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Noida News: सिविल स्कोर खराब होने पर बैंक जिम्मेदार नहीं, लोन देने से इंकार सही
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जिला उपभोक्ता आयोग सिविल स्कोर खराब होने पर बैंक जिम्मेदार नहीं, लोन देने से इंकार सही
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उपभोक्ता का सिविल स्कोर ठीक कराना बैंक की जिम्मेदारी नहीं है। इसी आधार पर आयोग ने बैंक द्वारा लोन अस्वीकार किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए उपभोक्ता की शिकायत खारिज कर दी। ग्रेटर नोएडा सेक्टर-3 निवासी भूपेंद्र नागर ने यूको बैंक से मकान और कार, दोनों के लिए लोन ले रखा था। उनका कहना है कि बैंक खाते से किस्तें समय पर कटती रही हैं और कोई बकाया नहीं था। 18 नवंबर को उन्हें संदेश मिला कि उनकी किस्त बकाया है। बैंक से पता चला कि सिस्टम त्रुटि के कारण किस्त नहीं कट पाई। बैंक ने उन्हें राशि नकद जमा करने को कहा, लेकिन उपभोक्ता ने लिखित में अनुरोध किया कि किस्त ईसीएस के माध्यम से ही काटी जाए। बैंक द्वारा ऐसा न करने से किस्त समय पर जमा नहीं हो सकी।
उपभोक्ता ने अपने बेटे के लिए सागर मोटर्स से कार बुक कराई और 11 हजार रुपये जमा किए। कार लोन के लिए बैंक से संपर्क करने पर बैंक ने सिविल स्कोर खराब होने का हवाला देते हुए लोन देने से इंकार कर दिया। उपभोक्ता केअनुसार, बैंक की लापरवाही से ही उनका सिविल स्कोर खराब हुआ, जिसके कारण कार की बुकिंग राशि भी जब्त हो गई।
उपभोक्ता ने आयोग में वाद दायर कर सिविल स्कोर ठीक कराने, ईसीएस सुविधा बहाल करने और बुकिंग राशि वापस दिलाने की मांग की। सुनवाई के दौरान बैंक ने अपना पक्ष पेश नहीं किया। साक्ष्यों के अवलोकन के बाद आयोग ने माना कि कार बुकिंग उपभोक्ता का अलग लेन-देन था और बैंक द्वारा सेवा में कमी साबित नहीं होती। आयोग ने स्पष्ट किया कि सिविल स्कोर खराब होने पर लोन न देना बैंक का अधिकार है और स्कोर ठीक कराना बैंक की जिम्मेदारी नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उपभोक्ता का सिविल स्कोर ठीक कराना बैंक की जिम्मेदारी नहीं है। इसी आधार पर आयोग ने बैंक द्वारा लोन अस्वीकार किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए उपभोक्ता की शिकायत खारिज कर दी। ग्रेटर नोएडा सेक्टर-3 निवासी भूपेंद्र नागर ने यूको बैंक से मकान और कार, दोनों के लिए लोन ले रखा था। उनका कहना है कि बैंक खाते से किस्तें समय पर कटती रही हैं और कोई बकाया नहीं था। 18 नवंबर को उन्हें संदेश मिला कि उनकी किस्त बकाया है। बैंक से पता चला कि सिस्टम त्रुटि के कारण किस्त नहीं कट पाई। बैंक ने उन्हें राशि नकद जमा करने को कहा, लेकिन उपभोक्ता ने लिखित में अनुरोध किया कि किस्त ईसीएस के माध्यम से ही काटी जाए। बैंक द्वारा ऐसा न करने से किस्त समय पर जमा नहीं हो सकी।
उपभोक्ता ने अपने बेटे के लिए सागर मोटर्स से कार बुक कराई और 11 हजार रुपये जमा किए। कार लोन के लिए बैंक से संपर्क करने पर बैंक ने सिविल स्कोर खराब होने का हवाला देते हुए लोन देने से इंकार कर दिया। उपभोक्ता केअनुसार, बैंक की लापरवाही से ही उनका सिविल स्कोर खराब हुआ, जिसके कारण कार की बुकिंग राशि भी जब्त हो गई।
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उपभोक्ता ने आयोग में वाद दायर कर सिविल स्कोर ठीक कराने, ईसीएस सुविधा बहाल करने और बुकिंग राशि वापस दिलाने की मांग की। सुनवाई के दौरान बैंक ने अपना पक्ष पेश नहीं किया। साक्ष्यों के अवलोकन के बाद आयोग ने माना कि कार बुकिंग उपभोक्ता का अलग लेन-देन था और बैंक द्वारा सेवा में कमी साबित नहीं होती। आयोग ने स्पष्ट किया कि सिविल स्कोर खराब होने पर लोन न देना बैंक का अधिकार है और स्कोर ठीक कराना बैंक की जिम्मेदारी नहीं है।
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