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Noida News: समय से पहले पैदा होने वालों बच्चों में मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों का खतरा ज्यादा

Tue, 09 Sep 2025 02:49 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 09 Sep 2025 02:49 AM IST
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Children born prematurely are at higher risk of brain-related diseases

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लखनऊ। कुछ सालों में समय से पहले प्रसव के मामले बढ़े हैं। क्वीन मेरी अस्पताल में एक साल में करीब 33 प्रतिशत ऐसे मामले आ चुके हैं। स्त्री एवं बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि आठ महीने से पहले प्रसव होने पर नवजातों को स्वास्थ्य संबंधित कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ समस्याएं तुरंत होती हैं और कुछ लंबे समय तक बनी रहने वाली होती हैं। ऐसे बच्चों में दिमाग से संबंधित बीमारियों का खतरा अधिक होता है। दिमाग की नसों को मजबूत करने के लिए इंजेक्शन लगाए जाते हैं।



क्वीन मेरी में स्त्री एवं प्रसूति विभाग की प्रमुख प्रो. अंजू अग्रवाल बताती हैं कि 33 प्रतिशत मामलों में मां या बच्चे की जान बचाने के लिए समय से पहले प्रसव करना पड़ रहा है। कुछ आठ महीने से पहले के होते हैं और कुछ सात महीने के। सात महीने में पैदा होने वाले बच्चों को एनआईसीयू में रखना जरूरी होता है। ऐसे बच्चों को स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ब्रेन से संबंधित बीमारियों का खतरा इन्हें अधिक होता है।
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इसके अलावा आंख, कान, त्वचा और सांस से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं, जो अक्सर एक सप्ताह के भीतर ही नजर आ जाती हैं, लेकिन कुछ दिक्कतें बाद में पता चलती हैं और ये लंबे समय तक रहती हैं। समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों के लिए कंगारू मदर केयर जरूरी है। इसमें बच्चे को मां की त्वचा के संपर्क में रखा जाता है। इससे शिशु के शरीर का तापमान बना रहता है, हृदय गति स्थिर होती है। मृत्यु का खतरा भी कम होता है।
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ऐसे करें बचाव

- गर्भवतियों को पेट में दर्द होते ही डॉक्टर को दिखाएं।

- गर्भधारण के बीच तीन साल का अंतर रखें।

- एक बार समय से पहले प्रसव होने पर दूसरी बार गर्भधारण के बाद डॉक्टर को दिखाएं।

- समय से पहले प्रसव होने पर जच्चा और बच्चा दोनों को डॉक्टर को दिखाएं।



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समय से पहले प्रसव का कारण

- बच्चेदानी में समस्या होने पर।

- शरीर के किसी भी भाग में संक्रमण होने पर।

- एक बार प्रीटर्म डिलीवरी होने पर दूसरी बार भी समय से पहले प्रसव का खतरा।

- दांतों में कीड़े लगने पर भी।
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