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Noida News: सीएम सैनी बोले- छठ मैया के कृपा रउआ सभ प बनल रहे...
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कुरुक्षेत्र। छठ महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यमंत्री नायब सैनी। डीआईपीआरओ
कुरुक्षेत्र। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भोजपुरी में सभी को छठ महापर्व की देते हुए कहा, रउआ सभ के छठ पूजा के हार्दिक शुभकामना। छठ मैया के कृपा रउआ सभ प बनल रहे, आउर रउआ के जिंदगी में खुशियां भर दे। उन्होंने कहा, ब्रह्मसरोवर के ई पवित्र भूमि प छठ मैया के पूजा-अर्चना करे के एकदम बेजोड़ अनुभव बा। एहिजा के आस्था आउर श्रद्धा दिल के छू जाला। वे सोमवार को ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग में छठ पूजा महोत्सव के आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में देर रात बोल रहे थे।
उन्होंने कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि छठ पूजा का संबंध हरियाणा से है। लोकमान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी और सबसे पहले सूर्यपुत्र दानवीर कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा करनाल से शुरू की थी। वहां आज भी सूर्य पूजा का विशेष प्रभाव दिखता है। उन्होंने कहा कि वे यहां उस महान संस्कृति का सम्मान कर रहे हैं, जो बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर आए हैं। इसी संस्कृति में छठ पर्व भारतीय संस्कृति का सेतु है। यह हर क्षेत्र को आस्था से जोड़ता है। यह अनुशासन का पर्व है। इसमें चार दिनों तक व्रती माताएं और बहनें तप, संयम और श्रद्धा से व्रत करती हैं। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि सूर्य की उपासना से हमारी संस्कृति व आस्था का प्रकृति से कितना गहरा जुड़ाव है। छठ पूजा के जरिए हमारे जीवन में सूर्य के प्रकाश के महत्व को बताया गया है। चढ़ते सूरज की पूजा हर कोई करता है, लेकिन आप सूरज के हर रूप की पूजा करते हैं।
कैथल में जल्द बनेगा घाट
मुख्यमंत्री ने कहा कि करनाल में सूर्य नारायण मन्दिर के सामने पश्चिमी यमुना कैनाल पर चार करोड़ 48 लाख रुपए की लागत से स्नान घाट का निर्माण किया गया है। इसी घाट के सामने नहर के दूसरे किनारे पर भी स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एक और घाट का निर्माण हो चुका है। इसके अलावा पानीपत, सोनीपत व पंचकुला में भी घाट बन चुके हैं। वहां छठ पर्व पर भारी संख्या में महिलाएं पूजा करती हैं। कैथल में भी जल्द ही घाट बनने जा रहा है।
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उन्होंने कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि छठ पूजा का संबंध हरियाणा से है। लोकमान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी और सबसे पहले सूर्यपुत्र दानवीर कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा करनाल से शुरू की थी। वहां आज भी सूर्य पूजा का विशेष प्रभाव दिखता है। उन्होंने कहा कि वे यहां उस महान संस्कृति का सम्मान कर रहे हैं, जो बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर आए हैं। इसी संस्कृति में छठ पर्व भारतीय संस्कृति का सेतु है। यह हर क्षेत्र को आस्था से जोड़ता है। यह अनुशासन का पर्व है। इसमें चार दिनों तक व्रती माताएं और बहनें तप, संयम और श्रद्धा से व्रत करती हैं। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि सूर्य की उपासना से हमारी संस्कृति व आस्था का प्रकृति से कितना गहरा जुड़ाव है। छठ पूजा के जरिए हमारे जीवन में सूर्य के प्रकाश के महत्व को बताया गया है। चढ़ते सूरज की पूजा हर कोई करता है, लेकिन आप सूरज के हर रूप की पूजा करते हैं।
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कैथल में जल्द बनेगा घाट
मुख्यमंत्री ने कहा कि करनाल में सूर्य नारायण मन्दिर के सामने पश्चिमी यमुना कैनाल पर चार करोड़ 48 लाख रुपए की लागत से स्नान घाट का निर्माण किया गया है। इसी घाट के सामने नहर के दूसरे किनारे पर भी स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत एक और घाट का निर्माण हो चुका है। इसके अलावा पानीपत, सोनीपत व पंचकुला में भी घाट बन चुके हैं। वहां छठ पर्व पर भारी संख्या में महिलाएं पूजा करती हैं। कैथल में भी जल्द ही घाट बनने जा रहा है।

कुरुक्षेत्र। छठ महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यमंत्री नायब सैनी। डीआईपीआरओ
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