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स्वयं के स्टेम सेल से ठीक होंगे कोरोना के मरीज
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स्वयं के स्टेम सेल से ठीक होंगे कोरोना के मरीज
ग्रेटर नोएडा। कोरोना के मरीज स्वयं के स्टेम सेल से ठीक हो सकेंगे। नॉलेज पार्क स्थित शारदा विवि में पढ़ने वाले दो चिकित्सकों समेत 8 भारतीय डॉक्टरों की टीम ने इस पर शोध कर दावा किया है कि प्लासेंटा, अंबीलिकल कॉर्ड और बोन मैरो से निकलने वाले स्टेम सेल से मरीज का उपचार किया जा सकता है। इस शोध को इंग्लैंड के मेडिकल जनरल ‘मेसनकाएमल स्टेम जनरल’ ने प्रकाशित किया है। अब ‘भारतीय स्टेम सेल स्टडी ग्रुप’ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से इसके प्रयोग की अनुमति मांगेगी।
नॉलेज पार्क स्थित शारदा मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉ. मधन जया रमन और जूनियर रेजिडेंट डॉ. रश्मि जैन समेत देशभर के 8 डॉक्टरों के ग्रुप ‘भारतीय स्टेम सेल स्टडी ग्रुप’ ने कोविड-19 पर काबू पाने के लिए स्टेम सेल से शोध शुरू किए। डॉ. मधन ने बताया चीन और इजरायल में शोध चल रहा है कि प्लासेंटा (गर्भ में बच्चा जिस झिल्ली में रहता है) और अंबीलिकल कॉर्ड (गर्भनाल) से स्टेम सेल को निकालकर कोरोना के मरीजों का उपचार किया जा सकता है।
भारतीय डॉक्टरों की टीम ने इससे आगे बढ़कर शोध किया है कि मरीज के बोन मैरो (मज्जा) के स्टेम सेल से कोरोना पॉजिटिव मरीजों का उपचार किया जा सकता है। शोध में देखा गया कि पॉजिटिव मरीज की स्टेम सेल में यह वायरस असर नहीं करता। वहीं, रक्त में पहुंचकर स्टेम सेल बड़ी तेजी से अपनी तरह की कोशिकाओं को निर्मित कर मरीजों को ठीक कर सकता है। इस शोध को खासतौर पर स्टेम सेल संबंधित इंग्लैंड के मेडिकल जनरल ने मानक मानते हुए प्रकाशित किया है। इस उपलब्धि से उत्साहित डॉ. मधन जयारमन की अगुवाई में भारतीय टीम आईसीएमआर में प्रयोग के लिए इजाजत मांगेंगे।
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दूसरे व्यक्ति के बोन मैरो की नहीं पड़ेगी जरूरत
शारदा मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. मनीषा जिंदल ने बताया कि जन्मे बच्चे के प्लासेंटा और गर्भनाल से निकाले जाने वाले स्टेम सेल को मरीज में उपयोग करने के लिए पहले उसे मरीज के ब्लड ग्रुप से मैच कराना पड़ेगा। जबकि इन डॉक्टरों की रिसर्च में यदि मरीज की मज्जा का उपयोग किया जाता है तो इसमें न तो उसे मैच कराने की जरूरत पड़ेगी और न ही समय की बर्बादी होगी।
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ग्रेटर नोएडा। कोरोना के मरीज स्वयं के स्टेम सेल से ठीक हो सकेंगे। नॉलेज पार्क स्थित शारदा विवि में पढ़ने वाले दो चिकित्सकों समेत 8 भारतीय डॉक्टरों की टीम ने इस पर शोध कर दावा किया है कि प्लासेंटा, अंबीलिकल कॉर्ड और बोन मैरो से निकलने वाले स्टेम सेल से मरीज का उपचार किया जा सकता है। इस शोध को इंग्लैंड के मेडिकल जनरल ‘मेसनकाएमल स्टेम जनरल’ ने प्रकाशित किया है। अब ‘भारतीय स्टेम सेल स्टडी ग्रुप’ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से इसके प्रयोग की अनुमति मांगेगी।
नॉलेज पार्क स्थित शारदा मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉ. मधन जया रमन और जूनियर रेजिडेंट डॉ. रश्मि जैन समेत देशभर के 8 डॉक्टरों के ग्रुप ‘भारतीय स्टेम सेल स्टडी ग्रुप’ ने कोविड-19 पर काबू पाने के लिए स्टेम सेल से शोध शुरू किए। डॉ. मधन ने बताया चीन और इजरायल में शोध चल रहा है कि प्लासेंटा (गर्भ में बच्चा जिस झिल्ली में रहता है) और अंबीलिकल कॉर्ड (गर्भनाल) से स्टेम सेल को निकालकर कोरोना के मरीजों का उपचार किया जा सकता है।
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भारतीय डॉक्टरों की टीम ने इससे आगे बढ़कर शोध किया है कि मरीज के बोन मैरो (मज्जा) के स्टेम सेल से कोरोना पॉजिटिव मरीजों का उपचार किया जा सकता है। शोध में देखा गया कि पॉजिटिव मरीज की स्टेम सेल में यह वायरस असर नहीं करता। वहीं, रक्त में पहुंचकर स्टेम सेल बड़ी तेजी से अपनी तरह की कोशिकाओं को निर्मित कर मरीजों को ठीक कर सकता है। इस शोध को खासतौर पर स्टेम सेल संबंधित इंग्लैंड के मेडिकल जनरल ने मानक मानते हुए प्रकाशित किया है। इस उपलब्धि से उत्साहित डॉ. मधन जयारमन की अगुवाई में भारतीय टीम आईसीएमआर में प्रयोग के लिए इजाजत मांगेंगे।
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दूसरे व्यक्ति के बोन मैरो की नहीं पड़ेगी जरूरत
शारदा मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. मनीषा जिंदल ने बताया कि जन्मे बच्चे के प्लासेंटा और गर्भनाल से निकाले जाने वाले स्टेम सेल को मरीज में उपयोग करने के लिए पहले उसे मरीज के ब्लड ग्रुप से मैच कराना पड़ेगा। जबकि इन डॉक्टरों की रिसर्च में यदि मरीज की मज्जा का उपयोग किया जाता है तो इसमें न तो उसे मैच कराने की जरूरत पड़ेगी और न ही समय की बर्बादी होगी।