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सभी केंद्रों के ध्यानार्थ::: मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म सिटी को लगेंगे पंख
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मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म सिटी को लगेंगे पंख
नियमों में बदलाव : लाइसेंस को 60 से बढ़ाकर 90 साल तक किया
रेवेन्यू शेयरिंग को किया खत्म, लाभांश में होगी 5 फीसदी की हिस्सेदारी
यीडा के सेक्टर-21 में 1000 एकड़ भूमि पर विकसित होगी फिल्म सिटी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-21 में एक हजार एकड़ पर प्रस्तावित सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म सिटी पर आए संकट के बादल अब छंटने लगे हैं। फिल्म सिटी का सपना साकार करने के लिए सरकार ने फिल्म उद्योग के फीडबैक के बाद तीन बड़े नियमों में बदलाव कर दिया है। इनमें शासन ने लाइसेंस का समय बढ़ाकर 90 साल कर दिया है। इसके अलावा आठ साल तक कोई राशि नहीं देनी होगी और लाभांश की हिस्सेदारी में बदलाव पर सहमति बन गई है।
अगस्त में ही फिल्म सिटी के ग्लोबल टेंडर निकाले जाएंगे और इस कार्य को छह माह में पूरा करना होगा। दरअसल, योगी सरकार का पहले कार्यकाल से ही गौतमबुद्धनगर में मुंबई से सुंदर फिल्म सिटी बनाने का सपना था। मगर कुछ नियमों के कारण इसमें कंपनियां दिलचस्पी नहीं दिखा रही थीं। तीन बार ग्लोबल टेंडर जारी किया, लेकिन एक भी टेंडर नहीं डाला गया। इसके बाद फिल्म उद्योग की बड़ी-बड़ी हस्तियों से इस संबंध में फीडबैक लिया गया। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईआईडीसी मनोज कुमार सिंह व यीडा सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह के साथ बैठक करके इस परियोजना में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने लिए कहा। लखनऊ में पीपीपी मॉडल वाली परियोजना के लिए बनी बिड इवैल्युवेशन कमेटी के समय इन सुझावों को रखा गया। अब इन सुझावों को बिड डाक्यूमेंट और कंशेसन एग्रीमेंट में शामिल किया जाएगा। साथ ही कैबिनेट बैठक से मंजूरी के बाद इसी माह टेंडर निकाले जाएंगे।
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तीन चरणों में होगा फिल्म सिटी का विकास
प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि फिल्म सिटी को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा और पहला चरण में 230 एकड़ जमीन की जरूरत होगी ओर उसी चरण के लिए ही टेंडर निकाले जाएंगे। हालांकि प्राधिकरण ने करीब 800 एकड़ भूमि खरीद ली है और अधिकतर पर कब्जा भी ले लिया है। अभी 200 एकड़ भूमि की खरीद चल रही है। पहले चरण में 156 एकड़ में फिल्म स्टूडियो व बैकलाग बनेगा। 20 एकड़ में फिल्म इंस्टीटयूट और 54 एकड़ में व्यावसायिक गतिविधियां होंगी। इसके अलावा बाकी जमीन पर विला, होटल, प्लाजा और टाउनशिप विकसित की जाएगी। उसमें शूटिंग के लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और एयरपोर्ट आदि बनाए जाएंगे।
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नियमों में यह बदलाव भी किए:
फिल्म सिटी के लिए पहले मोरोटोरियस पीरियड चार से 7 साल कराना था। इसका मतलब जो भी कंपनी इसे विकसित करेगी वह सरकार या प्राधिकरण को 7 साल तक कुछ पैसा नहीं देगी। इसके अलावा प्राधिकरण ने काम करने से पहले ही रेवन्यू शेयरिंग के रूप में 126 करोड़ रुपये मांगे थे। मगर मोरोटोरियस को बढ़ाने के साथ-साथ अब रेवेन्यू शेयरिंग को खत्म कर दिया है। हालांकि कंपनी पर नकेल कसते हुए कमेटी ने सब लाइसेंस देने का नियम भी जारी किया है। इसमें 10 हजार वर्ग मीटर के भूखंड को सब लाइसेंस देने की अनुमति रहेगी।
