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नोएडा : कार यात्रा सर्विस कंपनी बनाकर सात करोड़ ठगे, मामा-भांजा गिरफ्तार

अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Sun, 08 Aug 2021 04:30 AM IST

सार

आरोपियों ने सरकारी विभागों में 500 कार ठेेके पर लगवाने के नाम पर करीब 150 लोगों से सात करोड़ से ज्यादा की रकम ऐंठ ली।
गिरफ्त में मामा-भांजा
गिरफ्त में मामा-भांजा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बाइक बोट फर्जीवाड़े की तर्ज पर शहर में नया घोटाला सामने आया है। इस बार लोगों को कार यात्रा सर्विस के नाम पर ठगा गया। आरोपियों ने सरकारी विभागों में 500 कार ठेेके पर लगवाने के नाम पर करीब 150 लोगों से सात करोड़ से ज्यादा की रकम ऐंठ ली। पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मुख्य आरोपी दीपक चौधरी और उसके मामा विपिन को सेक्टर-62 गोलचक्कर से गिरफ्तार कर लिया है। इस घोटाले में लखनऊ में तैनात पशुपालन विभाग के निदेशक संतोष कुमार मलिक भी शामिल हैं।

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पुलिस का कहना है कि वह मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के नाम पर लोगों को भरोसा दिलाते थे। दीपक निदेशक का दामाद बताया जा रहा है। आरोपियों के पास से टाटा कंपनी की हैरियर कार, मोबाइल समेत अन्य सामान जब्त किया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।


नोएडा सेंट्रल जोन के एडीसीपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि ग्रेेनो के स्टेलर एमआई सिटी निवासी दीपक ने दोस्त लोकपाल यादव के साथ कार यात्रा सर्विस कंपनी बनाई। इसका मालिक दीपक था। जबकि बैंक खाता दोनों का ज्वाइंट था। आरोपियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकारी विभाग के अधिकारियों को 500 कारें चाहिए। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) ने ठेका निकाला है। उ

न्होंने लोगों को लालच दिया कि तीन लाख देने पर उनके नाम कार फाइनेंस कराई जाएगी। इसकी एवज में कंपनी उन्हें प्रतिमाह 25 हजार देगी और कार की किस्त भी कंपनी खुद भरेगी। जब कार की रकम पूरी हो जाएगी तो मालिक को कार वापस कर दी जाएगी। इसके बाद लोगों ने इसमें पैसा लगा दिया।

ठगी का अहसास होने पर स्टेलर एमआई सिटी निवासी रितु चौधरी ने फेज-थ्री पुलिस से शिकायत कर दी। आरोपियों ने उसके 2.6 करोड़ रुपये गाड़ियों के नाम पर लगवाए थे। दो से तीन माह तक पैसे दिए, लेकिन बाद में जब पूरे पैसे लगवा लिए तो पैसे देने बंद कर दिए जो भी रकम आती लोकपाल और दीपक आपस में बांट लेते थे। शिकायत पर जांच की गई तो ठगी का पता चला।

यूपीएसआरटीसी की ओर से कोई ठेका नहीं निकाला गया था। कार यात्रा सर्विस कंपनी फर्जी निकली। दीपक, लोकपाल, दीपक का मामा विपिन तोमर, मां पुष्पा, पत्नी रुही के अलावा ससुर संतोष भी इस धोखाधड़ी में सहयोग करते थे। जांच में दोषी पाए जाने पर मामला दर्ज कर शनिवार को दीपक व विपिन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। करीब 123 लोग उनके संज्ञान में आ चुके हैं और करीब 28 लोगों की ओर से शिकायतें मिल चुकी हैं। आगे भी जो शिकायतें आएंगी उनको मर्ज किया जाता रहेगा। बताया जा रहा है कि कई लोगों को आर्थिक अपराध शाखा( ईओडब्ल्यू) मेरठ और लखनऊ कार्यालय में भी गाड़ी लगाने का झांसा दिया गया था।

ऐसे लेते थे झांसे में
ठगों ने लोगों को लालच दिया कि तीन लाख देने पर उनके नाम कार फाइनेंस कराई जाएगी। इसकी एवज में कंपनी उन्हें प्रतिमाह 25 हजार देगी और कार की किस्त भी खुद भरेगी।

सेक्टर-63 में आरोपियों ने बना रखा था ऑफिस
नोएडा सेक्टर-63 के सी-ब्लॉक में आरोपियों ने करीब 45 हजार रुपये किराये पर लेकर ऑफिस बना रखा था। यहां पर 10 से 12 लोग काम करते थे। जब रितु चौधरी ने पैसे मांगने शुरू किए तो कर्मचारियों को कम कर दिया गया। अप्रैल में दीपक ने ऑफिस बंद कर दिया। धोखाधड़ी की जानकारी मिली तो वहां तैनात चौकीदार स्तब्ध रह गया। चौकीदार अनुराग ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले ही इस तरह की कुछ जानकारी मिली।

