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दावा : दिल्ली सरकार को बदनाम करने का रचा षड्यंत्र

Thu, 19 Jan 2023 06:56 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 19 Jan 2023 06:56 PM IST
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Claim: Conspiracy hatched to defame Delhi government
विधानसभा की याचिका समिति की जांच में मुख्य सचिव, वित्त सचिव, स्वास्थ्य सचिव और सोशल वेलफेयर सचिव दोषी करार
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एलजी ने मुख्य सचिव और अधिकारियों के साथ मिलकर बुजुर्गों की पेंशन और मोहल्ला क्लीनिकों का फंड रोका
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा की याचिका समिति ने बृहस्पतिवार को सदन में प्रस्तुत रिपोर्ट में दावा किया कि उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव और अधिकारियों के साथ मिलकर दिल्ली सरकार को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा। एमसीडी चुनाव से पहले बुजुर्गों की पेंशन और मोहल्ला क्लीनिक का फंड रूकवाया। समिति की जांच में मुख्य सचिव, वित्त सचिव, स्वास्थ्य सचिव और सोशल वेलफेयर डायरेक्टर को दोषी करार दिया गया।
सदन में बृहस्पतिवार को याचिका समिति के अध्यक्ष अखिलेशपति त्रिपाठी और सदस्य सौरभ भारद्वाज ने सदन में पेंशन व मोहल्ला क्लीनिक से जुड़ी रिपोर्ट रखी। इस मौके पर त्रिपाठी ने कहा कि उपराज्यपाल ने अधिकारियों को डरा धमकाकर 4.10 लाख बुजुर्गों की पेंशन रोकने का काम किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने गोपनीय क्लॉज के तहत बताया कि उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की व्यवस्था को ठप करने के आदेश दिए हैं। बुजुर्गों की दो हजार रुपये की पेंशन में 200 रुपये केंद्र सरकार की अनुदान राशि होती है, जिसे केंद्र सरकार डेढ़ साल से नहीं दे रही है। ऐसे संवेदनहीन अधिकारियों को कभी भी फ्रंटलाइन की कोई जिम्मेदारी न दी जाए। इनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए कि ये लापरवाह और संवेदनहीन लोग है। इसकी सूचना लोकसभा अध्यक्ष को भी दी जाए। साथ ही, ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
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वहीं, सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य सचिव और वित्त सचिव से विभागों का पैसा रुकवाया। एमसीडी चुनाव से पहले मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टरों के वेतन, जांच और दवाइयां रोकी गईं। इसके पीछे चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचाने की मंशा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आईएएस अधिकारी पूजा जोशी ने एमसीडी चुनाव से पहले अचानक पेंशन रोकने की साजिश रची। दिल्ली के बड़े-बड़े आईएएस अधिकारियों ने घिनौना कृत्य रचा कि गरीब, बुजुर्गों, विधवा दुखी होकर सरकार को गाली दें और इसका फायदा भाजपा को एमसीडी चुनाव में मिले। मुख्य सचिव नरेश कुमार ने सबकुछ मालूम होते हुए भी इस तरीके से गड़बड़ करने वाले अधिकारियों को संरक्षण दिया। उन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मोहल्ला क्लीनिक की रिपोर्ट में याचिका समिति ने स्वास्थ्य सचिव अमित सिंगला, प्रिंसिपल सेक्रेटरी आशीष चंद्र वर्मा को दोषी पाया गया है। मोहल्ला क्लीनिक और पेंशन के मामलों में उपराज्यपाल की भूमिका बहुत संदिग्ध पाई गई है। समिति की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने साफ लफ्जों में कहा कि नरेश कुमार ने उन्हें उपराज्यपाल के नाम से डराया-धमकाया। उपराज्यपाल के हाथ में तबादले का अधिकार होने के कारण जन विरोधी काम करने वाले अधिकारियों को संरक्षण मिल रहा है और अच्छा काम करने वाले अधिकारियों के तबादले किए जा रहे है। यह षडयंत्र दिल्ली सरकार के खिलाफ किया जा रहा है। केंद्र सरकार दुर्भावना के साथ केजरीवाल की सरकार के साथ काम कर रही है।
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