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चाइल्ड पीजीआई में होगा कोरोना वैक्सीन का ट्रायल
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चाइल्ड पीजीआई में होगा कोरोना वैक्सीन का ट्रायल
नोएडा। भारत में कोवैक्सीन के नाम से बन रही कोरोना की दवा के तीसरे चरण का ट्रायल जल्द ही सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में शुरू होने वाला है। इसके लिए ड़यन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया है। इस पर प्रबंधन ने प्रक्रिया के लिए सहमति दे दी है। मंगलवार को इसके संबंध में चाइल्ड पीजीआई के निदेशक एवं डॉक्टरों की बैठक हुई। निदेशक डॉ. देवेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि वैक्सीन पर ट्रायल के लिए आईसीएमआर से सहमति बन चुकी है। अब आईसीएमआर जरूरी प्रावधानों पर विचार करेगा। यदि सभी प्रक्रियाएं, नियम, योजनानुसार पूरी होती हैं, तो अस्पताल में वैक्सीन का ट्रायल शुरू किया जाएगा। तीसरे चरण का ट्रायल इंसानों पर किया जाना है। खुद ट्रायल की मंजूरी देने वाले कुछ वालेंटियर को प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। आईसीएमआर प्रोटोकॉल के अनुसार ही परीक्षण शुरू किया जाएगा।
अस्पताल के दो चिकित्सक को चुना गया
अन्य देशों की तरह भारत भी कोरोना की वैक्सीन बनाने का लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए अलग-अलग कंपनियों और संस्थाओं द्वारा कोशिश की जा रही है। मुख्य रूप से तीन वैक्सीन के ट्रायल उम्मीद है। इनमें से एक आईसीएमआर और भारत बायोटेक द्वारा बनाई जा रही कोवैक्सीन है। कोवैक्सीन के दो चरणों का ट्रायल पूरा हो चुका है। इसके ही तीसरे चरण का ट्रायल चाइल्ड पीजीआई में होगा। आईसीएमआर की ओर से शिशु अस्पताल के दो डॉक्टरों को इस प्रक्रिया में शामिल करने के लिए चुना गया है। परीक्षण इनके निर्देशन में होगा।
यह है ट्रायल की प्रक्रिया
किसी भी वैक्सीन को प्रयोग में लाने से पहले उसका कई चरणों में ट्रायल किया जाता है। तीसरे चरण यानी मनुष्यों पर परीक्षण के बाद ही वैक्सीन के प्रयोग की मान्यता मिलती है। आईसीएमआर द्वारा तैयार की जा रही वैक्सीन के अब तक बेहतर परिणाम सामने आए हैं। पहले दोनो चरणों में सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद ही तीसरे चरण को मंजूरी मिली है। आईसीएमआर ने चाइल्ड पीजीआई प्रबंधन से इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उनकी सहमति और जरूरी संसाधनों के बारे में जानकारी मांगी थी। चाइल्ड पीजीआई की सहमति के बाद अब डॉक्टरों और वालेंटियर के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। वालेंटियर कितने होंगे, किस आयु के होंगे, ट्रायल कब होगा आदि जरूरी बिंदुओं पर आईसीएमआर से निर्देश मिलने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल कोई तिथि निश्चित नहीं हुई है।
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नोएडा। भारत में कोवैक्सीन के नाम से बन रही कोरोना की दवा के तीसरे चरण का ट्रायल जल्द ही सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई में शुरू होने वाला है। इसके लिए ड़यन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया है। इस पर प्रबंधन ने प्रक्रिया के लिए सहमति दे दी है। मंगलवार को इसके संबंध में चाइल्ड पीजीआई के निदेशक एवं डॉक्टरों की बैठक हुई। निदेशक डॉ. देवेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि वैक्सीन पर ट्रायल के लिए आईसीएमआर से सहमति बन चुकी है। अब आईसीएमआर जरूरी प्रावधानों पर विचार करेगा। यदि सभी प्रक्रियाएं, नियम, योजनानुसार पूरी होती हैं, तो अस्पताल में वैक्सीन का ट्रायल शुरू किया जाएगा। तीसरे चरण का ट्रायल इंसानों पर किया जाना है। खुद ट्रायल की मंजूरी देने वाले कुछ वालेंटियर को प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। आईसीएमआर प्रोटोकॉल के अनुसार ही परीक्षण शुरू किया जाएगा।
अस्पताल के दो चिकित्सक को चुना गया
अन्य देशों की तरह भारत भी कोरोना की वैक्सीन बनाने का लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए अलग-अलग कंपनियों और संस्थाओं द्वारा कोशिश की जा रही है। मुख्य रूप से तीन वैक्सीन के ट्रायल उम्मीद है। इनमें से एक आईसीएमआर और भारत बायोटेक द्वारा बनाई जा रही कोवैक्सीन है। कोवैक्सीन के दो चरणों का ट्रायल पूरा हो चुका है। इसके ही तीसरे चरण का ट्रायल चाइल्ड पीजीआई में होगा। आईसीएमआर की ओर से शिशु अस्पताल के दो डॉक्टरों को इस प्रक्रिया में शामिल करने के लिए चुना गया है। परीक्षण इनके निर्देशन में होगा।
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यह है ट्रायल की प्रक्रिया
किसी भी वैक्सीन को प्रयोग में लाने से पहले उसका कई चरणों में ट्रायल किया जाता है। तीसरे चरण यानी मनुष्यों पर परीक्षण के बाद ही वैक्सीन के प्रयोग की मान्यता मिलती है। आईसीएमआर द्वारा तैयार की जा रही वैक्सीन के अब तक बेहतर परिणाम सामने आए हैं। पहले दोनो चरणों में सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद ही तीसरे चरण को मंजूरी मिली है। आईसीएमआर ने चाइल्ड पीजीआई प्रबंधन से इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उनकी सहमति और जरूरी संसाधनों के बारे में जानकारी मांगी थी। चाइल्ड पीजीआई की सहमति के बाद अब डॉक्टरों और वालेंटियर के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। वालेंटियर कितने होंगे, किस आयु के होंगे, ट्रायल कब होगा आदि जरूरी बिंदुओं पर आईसीएमआर से निर्देश मिलने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल कोई तिथि निश्चित नहीं हुई है।
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