लेनदेन पर साझेदार से हुआ विवाद तो खुला फर्जीवाड़ा

फेज थ्री कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-63 में दो दोस्तों ने मिलकर कार सर्विस यात्रा कंपनी बनाई और कुछ ही दिन में पैसा लगाने वालों की संख्या बढ़ गई, लेकिन दोनों में पैसे के बंटवारे पर विवाद होने लगा। दोनों पैसों को अपने-अपने खाते में ट्रांसफर करा लेते थे। दीपक ने अधिक पैसे बैंक से अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। इस बात पर दोनों में विवाद हुआ और फिर मामला फेज-थ्री कोतवाली पहुंच गया।

लोकपाल ने दीपक पर कंपनी में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। पुलिस अभी मामले में जांच कर ही रही थी कि पीड़िता रितु चौधरी ने थाने में करोड़ों की ठगी की शिकायत दे दी। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया तो पूरा मामला खुलता चला गया। पुलिस आयुक्त ने मामले में गंभीरता से जांच के निर्देश दिए थे।

आरोपी दीपक ने शुरुआत में कंपनी बनाकर लोगों को अपने रहने और शौक के तरीके से प्रभावित किया। उसके लिए नई-नई गाड़ियां और महंगे मोबाइल के अलावा किसी भी सोसाइटी के व्यक्ति पर दो-चार हजार रुपये खर्च करना आम बात थी। इससे सोसाइटी के लोग दीपक के परिवार को अमीर मानते थे। उनके दो फ्लैट थे और दो साल बाद ही उन्होंने एनआरआई सोसाइटी में भी फ्लैट लेकर रहना शुरू कर दिया था।

मुंहबोली बहन बनाकर ठगा
एक व्यक्ति से एक कार के एवज में तीन लाख रुपये लिए जाते थे। इसके बाद उसे 25 हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया जाता था। जबकि आरोपी कार की किस्त भी स्वयं देने का वादा करते थे और चार से पांच साल का ठेका करते थे। इस तरह रितु चौधरी ने अपने मायके-ससुराल के लोगों और दोस्त 27 लोगों से तीन-तीन लाख रुपये लगवा दिए थे। रितु भी परिवार के साथ आरोपियों की ही सोसाइटी में रहती है। दीपक ने रितु को मुंहबोली बहन बना लिया था और परिवार से गहरी दोस्ती भी कर ली थी।

पूरा परिवार ठगी के इस खेल में शामिल
एडीसीपी सेंट्रल जोन अंकुर अग्रवाल ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर दीपक चौधरी, मां पुष्पा, पत्नी रुही, ससुर संतोष कुमार मलिक, मामा विपिन तोमर, दोस्त लोकपाल के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें संतोष लखनऊ के पशुपालन विभाग में निदेशक है। जब दीपक किसी को विश्वास नहीं दिला पाता था तो ससुर से फोन पर बात करा देता था। संतोष बात करके मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से वार्ता होने का दावा करता था। पीड़िता का आरोप है कि दीपक पर जब उसे विश्वास नहीं हुआ तो दीपक उन्हें व दो और लोगों को लखनऊ अपने ससुर से मिलवाने के लिए लेकर गया था।

रितु के नाम से भी बनवाई फर्जी कंपनी
रितु ने बताया कि उसे लखनऊ में बाइक टैक्सी के नाम पर ठेका दिलाने की बात कही गई थी। वह कार यात्रा के कांट्रेक्ट को पूरा करने में लगे हुए थे इसलिए फर्जी तरीके से बाइक कंपनी के लिए रितु के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया और मामा के गाजियाबाद स्थित पते पर उसका गलत तरीके से खाता खुलवा दिया, लेकिन पैसा निकालने का अधिकार नहीं दिया गया। रितु ने बताया कि उसे फंसाने के लिए दीपक ने ऐसा किया था। 6 जनवरी 2021 को (गर्व भारत इनोवेशन) ई- बाइक के नाम से बनाई कंपनी के लिए 61.50 लाख जमा किए थे।

सोसाइटी के तीन लोगों को बनाया शिकार
ग्रेटर नोएडा के स्टेलर एमआई सिटी में आरोपियों ने दो फ्लैट ले रखे थे और एनआरआई सिटी में रहते थे। इन दोनों फ्लैट में अब तो कभी-कभी ही आते थे। इसी सोसाइटी में रहने वाले डॉ. इंद्रजीत सिंह भाटी ने बताया कि उसके फ्लैट के सामने ही आरोपियों का फ्लैट था। पहले दोस्ती की और फिर उससे 20 लाख रुपये इस फर्म में लगवा दिए। हर माह 25-25 हजार रुपये देने का वादा किया था, लेकिन एक माह भी नहीं दिए।

आगरा के ऑफिस का उद्घाटन मंत्री की शक्ल जैसे व्यक्ति से करवाया
आरोपी दीपक ने आगरा में भी लोगों को ठगने के लिए मार्च में आफिस खोला था। इसमें राज्य के एक मंत्री की शक्ल जैसा व्यक्ति बुलाकर उससे फीता कटवाया था। उस फोटो को मंत्री बताकर लोगों के साथ विश्वास कराने के लिए प्रयोग करता था। दीपक ने मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने ससुर के साथ जाकर फोटो खींच लिए थे, ताकि लोगों को दिखाया जाता था कि वह काम से सीएम से मिलने के लिए गया है।
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