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यमुना एक्सप्रेसवे पर नहीं हटेगा सेंट्रल वर्ज

Fri, 06 Dec 2019 01:21 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 06 Dec 2019 01:21 AM IST
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Central Verge will not be removed on Yamuna Expressway
यमुना एक्सप्रेसवे पर नहीं हटेगा सेंट्रल वर्ज
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ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण (यीडा) ने यमुना एक्सप्रेसवे पर बने सेंट्रल वर्ज को न हटाने का फैसला किया है। इसके लिए आईआईटी दिल्ली ने सुझाव दिया था, लेकिन हादसे बढ़ने की आशंका से यीडा सेंट्रल वर्ज हटाना नहीं चाहता। वहीं, आईआईटी की रिपोर्ट के आधार पर तीन माह में 15 फीसदी काम हुए हैं। एक साल में रिपोर्ट के अन्य सुझावों पर अमल करने को संचालन कंपनी से कहा गया है। इन पर करीब 294 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
दरअसल, सड़क हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यमुना एक्सप्रेसवे का आईआईटी दिल्ली से सुरक्षा ऑडिट कराया गया था। करीब चार माह पहले आईआईटी की रिपोर्ट आ गई थी। रिपोर्ट में संस्थान की टीम ने कई सुझाव दिए थे। उसमें एक सुझाव यह भी था कि यमुना एक्सप्रेसवे के सेंट्रल वर्ज को हटा दिया जाए। वहां पर रंबल स्ट्रिप लगा दिए जाएं। साथ ही, प्लास्टिक के तार से फेंसिंग कर दी जाए। सेंट्रल वर्ज न होने से हादसा होने पर कम मौतें होंगी, लेकिन यीडा ने इस सुझाव को फिलहाल टाल दिया है। यीडा के सीईओ का कहना है कि सेंट्रल वर्ज हटाने से एक तरफ के वाहन दूसरी तरफ की रोड पर जाने लगेंगे, जिससे हादसे बढ़ सकते हैं। साथ ही, सेंट्रल वर्ज हटाने में एक साल से अधिक वक्त लग जाएगा। इस दौरान धूल की दिक्कत बढ़ जाएगी, जबकि एनसीआर में प्रदूषण पहले से ही अधिक है। ऐसे में इस सुझाव पर अमल नहीं किया जा रहा।
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हालांकि, उन्होंने आईआईटी के अन्य सुझावों को लागू कराने की बात कही। इसी की समीक्षा करने के लिए बुधवार को सीईओ ने कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसमें कंपनी की तरफ से अब तक 15 फीसदी काम होने की जानकारी दी गई। सीईओ ने दिसंबर 2020 तक बाकी सभी सुझावों पर काम करने का निर्देश दिया।
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इन पर काम हुआ शुरू
यमुना एक्सप्रेसवे पर इंपैक्ट एटिन्यूटर लगाने का काम शुरू हो गया है। एक इंपैक्ट एटिन्यूटर लगा है। पूरे एक्सप्रेसवे पर कुल 22 लगाने हैं। इंपैक्ट एटिन्यूटर खाली जगहों (एक्सप्रेस वे पर कई जगह किनारे खाली जगह रहती है, यह जगह वाहन आदि खड़े करने के लिए होती है) पर लगाए जाने हैं। अगले साल मार्च तक यह काम पूरा हो जाएगा। इसके अलावा 3 लाख वर्ग मीटर थर्मा मार्किंग (चमकती हुई पट्टी) लगाई जानी है। ये पट्टी मुख्य सड़क, प्रवेश, निकास आदि जगहों पर लगाई जानी है। अब तक 1.02 लाख वर्ग मीटर लगाई जा चुकी है। एक्सप्रेसवे पर कुछ बोर्ड हाइवे के अंदर थे। ऐसे बोर्ड 304 थे, सभी हटा दिए गए हैं। इसके अलावा किलोमीटर की जानकारी देने के लिए पत्थर के पिलर थे, इन्हें भी हटा दिया गया है। इनकी जगह रेक्टो रिफलेक्ट बोर्ड लगाए गए हैं। डिवाइडर के दोनों तरफ डब्ल्यू गार्ड रेल्स लगाने थे। ये सभी 330 लगा दिए गए हैं। आगरा-मथुरा के बीच स्पीड बूथ लगा दिया गया है। इससे यहां से गुजरने वाले की गति का पता चलता है और उल्लंघन करने पर चालान होता है। अभी ग्रेटर नोएडा-जेवर और जेवर-मथुरा के बीच ये बूथ लगेंगे। 160 जगहों पर रंबल स्ट्रिप लग चुकी हैं। इन पर से वाहन गुजरने पर वाहन चालक सतर्क हो जाता है। डिवाइडर के बीच में थ्राई पिलर लगाए जाने हैं, ताकि कोई वाहन हादसे के बाद दूसरी तरफ ना जाए। आईआईटी का सुझाव था कि डिवाइडर को प्लेन करने के ये पिलर लगाए जाएं, लेकिन डिवाइडर प्लेन नहीं किया जाएगा। अभी 37वें किलोमीटर पर एक थ्राई पिलर लगाया जाएगा। इसके परिणाम बेहतर आने पर पूरे एक्सप्रेसवे पर लगाए जाएंगे।
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