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नियमों में बदलाव : लाइसेंस को 60 से बढ़ाकर 90 साल तक किया
रेवेन्यू शेयरिंग को किया खत्म, लाभांश में होगी 5 फीसदी की हिस्सेदारी
यीडा के सेक्टर-21 में 1000 एकड़ भूमि पर विकसित होगी फिल्म सिटी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-21 में एक हजार एकड़ पर प्रस्तावित सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट फिल्म सिटी पर आए संकट के बादल अब छंटने लगे हैं। फिल्म सिटी का सपना साकार करने के लिए सरकार ने फिल्म उद्योग के फीडबैक के बाद तीन बड़े नियमों में बदलाव कर दिया है। इनमें शासन ने लाइसेंस का समय बढ़ाकर 90 साल कर दिया है। इसके अलावा आठ साल तक कोई राशि नहीं देनी होगी और लाभांश की हिस्सेदारी में बदलाव पर सहमति बन गई है।
अगस्त में ही फिल्म सिटी के ग्लोबल टेंडर निकाले जाएंगे और इस कार्य को छह माह में पूरा करना होगा। दरअसल, योगी सरकार का पहले कार्यकाल से ही गौतमबुद्धनगर में मुंबई से सुंदर फिल्म सिटी बनाने का सपना था। मगर कुछ नियमों के कारण इसमें कंपनियां दिलचस्पी नहीं दिखा रही थीं। तीन बार ग्लोबल टेंडर जारी किया, लेकिन एक भी टेंडर नहीं डाला गया। इसके बाद फिल्म उद्योग की बड़ी-बड़ी हस्तियों से इस संबंध में फीडबैक लिया गया। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईआईडीसी मनोज कुमार सिंह व यीडा सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह के साथ बैठक करके इस परियोजना में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने लिए कहा। लखनऊ में पीपीपी मॉडल वाली परियोजना के लिए बनी बिड इवैल्युवेशन कमेटी के समय इन सुझावों को रखा गया। अब इन सुझावों को बिड डाक्यूमेंट और कंशेसन एग्रीमेंट में शामिल किया जाएगा। साथ ही कैबिनेट बैठक से मंजूरी के बाद इसी माह टेंडर निकाले जाएंगे।
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तीन चरणों में होगा फिल्म सिटी का विकास
प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि फिल्म सिटी को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा और पहला चरण में 230 एकड़ जमीन की जरूरत होगी ओर उसी चरण के लिए ही टेंडर निकाले जाएंगे। हालांकि प्राधिकरण ने करीब 800 एकड़ भूमि खरीद ली है और अधिकतर पर कब्जा भी ले लिया है। अभी 200 एकड़ भूमि की खरीद चल रही है। पहले चरण में 156 एकड़ में फिल्म स्टूडियो व बैकलाग बनेगा। 20 एकड़ में फिल्म इंस्टीटयूट और 54 एकड़ में व्यावसायिक गतिविधियां होंगी। इसके अलावा बाकी जमीन पर विला, होटल, प्लाजा और टाउनशिप विकसित की जाएगी। उसमें शूटिंग के लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और एयरपोर्ट आदि बनाए जाएंगे।
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नियमों में यह बदलाव भी किए:
फिल्म सिटी के लिए पहले मोरोटोरियस पीरियड चार से 7 साल कराना था। इसका मतलब जो भी कंपनी इसे विकसित करेगी वह सरकार या प्राधिकरण को 7 साल तक कुछ पैसा नहीं देगी। इसके अलावा प्राधिकरण ने काम करने से पहले ही रेवन्यू शेयरिंग के रूप में 126 करोड़ रुपये मांगे थे। मगर मोरोटोरियस को बढ़ाने के साथ-साथ अब रेवेन्यू शेयरिंग को खत्म कर दिया है। हालांकि कंपनी पर नकेल कसते हुए कमेटी ने सब लाइसेंस देने का नियम भी जारी किया है। इसमें 10 हजार वर्ग मीटर के भूखंड को सब लाइसेंस देने की अनुमति रहेगी।