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Noida News: सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट, आरोपी की जामनत याचिक खारिज
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-बाल यौन शोषण सामग्री के संग्रह, प्रसारण, आदान-प्रदान और अपलोड करने का मामला
-पहले सीबीआई की रिमांड देने की अपील खारिज कर कोर्ट ने आरोपी को किया था रिहा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट-1) की अदालत ने बाल यौन शोषण सामग्री के संग्रह, प्रसारण, आदान-प्रदान और अपलोड करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपराध को गंभीर श्रेणी का माना और जमानत देने से इन्कार कर दिया। इससे पहले कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। वहीं अब आरोपी पक्ष हाईकोर्ट में अपील करेगा।
सीबीआई ने ग्रेनो वेस्ट की एक सोसाइटी में रहने वाले एक व्यक्ति पर बाल यौन शोषण सामग्री के संग्रह, प्रसारण, आदान-प्रदान और अपलोड करने का 31 अक्तूबर, 2025 में आईटी और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। आरोप है कि आरोपी ने पीड़िता को यौन उत्पीड़न की तस्वीरें दिखाईं थीं। यह घटना करीब दो साल पहले की थी। उसके पास से बच्चों को अश्लील वीडियो व सामग्री पास मिली थी। ई-मेल आईडी के खिलाफ दो साइबर टिपलाइन रिपोर्ट भी जेनरेट की गई थी।
पीड़िता के बयान के बाद सीबीआई ने कोर्ट से आरोपी की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने अपील को खारिज कर आरोपी को रिहा कर दिया। उसके बाद सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। जिस पर आरोपी पक्ष की तरफ से कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी गई, लेकिन कोर्ट ने जघन्य अपराध माना और जमानत देने से इन्कार कर दिया है। वहीं आरोपी पक्ष के अधिवक्ता रजनीश यादव ने बताया कि अभी आरोपी को कोर्ट में पेश नहीं किया गया है। अब जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
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-पहले सीबीआई की रिमांड देने की अपील खारिज कर कोर्ट ने आरोपी को किया था रिहा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट-1) की अदालत ने बाल यौन शोषण सामग्री के संग्रह, प्रसारण, आदान-प्रदान और अपलोड करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपराध को गंभीर श्रेणी का माना और जमानत देने से इन्कार कर दिया। इससे पहले कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। वहीं अब आरोपी पक्ष हाईकोर्ट में अपील करेगा।
सीबीआई ने ग्रेनो वेस्ट की एक सोसाइटी में रहने वाले एक व्यक्ति पर बाल यौन शोषण सामग्री के संग्रह, प्रसारण, आदान-प्रदान और अपलोड करने का 31 अक्तूबर, 2025 में आईटी और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। आरोप है कि आरोपी ने पीड़िता को यौन उत्पीड़न की तस्वीरें दिखाईं थीं। यह घटना करीब दो साल पहले की थी। उसके पास से बच्चों को अश्लील वीडियो व सामग्री पास मिली थी। ई-मेल आईडी के खिलाफ दो साइबर टिपलाइन रिपोर्ट भी जेनरेट की गई थी।
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पीड़िता के बयान के बाद सीबीआई ने कोर्ट से आरोपी की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने अपील को खारिज कर आरोपी को रिहा कर दिया। उसके बाद सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। जिस पर आरोपी पक्ष की तरफ से कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी गई, लेकिन कोर्ट ने जघन्य अपराध माना और जमानत देने से इन्कार कर दिया है। वहीं आरोपी पक्ष के अधिवक्ता रजनीश यादव ने बताया कि अभी आरोपी को कोर्ट में पेश नहीं किया गया है। अब जमानत के लिए हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
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