम के खाते में 8 लाख, डाटा एंट्री ऑपरेटर रविंद्र कुमार, सेवादार खेमचंद व कर्मचारी अमित कुमार के खाते में 5-5 लाख डलवा दी। इसके बाद 5 फरवरी को ईशा रानी ने कालूराम को फोन कर उक्त राशि की मांग की।
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23 लाख की राशि में से कालूराम ने 22 अप्रैल तक 7 लाख 50 हजार रुपये ईशा रानी को दे दिए। इसके बाद शेष राशि देने में देरी होने पर ईशा रानी ने मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देते हुए 24 अप्रैल को एसपी को कर्मचारियों द्वारा गबन करने की शिकायत दी। इसके बाद कर्मचारियों ने 27 अप्रैल को 10 लाख नकद व 5 लाख का चेक देकर ईशा रानी के जानकार व्यक्ति नवीन के खाते में पैसे डलवा दिए। जिसके बाद ईशा रानी ने 28 अप्रैल को शिकायत वापस ले ली। आरोपी पक्ष ने कहा कि ईशा रानी ने इस पूरे मामले को रफा दफा करने पर 5 लाख रुपये की और डिमांड की। इसके बाद कर्मचारियों ने 4 लाख की राशि ईशा रानी के जानकार नवीन को देते हुए वीडियो व ऑडियो बना लिया। उक्त अधिकारी ईशा रानी ने इसके बाद फिर एक महीने बाद 29 मई को 23 लाख के गबन की शिकायत देकर मामला दर्ज करा दिया। जबकि उक्त राशि को ईशा रानी ने पहले ही उनके खातों से निकलवाते हुए अपने पास रख ली और इस मामले में कर्मचारियों को ही दोषी बना दिया।
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वहीं इस बारे में ईशा रानी ने कहा कि उक्त लोगों के खिलाफ तीन अलग अलग मुकदमे दर्ज कराएं गए हैं। इन लोगों ने अभी विभाग का कोई कोई पैसा जमा नहीं कराया है। पहले से ही इन लोगों ने विभाग में कई गबन किए हैं। उन्होंने ही मामलों को उजागर किया है। लोग उन्हें झूठे मामले में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले की जांच चल रही है। जांच में जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अपने स्तर पर पूरे मामले के बारे में पता लगा रही है।
- शमशुद्दीन, एसएचओ सिटी थाना नूंह।