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Noida News: चिल्ला और भंगेल एलिवेटेड रोड परियोजना लेटलतीफी की शिकार
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चिल्ला और भंगेल एलिवेटेड रोड परियोजना लेटलतीफी की शिकार
-कभी तबादलों तो कभी फंड की कमी की वजह से परियोजना की गति पड़ी धीमी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चिल्ला रेगुलेटर से लेकर महामाया फ्लाईओवर तक 5.96 किमी लंबे एलिवेटेड रोड और अगाहपुर से स्पेशल इकोनोमिक जोन तक निर्माणाधीन भंगेल एलिवेटेड रोड परियोजना लेटलतीफी की शिकार है। परियोजना को समय से पूरा करने के लिए काफी मशक्कत की जा रही है। लेकिन तकनीकी बाधाओं की वजह से काम प्रभावित हो रहा है।
चिल्ला एलिवेटेड रोड परियोजना का एस्टिमेट दोबारा बोर्ड से मंजूर कराकर करीब 801 करोड़ की लागत से इसे तैयार कराने का मसौदा तैयार किया गया है। फिलहाल डेढ़ साल से इसका काम बंद है। परियोजना फाइलों में घूम रही है। एक-एक चरण पर मंजूरी की वजह से परियोजना अब 2025 तक पूरा होने की संभावना है। खास बात यह कि अगर समय रहते इसके फंडिंग के लिए शासन तैयार नहीं हुआ तो यह परियोजना 2026 तक भी जा सकती है। इस परियोजना के फंडिंग को लेकर काफी विवाद हो चुका है। प्राधिकरण और शासन को आधा-आधा बजट देना है। लेकिन शासन ने अब तक पैसे नहीं दिए हैं।
इसी तरह से भंगेल एलिवेटेड रोड परियोजना का काम समय से पूरा करने की राह में कई बाधाएं आईं। सबसे ज्यादा बाधाएं अधिकारियों के तबादले को लेकर रहीं। कई बार तबादलों की वजह से काम की प्रगति पर असर पड़ा। वहीं इस काम में बाधक के तौर पर एनजीटी के मानक के अलावा कोरोना काल का भी काफी अहम रोल रहा। कई बार काम बंद हुआ और काम शुरू हुआ। ऐसे में काम की रफ्तार काफी धीमी हो गई। एक बार इस परियोजना के साइट पर एक दुर्घटना भी हुई। इस वजह से भी कुछ समय के लिए काम प्रभावित हुआ। फिलहाल इस परियोजना के अंतर्गत नए वर्क सर्किल प्रभारी की नियुक्ति हो चुकी है। लेकिन परियोजना रफ्तार पकड़ेगी या नहीं। अभी कहना मुश्किल है।
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-कभी तबादलों तो कभी फंड की कमी की वजह से परियोजना की गति पड़ी धीमी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। चिल्ला रेगुलेटर से लेकर महामाया फ्लाईओवर तक 5.96 किमी लंबे एलिवेटेड रोड और अगाहपुर से स्पेशल इकोनोमिक जोन तक निर्माणाधीन भंगेल एलिवेटेड रोड परियोजना लेटलतीफी की शिकार है। परियोजना को समय से पूरा करने के लिए काफी मशक्कत की जा रही है। लेकिन तकनीकी बाधाओं की वजह से काम प्रभावित हो रहा है।
चिल्ला एलिवेटेड रोड परियोजना का एस्टिमेट दोबारा बोर्ड से मंजूर कराकर करीब 801 करोड़ की लागत से इसे तैयार कराने का मसौदा तैयार किया गया है। फिलहाल डेढ़ साल से इसका काम बंद है। परियोजना फाइलों में घूम रही है। एक-एक चरण पर मंजूरी की वजह से परियोजना अब 2025 तक पूरा होने की संभावना है। खास बात यह कि अगर समय रहते इसके फंडिंग के लिए शासन तैयार नहीं हुआ तो यह परियोजना 2026 तक भी जा सकती है। इस परियोजना के फंडिंग को लेकर काफी विवाद हो चुका है। प्राधिकरण और शासन को आधा-आधा बजट देना है। लेकिन शासन ने अब तक पैसे नहीं दिए हैं।
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इसी तरह से भंगेल एलिवेटेड रोड परियोजना का काम समय से पूरा करने की राह में कई बाधाएं आईं। सबसे ज्यादा बाधाएं अधिकारियों के तबादले को लेकर रहीं। कई बार तबादलों की वजह से काम की प्रगति पर असर पड़ा। वहीं इस काम में बाधक के तौर पर एनजीटी के मानक के अलावा कोरोना काल का भी काफी अहम रोल रहा। कई बार काम बंद हुआ और काम शुरू हुआ। ऐसे में काम की रफ्तार काफी धीमी हो गई। एक बार इस परियोजना के साइट पर एक दुर्घटना भी हुई। इस वजह से भी कुछ समय के लिए काम प्रभावित हुआ। फिलहाल इस परियोजना के अंतर्गत नए वर्क सर्किल प्रभारी की नियुक्ति हो चुकी है। लेकिन परियोजना रफ्तार पकड़ेगी या नहीं। अभी कहना मुश्किल है।
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